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Aligarh News: चेहरे पर धूल की परत, फेफड़े सोख रहे रोजाना दो सिगरेट जितना धुआं, एक्यूआई पहुंचा 177

Mon, 13 Jul 2026 10:25 AM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Mon, 13 Jul 2026 10:25 AM IST
सार

आप अलीगढ़ में रह रहे हैं और सिगरेट नहीं पी रहे हैं, तब भी आपके फेफड़ों में रोजाना दो सिगरेट के बराबर धुआं जा रहा है। सड़क पर निकलते समय धूल इतनी है कि मुंह पर हाथ रखकर या दुपट्टा बांधकर निकलना पड़ रहा है। 

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Dust storm in Aligarh
रामघाट रोड और धनीपुर मंडी रोड पर उड़ती धूल से होकर गुजरते लोग - फोटो : संवाद

विस्तार

अलीगढ़ की हवा बारिश में भी साफ नहीं हो पा रही है। शहर में एक घंटा सड़क पर बिताने के बाद चेहरे और कपड़ों पर धूल की परत साफ नजर आने लगती है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 177 तक पहुंच गया है, जिसके चलते शहरवासी रोजाना करीब 1.7 यानी लगभग दो सिगरेट पीने के बराबर धुआं फेफड़ों में भर रहे हैं। इसके बावजूद धूल उड़ाने वाले निर्माण कार्यों और खुदी सड़कों पर नियंत्रण के लिए जिम्मेदार विभागों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

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स्थिति यह है कि रामघाट रोड, क्वार्सी, सेंटर प्वाइंट, मैरिस रोड और प्रमुख संपर्क मार्गों पर दिनभर उड़ने वाली धूल लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। धूल के छोटे और बड़े कण हवा में तैर रहे हैं जिससे शनिवार को वायु प्रदूषण का स्तर 177 दर्ज किया गया। एक सप्ताह पहले पांच जुलाई को यह 169 था। बीच में हुई बारिश से प्रदूषण के स्तर में कुछ कमी आई, लेकिन कुछ ही दिनों में यह फिर बढ़ गया।
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शहर की चर्चित विशेषज्ञ वैज्ञानिक डॉ. शकुन सिंह के मुताबिक, हवा में पीएम-2.5 सबसे अधिक खतरनाक प्रदूषक है, क्योंकि इसके अत्यंत सूक्ष्म कण सीधे फेफड़ों और रक्त प्रवाह तक पहुंच जाते हैं। अलीगढ़ की हवा में इस पीएम-2.5 का स्तर 92 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पीएम-10 का स्तर 107 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। घर से बाहर दिनभर आवाजाही करने वाले लोगों का यहां तक कहना है कि घर लौटने पर चेहरे और कपड़ों पर धूल की परत साफ दिखाई देती है। उनका कहना है कि निर्माण एजेंसियों को धूल नियंत्रण के उपायों को सख्ती से लागू करना चाहिए।

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बारिश के मौसम में प्रदूषण का स्तर सुधरा हुआ रहता है। कुछ जगहों पर निर्माण साइटों के चलते यह समस्या देखने को मिलती है।- डाॅ. विश्वनाथ शर्मा, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी. समय समय पर जब भी चेतावनी जारी होती है, तब मशीनों से पानी का छिड़काव कराया जाता है। रात में भी ये मशीनें सक्रिय रहती हैं। पेड़ों व सड़कों पर यह छिड़काव कराया जाता है। इस दिशा में फिर से निर्देश जारी किए जाएंगे। - प्रेमप्रकाश मीणा, नगर आयुक्त

Dust storm in Aligarh
रामघाट रोड पर पीएसी के पास धूल से होकर गुजरते वाहन सवार - फोटो : संवाद

अहमदाबाद, बंगलूरू से भी प्रदूषित अलीगढ़
दिल्ली एनसीआर के बाद अलीगढ़ भी प्रदूषित शहरों की सूची में आ गया है। शनिवार को स्थिति यह रही कि अहमदाबाद, बंगलूरू, चेन्नई और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों से भी ज्यादा प्रदूषण यहां दर्ज किया गया। हवा में प्रदूषकों का स्तर इतना था कि लोगों ने औसतन 1.7 सिगरेट के बराबर धुएं का सेवन किया है। अगर अलीगढ़ के पिछले तीन महीने की औसतन स्थिति देखें तो धूम्रपान न करने वालों के फेफड़ों ने प्रति सप्ताह 12 और महीने में 48 सिगरेट के बराबर धुआं लिया है। शहर के चर्चित डॉक्टरों का मानना है कि लंबे समय तक ऐसी हवा में सांस लेने से दमा, सीओपीडी, हृदय रोग, एलर्जी और फेफड़ों की अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।

आपके घर में कौन सबसे ज्यादा खतरे में?

  • 5 साल से छोटे बच्चे
  • 60 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग
  • दमा मरीज
  • हृदय रोगी
  • गर्भवती महिलाएं


प्रदूषण और आपके फेफड़ों का हिसाब

  • प्रतिदिन : 1.7 सिगरेट
  • सप्ताह में : 12 सिगरेट
  • महीने में : 48 सिगरेट
  • साल में : 584 सिगरेट

सड़कों पर नहीं, अस्पताल में देखें असर
जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के टीबी एवं श्वसन रोग विभाग की रिपोर्ट बताती है कि उनके यहां प्रतिदिन 300 मरीज सीओपीडी सहित विभिन्न श्वसन संबंधी परेशानियां लेकर पहुंच रहे हैं। सीओपीडी फेफड़ों की गंभीर बीमारी है जिसमें सांस फूलना, लगातार खांसी, बलगम बनना और सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी जैसे लक्षण होते हैं।

विभाग के चेयरमैन प्रो. शमीम का कहना है कि शहर की सड़कों पर उड़ती धूल और औद्योगिक प्रदूषण के कारण श्वास रोगियों की संख्या बढ़ रही है। लोगों को घर से बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करना चाहिए और सांस संबंधी लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। जिला स्वास्थ्य विभाग भी बताता है कि इस साल जनवरी से लेकर अब तक 141 नए सीओपीडी मामले मिले हैं।

इस मौसम में एक्यूआई में वृद्धि का रुझान
पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो जुलाई के इस सप्ताह में 2020 में एक्यूआई 197 था। 2023 में एक्यूआई 114, 2024 में 108, 2025 में 136 और 2026 में अब तक 166 दर्ज किया गया है। यह 22 फीसदी की औसत वृद्धि दर दर्शाता है, जो वायु प्रदूषण की बढ़ती समस्या को उजागर करता है। यह वृद्धि दर भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

दिल्ली जैसे उपाय कर सकते हैं आप
सुबह 5-8 बजे वॉक से बचें

  • एन 95 मास्क पहनें


घर में पौधे लगाएं

  • बच्चों को सड़क किनारे खेलने से रोकें
  • एक्यूआई देखकर ही आउटडोर गतिविधि तय करें


धूल और प्रदूषण से इन बीमारियों का खतरा
एक्यूआई 50-150 तक होता है तो अस्थमा, दिल की धमनियों में ब्लॉकेज, हृदय रोगियों में घबराहट, सामान्य लोगों को एलर्जी, साइनस, सर्दी या खांसी और सीओपीडी यानी काला दमा की परेशानी होने की आशंका बढ़ जाती है।

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