गो आश्रय स्थल: अलीगढ़ में हालात बदतर, गोवंश भूखा तड़प रहा, 50 रुपये में कहां से लेकर आएं चारा
नगर निगम अलीगढ़ द्वारा संचालित दो गोआश्रय स्थलों में 602 गोवंश पल रहे हैं। जिनकी तस्वीर देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि कैसे उन्हें नांद में काई युक्त पानी पिलाया जाता है। सूखा भूसा खिलाया जाता है, जो अगले दो तीन दिन में खत्म होने के कगार पर है।
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महज 50 रुपये में एक दिन एक गोवंश के लिए बजट दिया जा रहा है। इतनी कम धनराशि में गोवंश के लिए भोजन का इंतजाम करना मुश्किल हो रहा है। अलीगढ़ जिले में सूखे भूसे और धान के पुआल के सहारे इन गो आश्रय स्थलों में गोवंश का पेट भरा जा रहा है।
मथुरा के फरसा वाले बाबा कांड के बाद प्रदेशभर में गोवंश और गो आश्रय स्थल फिर सुर्खियों में आ गए। आनन फानन 21 मार्च शाम मुख्यमंत्री ने बैठक कर सुरक्षा व संसाधनों को लेकर निर्देश जारी किए। मगर अपने जिले में अधिकांश गोआश्रय स्थलों में गोवंश को भरपेट खाना नहीं मिल रहा। अमर उजाला ने 22 मार्च को जिले भर के गो आश्रय स्थलों की तस्वीर देखी। जिनके हालात देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार की मंशा के अनुरूप गोवंश की सेवा नहीं हो पा रही है। अधिकारी गोवंश के पालन और सुरक्षा के नाम पर कागज भरने में लगे हैं।
नगर निगम के दोनों गो आश्रय स्थलों में चारा, भूसा आदि की व्यवस्था है। साथ में चिकित्सक निगरानी के लिए आते हैं। किसी तरह की समस्या नहीं है। सीसीटीवी से भी निगरानी होती है। रविवार को हरा चारा क्यों नहीं आया, ये दिखवाया जाएगा।- डाॅ. राजेश कुमार वर्मा, पशु कल्याण अधिकारी, नगर निगम
जिले में पंचायत स्तर पर गो आश्रय स्थलों की देखरेख व संचालन का जिम्मा संबंधित पंचायत सचिव का है। उनके द्वारा निगरानी की जाती है। हमारे द्वारा चारे का बजट जारी किया जाता है। फिर भी जहां कमियां हैं, वहां निगरानी की जाएगी।- डाॅ. दिवाकर त्रिपाठी, सीवीओ
अब जारी हुए नए निर्देश
पहला तो ये कि सभी जगह सीसीटीवी लगवाए जाएंगे अनिवार्य रूप से। दूसरा दस क्विंटल भूसा हर गोशाला पर रखना अनिवार्य होगा। तीसरा मंडल स्तर पर प्रदेश से टीम जांच व निगरानी के लिए आएगी। वह सच जानकर रिपोर्ट शासन को देगी। जिले का भूसा उस जिले से बाहर बेचने नहीं जाने दिया जाएगा।
ये है नगर निगम के गोआश्रय स्थलों का हाल
नगरीय क्षेत्र में नगर निगम अलीगढ़ द्वारा संचालित दो गोआश्रय स्थलों में 602 गोवंश पल रहे हैं। जिनकी तस्वीर देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि कैसे उन्हें नांद में काई युक्त पानी पिलाया जाता है। सूखा भूसा खिलाया जाता है, जो अगले दो तीन दिन में खत्म होने के कगार पर है। दावे के अनुसार हर दिन हरा चारा लाया जाता है। मगर रविवार को क्यों नहीं आया। इसका किसी के पास जवाब नहीं था। हां, सीसीटीवी से निगरानी व सुरक्षा इंतजाम तो हैं। मगर बीमारी से तड़प रहे गोवंश को देखकर उनकी नियमित जांच व उपचार का अभाव यहां स्पष्ट दिखाई दिया।
चारे का हॉल पड़ा खाली, गोवंश को खिला रहे पुआल
गभाना के वीरपुरा में गोवंश धान का पुआल खाने को मजबूर हैं। 175 गोवंश में कई बीमार हैं। परिसर में गंदगी फैली हुई थी। कर्मचारी ने बताया कि गोवंश की देखभाल के लिए चिकित्सक बुलाने पर आते हैं। इसी तरह जवां के गांव दवथला की गोशाला का भी हाल बेहाल है। इसमें 40 गोवंश हैं। मौके पर हालत इतनी खराब है कि गोवंश के लिए न भूसे की व्यवस्था है और न ही हरे चारे की व्यवस्था है। चारे की जगह पुआल खिलाया जा रहा है। चारे के लिए बना हॉल खाली पड़ा है। ग्राम प्रधान शमशेर खां ने बताया कि जब चारा खत्म हो जाता है, तभी चारा मंगाया जाता है, सुबह चारा खत्म हो गया था।
अकराबाद के नगला सरताज की सरकारी गोशाला में गोवंश को चारे की जगह कुटी हुई पराली खिलाई जा रही है। गोशाला की क्षमता 175 की है, लेकिन 75 गोवंश ही मौके पर मौजूद हैं। देखभाल के लिए करीब तीन कर्मचारी हैं, इसके बाद भी परिसर में गंदगी बनी रहती है। इसी तरह टप्पल क्षेत्र की हजियापुर के पास की गोशाला में तो सुरक्षा का आलम ये है कि यहां कुत्ते गोवंश को नोचते रहते हैं। कोई देखने वाला नहीं होता। कमोबेश यही हालात चंडौस, दादों, जलाली, छर्रा, इगलास, अतरौली आदि क्षेत्र के गो आश्रय स्थलों की है। सबसे खास बात ये है कि देहात में पंचायत के अधिकांश गाे आश्रय स्थलों पर सीसीटीवी तक नहीं हैं। ऐसे में वहां की सही स्थिति की निगरानी नहीं हो सकती।
ये आंकड़े जानिये
- 109 गो आश्रय स्थल जिले की पंचायतों में संचालित
- 21 गो आश्रय स्थल जिले के निकायों में हैं संचालित
- 2 कांजी हाउस भी जिले में हो रहे हैं अभी संचालित
- 32070 गोवंश जिले भर के आश्रय स्थलों में रहते हैं
- 5000 गोवंश जिले में पशु पालक अनुदान पर पाल रहे
- 3 करोड़ रुपये प्रतिमाह इनके चारे का जिले का खर्च
ये तथ्य भी जानिये
- 50 रुपये एक गोवंश का हर दिन चारे का बजट
- 3 किलो भूसा, हरा चारा व अन्य सामग्री देनी है
- 750 रुपये क्विंटल भूसे की कीमत में संभव नहीं
- पंचायत स्तर के अनगिनत स्थलों पर सीसीटीवी नहीं
- पशु चिकित्सकों से नियमित जांच पर उठ रहे सवाल