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SIR: अलीगढ़ जिले की चार सीटों पर जीत के अंतर से ज्यादा वोट कटे, नेताजी कर रहे नुकसान का आकलन

अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Sun, 12 Apr 2026 03:34 PM IST
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सार

अलीगढ़ में 24.10 लाख अधिकृत वोटर सूची में शामिल हैं। शहर सीट पर जीत के अंतर से सात गुना व कोल सीट पर तेरह गुना वोट ज्यादा कट गए हैं। इसी तरह छर्रा सीट पर जीत के अंतर से दो गुना वोट कटे हैं, जबकि अतरौली सीट पर जीत के अंतर से पांच हजार वोट अधिक कट गए हैं।

Assessment of Aligarh Assembly Constituencies after SIR
एसआईआर पर सियासी आकलन - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार

एसआईआर का काम पूरा कर शुक्रवार को मतदाता सूची जारी कर दी गई है। अलीगढ़ जिले में 386206 वोट कटे हैं। जिले में सात विधानसभा सीटों में सर्वाधिक वोट शहर व कोल पर कटे हैं। इसके बाद खैर, बरौली, अतरौली, इगलास व छर्रा पर वोट कटे हैं। चार सीटों पर इनका अंतर जीत से ज्यादा है। इन आंकड़ों ने सभी सियासी खेमों की चिंता बढ़ा रखी है। सभी यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि किस खेमे के वोट ज्यादा कटे हैं।

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जिले में 24.10 लाख अधिकृत वोटर सूची में शामिल हैं। शहर सीट पर जीत के अंतर से सात गुना व कोल सीट पर तेरह गुना वोट ज्यादा कट गए हैं। इसी तरह छर्रा सीट पर जीत के अंतर से दो गुना वोट कटे हैं, जबकि अतरौली सीट पर जीत के अंतर से पांच हजार वोट अधिक कट गए हैं। इस सूची के जारी होने के बाद सभी खेमे यह अनुमान लगा रहे हैं कि ये वोट जो कटे हैं, वे किस पक्ष के हैं। कहीं ये वोट 2022 के परिणाम के अनुसार हार जीत प्रभावित करने वाले तो नहीं होंगे।
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इसे लेकर सभी दल व जनप्रतिनिधि अध्ययन में जुट गए हैं। हालांकि, जिले की शहरी सीटों पर चुनाव में धार्मिक व देहात की सीटों पर जातीय ध्रुवीकरण हावी रहता है। अगर वोट उसी ध्रुवीकरण के आधार पर कटे होंगे तो कहीं न कहीं आने वाले चुनाव में परिणाम चौंकाने वाले होंगे। इसलिए घबराहट की इस स्थिति में संगठन व जनप्रतिनिधियों ने वोट बढ़वाने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए हैं।

कटे वोटों में 60-40 की खेमेबंदी
सियासी आंकड़ों के जानकार कहते हैं कि जिले की शहर व कोल सीट का चुनाव हमेशा धार्मिक ध्रुवीकरण के आधार पर होता रहा है। दोनों सीटों पर पर जो वोट कटे हैं, उनमें 60 फीसदी का आंकड़ा एक पक्ष से समर्थित है। वहीं 40 फीसदी का आंकड़ा दूसरे पक्ष से समर्थित होने का अनुमान है।

एसआईआर की सूची हमें मिल गई है। अब उसमें किस तरह के बदलाव हुए हैं और कितना हानि लाभ हुआ है, इसके लिए बूथवार रविवार को समीक्षा होगी। उसमें हमारी पार्टी की ओर से एक परफार्मा मिला है, जिसके अनुसार मिलान कराया जाएगा। उम्मीद है कि कहीं गड़बड़ नहीं हुई होगी। कुछ कमियां होंगी तो उन्हें दुरुस्त कराया जाएगा। - कृष्णपाल सिंह लाला, जिलाध्यक्ष भाजपा
एसआईआर की सूची जारी हुई है। हमारी पार्टी अपनी विधानसभा कमेटी के माध्यम से बूथ स्तर पर सूची का अवलोकन करेगी और देखेगी कि कहीं अनियमितता तो नहीं हुईं। अगर ऐसा हुआ तो पार्टी सुप्रीमो के माध्यम से आपत्ति दर्ज कराई जाएगी। - रतन दीप सिंह जिलाध्यक्ष बसपा
एसआईआर में विपक्ष के वोट कटे हैं। यह प्रक्रिया सरकार के दबाव में जल्दीबाजी में कराई है। 2022 की मतदाता सूची के नाम भी इस सूची से बाहर हैं। निर्वाचन आयोग और अधिकारी सरकार का फरमान मानने को मजबूर रहे। अब हमारी मांग है कि जो भी नाम कटे हैं, वह 2027 के चुनाव से पहले जोड़े जाएं। - सोमवीर सिंह, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
एसआईआर प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण एवं अनियमिततापूर्ण रही है। सपा समर्थक मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। चुनाव आयोग निष्पक्षता सुनिश्चित करने में विफल रहा है। भाजपा ने चुनाव में हार के डर और हताशा में चुनाव आयोग से हाथ मिलाया। यूपी की जनता ने जैसे 2024 में भाजपा को हराया था उसी तरह से 2027 में हराएगी। - लक्ष्मी धनगर, जिलाध्यक्ष, सपा

विधानसभा सीट वार आंकड़ा
सीट तब जीत का अंतर अब कटे वोट व उनका प्रतिशत
खैर 73521 50444 व 12.41    
बरौली 90281     46114 व 11.82
अतरौली 39338 44912 व 11.13
छर्रा 24448 44685 व 11.60
कोल 5527 68703 व 16.69
अलीगढ़ 12818   86650 व 21.81
इगलास 58926 44698 व 11.12

 
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