Aligarh News: सजायाफ्ता अपराधी कप्तान दया याचिका पर बरेली सेंट्रल जेल से रिहा, उठे सवाल
शासन में की गई अपील के आधार पर पिछले वर्ष फरवरी में राज्यपाल की संस्तुति पर खैर के गांव बिसारा के कप्तान सिंह की रिहाई का आदेश जारी हुआ, जिसमें कहा गया कि 16 नवंबर 2022 तक उसने 16 वर्ष 1 माह व 13 दिन अपरिहार व 20 वर्ष 9 माह 28 दिन की सपरिहार सजा भोगी है।
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अलीगढ़ जिले की टॉप-10 रंजिशों में शामिल खैर के गांव बिसारा की रंजिश के एक गुट के मुख्य अरोपी कप्तान सिंह को दोहरे हत्याकांड में दया याचिका पर रिहा किया गया है। यह दया याचिका राज्यपाल स्तर से पिछले वर्ष स्वीकृत हुई। उसी संबंध में बरेली केंद्रीय कारागार पहुंचे आदेश पर उसे रिहा कर दिया गया। वहीं, इस तरह के अपराधी की रिहाई को लेकर विपक्षी खेमा अदालत की शरण में गया हुआ है। साथ में उसकी रिहाई के बाद खुद के परिवार की जान को खतरा बताया है।
शासन में की गई अपील के आधार पर पिछले वर्ष फरवरी में राज्यपाल की संस्तुति पर खैर के गांव बिसारा के कप्तान सिंह की रिहाई का आदेश जारी हुआ, जिसमें कहा गया कि 16 नवंबर 2022 तक उसने 16 वर्ष 1 माह व 13 दिन अपरिहार व 20 वर्ष 9 माह 28 दिन की सपरिहार सजा भोगी है। अगर अन्य किसी मुकदमे में उसका जेल में निरुद्ध रखा जाना वांछित न हो तो उसे रिहा किया जाए। इसी आदेश के क्रम में अब आकर उसे शनिवार को बरेली सेंट्रल जेल से रिहा किया गया है।
बता दें कि कप्तान बरेली से पहले नैनी केंद्रीय कारागार में निरुद्ध था। उसके परिवार की ओर से इतनी लंबी सजा काटने पर दया याचिका दायर की गई थी। 29 जून दोपहर उसके रिहा होकर आने की खबर पर गांव व क्षेत्र में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
विपक्षी खेमे ने पहले से दायर कर रखी है अपील
विपक्षी खेमा मौजूदा जिला पंचायत सदस्य परिवार के बंटी व उनकी मां विरमा देवी ने इस मामले में एक अपील राज्यपाल के यहां, दूसरी मुख्यमंत्री व डीजीपी के यहां दाखिल कर रखी है। साथ में एक हाईकोर्ट में अपील कर रखी है। जिसमें कप्तान सिंह के आपराधिक इतिहास का उल्लेख करते हुए रिहाई न करने और खुद की व परिवार की सुरक्षा को खतरा बताया है। इस मामले में दूसरे पक्ष से पैरवी कर रहे बंटी के भाई राहुल ने बताया कि कप्तान के आपराधिक इतिहास व अन्य तथ्यों के आधार पर तीन तीन अपील रिहाई के खिलाफ हाईकोर्ट में हैं। साथ में शासन में शिकायतें हैं। रिहाई से हमारे परिवार को सुरक्षा का खतरा है।
ये है कप्तान-बंटी गुट में रंजिश
इस रंजिश की नींव प्रधानी चुनाव को लेकर वर्ष 2000 में शुरू हुई। बंटी पक्ष गांव के एक रिश्तेदार के समर्थन में चुनाव में था, जबकि कप्तान ने खुद चुनाव लड़ा गया। कप्तान के प्रधान बनने के बाद एक जमीन को लेकर रंजिश मुखर हुई। सबसे पहले वर्ष 2003 में कप्तान के भाई मनवीर की हत्या हुई। जिसका आरोप बंटी, उसके पिता जगवीर, भाई संजीव आदि पर लगा। इसके बदले में मुकदमे की पैरोकारी कर रहे बंटी के बड़ा भाई वीरेश उर्फ बबलू व चाचा मुन्ना उर्फ हरवीर की 4 जून 2003 की दोपहर अंडला के पास दिनदहाड़े हत्या की गई। इस हत्याकांड में 30 सितंबर 2008 को कप्तान सिंह, रोहताश सिंह, ओमप्रकाश सिंह, राजेंद्र, टीकाराम सिंह, भूरा सिंह उर्फ नेपाल सिंह को आजीवन कारावास की सजा हुई। तभी से वह जेल में है। हाईकोर्ट ने भी उस सजा को बरकरार रखा। उसी दोहरे हत्याकांड में बंटी का दूसरा भाई संजीव गवाह था। जिसमें जेल में रहने के चलते साजिश में कप्तान को पांच वर्ष की सजा हुई। बाकी को उम्रकैद हुई। कप्तान को कम सजा पर बंटी पक्ष ने हाईकोर्ट में अपील कर रखी है।
कप्तान पर 11 मुकदमों का इतिहास
कप्तान पर कुल 11 मुकदमे हैं। जिनमें खैर के मुकदमों के अलावा दो मुकदमे लूट आदि के बुलंदशहर देहात में व एक मुकदमा दिल्ली में भी लूट का है।