बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ: बीच फंसी रोरावर की बेटियों की शिक्षा, पांचवीं के बाद आठवीं तक पहुंचीं महज 11 फीसदी बेटी
आंकड़े बताते हैं कि प्राथमिक विद्यालय रोरावर से पिछले चार वर्षों में कक्षा पांच उत्तीर्ण करने वाली 381 छात्राओं में से केवल 41 ही आगे की पढ़ाई के लिए उच्च प्राथमिक विद्यालय, शाहपुर कुतुब पहुंच सकीं। यानी करीब 11 फीसदी बेटियां ही कक्षा आठ तक की पढ़ाई जारी रख पाईं।
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अलीगढ़ शहर के रोरावर क्षेत्र में उच्च प्राथमिक विद्यालय के अभाव का सबसे बड़ा असर बेटियों की शिक्षा पर पड़ रहा है। उच्च शिक्षा के लिए स्कूल दूर और हाईवे किनारे होने के कारण अभिभावकों ने बेटियों को पढ़ाने से बेहतर उन्हें सुरक्षित रखने को तरजीह दी। आंकड़े बताते हैं कि प्राथमिक विद्यालय रोरावर से पिछले चार वर्षों में कक्षा पांच उत्तीर्ण करने वाली 381 छात्राओं में से केवल 41 ही आगे की पढ़ाई के लिए उच्च प्राथमिक विद्यालय, शाहपुर कुतुब पहुंच सकीं। यानी करीब 11 फीसदी बेटियां ही कक्षा आठ तक की पढ़ाई जारी रख पाईं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि छात्राओं को दूर स्थित विद्यालय जाना पड़ता है। बीच में व्यस्त हाईवे पड़ने और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था न होने से अधिकांश अभिभावक बेटियों को आगे पढ़ाने से हिचकते हैं। कई परिवार आर्थिक और सामाजिक कारणों से भी उन्हें दूर स्कूल भेजने में असमर्थ रहते हैं। हाईवे पर हुए हादसों ने भी अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। कई परिवारों ने सुरक्षा के डर से बेटियों की पढ़ाई ही रुकवा दी। अभिभावक राशिद ने बताया कि अपनी बेटी-बेटे को ढाई किलोमीटर दूर हाईवे पर स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय शाहपुर कुतुब में छोड़ने गए थे। तभी एक वाहन ने उन्हें और उनके बेटे को टक्कर मार दी जिसमें उनके कूल्हे में गंभीर चोट आई है। अब सही तरीके से नहीं चल सकते हैं जबकि बेटे की जांघ की हड्डी टूट गई। तब से दोनों की पढ़ाई छूट गई।
वर्ष 2025-26 में प्राथमिक विद्यालय रोरावर से 83 छात्राएं कक्षा पांच उत्तीर्ण हुईं लेकिन इनमें से केवल 15 छात्राओं ने उच्च प्राथमिक विद्यालय शाहपुर कुतुब में प्रवेश लिया। वर्ष 2024-25 में 98 में से सिर्फ पांच, वर्ष 2023-24 में 99 में से 10 और वर्ष 2022-23 में 102 में से केवल 11 छात्राएं ही आगे पढ़ाई के लिए पहुंच सकीं।
कक्षा पांच के बाद आसपास कोई सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय नहीं होने से अभिभावकों के सामने कठिनाई खड़ी हो जाती है। आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण कई परिवार बेटियों को दूर के स्कूल भेजने से कतराते हैं। ऐसे में उनकी पढ़ाई रुक जाती है और कुछ वर्षों बाद शादी कर दी जाती है। अगर क्षेत्र में उच्च प्राथमिक विद्यालय की व्यवस्था हो जाए तो बड़ी संख्या में बेटियां अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगी।- गुलजार अहमद, सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय रोरावर
वर्ष कक्षा पांच में उत्तीर्ण बेटियां उच्च प्राथमिक स्कूल गई छात्राएं
2025-26 83 15
2024-25 98 5
2023-24 99 10
2022-23 102 11
26-27 के पंजीकरण अभी जारी हैं।
प्राथमिक विद्यालय रोरावर को उच्चीकृत करेगा शिक्षा विभाग
बेसिक शिक्षा विभाग प्राथमिक विद्यालय रोरावर को उच्च प्राथमिक विद्यालय में उच्चीकृत करेगा। विद्यालय में 466 बच्चे पंजीकृत हैं। 10 कमरे, चार शिक्षक और 10 शिक्षिकाएं हैं। बीएसए आलोक कुमार सिंह ने बताया कि विद्यालय को उच्चीकृत करने का प्रस्ताव शासन को भेजेंगे। उच्चीकृत होने के बाद कक्षा छह, सात और आठ की कक्षाओं का संचालन हो सकेगा। हालांकि, प्राथमिक विद्यालय और उच्च प्राथमिक विद्यालय के बीच तीन किलोमीटर की दूरी होने पर ही उच्च प्राथमिक विद्यालय बन सकता है। रोरावर और शाहपुर कुतुब के बीच ढाई किलोमीटर की दूरी है। उधर, रोरावर के प्रधानाध्यापक सलमान अहमद ने कहा कि विद्यालय में जगह है इसलिए यह उच्चीकृत हो जाएगा। इसके लिए विभाग में अनुरोध करेंगे।
पढ़ाई छूटने पर शुरू हो जाती है शादी की तैयारी
कक्षा पांच उत्तीर्ण करने के बाद पढ़ाई छूटने के बाद बेटियों को घर के कामकाज की जिम्मेदारी सौंप दी जाती है। समय के साथ परिजन उनके विवाह की तैयारी शुरू कर देते हैं। शादी होते ही आगे की पढ़ाई के सपने परिवार की जिम्मेदारी के तल दबकर सपने ही रह जाते हैं।
अर्शी बचपन से शिक्षक बनने का सपना देखती थीं। कक्षा पांच तक पढ़ाई के बाद आगे पढ़ना चाहती थीं लेकिन स्कूल दूर और सुनसान रास्तों पर है। इसलिए पढ़ाई छूट गई। कुछ वर्षों बाद उनकी शादी हो गई। आज भी उन्हें अधूरी शिक्षा का मलाल है। तस्लीम पढ़ाई में अच्छी थीं और आगे बढ़ना चाहती थीं लेकिन कोई नजदीकी सरकारी स्कूल का विकल्प नहीं था। पढ़ाई छूटने के बाद उनका विवाह कर दिया गया।
चांदनी डॉक्टर बनने का सपना देखती थीं। कक्षा पांच के बाद स्कूल न होने के कारण उनकी पढ़ाई रुक गई। समय के साथ उनका सपना भी अधूरा रह गया। उज्मा पुलिस बनना चाहती हैं लेकिन अब प्राइवेट की पढ़ाई कर रही है।फराह भी उन बेटियों में शामिल हैं जिनकी पढ़ाई कक्षा पांच के बाद रुक गई। हालांकि आज वे चाहती हैं कि आने वाली पीढ़ी की बेटियों को उनकी तरह मजबूर न होना पड़े।