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Muharram: देश में पहली बार ताजिया जुलूस के जंजीरी मातम में नहीं बहेगा खून, जिंदगी बचाने को करेंगे रक्तदान
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Thu, 25 Jun 2026 02:37 PM IST
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सार
अलीगढ़ जिले में 149 ताज़िए निकाले जाएंगे और बड़ी संख्या में अकीदतमंद जंजीरी मातम में शामिल होंगे। ऐसे में रक्तदान अभियान को एक नई सामाजिक मुहिम के रूप में देखा जा रहा है।
ताजिया जुलूस में जंजीरी मातम करने के बजाय रक्तदान के बारे में पत्रकार वार्ता
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
देश में पहली बार अलीगढ़ शहर से एक नई और अनूठी पहल शुरू हो रही है। ताजिया जुलूस में जंजीरी मातम के दौरान खून के बहने की जगह इस बार रक्तदान होगा। इस पहल से जरूरतमंद मरीजों की जान बचाई जा सकेगी।
मुहर्रम की 10वीं तारीख यानी 26 जून को निकलने वाले ताजिया जुलूस में जंजीरी मातम करने के बजाय रक्तदान होगा। ताजिया और अलम जुलूस में मानवता की सेवा से जोड़ने की अनूठी पहल शुरू की गई है। करबला के मुतवल्ली मुख्तार जैदी दी ने अपील की है कि मातम के दौरान बहने वाले खून के बजाय लोग रक्तदान करें, ताकि ज़रूरतमंद मरीजों की जान बचाई जा सके और इंसानियत का पैगाम मजबूत हो।
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इस वर्ष अलीगढ़ जिले में 149 ताज़िए निकाले जाएंगे और बड़ी संख्या में अकीदतमंद जंजीरी मातम में शामिल होंगे। ऐसे में रक्तदान अभियान को एक नई सामाजिक मुहिम के रूप में देखा जा रहा है। मुतवल्ली मुख्तार जैदी ने कहा कि यदि मातम में बहने वाला ख़ून किसी बीमार, घायल या जरूरतमंद व्यक्ति के काम आ जाए, तो यह हजरत इमाम हुसैन की शिक्षा और इंसानियत की सच्ची खिदमत होगी। उन्होंने एक मुहर्रम से 10 मुहर्रम तक सहयोग करने के लिए प्रशासन का शुक्रिया अदा किया है शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद ने कहा कि कर्बला में इमाम हुसैन ने अपनी शहादत देकर दीन को बचाया है।