Lawrence Bishnoi: एएमयू कंट्रोलर से डॉक्टर तक को धमकाया, पैसा ट्रांसफर कर घर के बाहर टांग देना सफेद कपड़ा
हसमत ने सोच-समझकर इंसाइडर थ्योरी के तहत उन लोगों को निशाना बनाया, जिनसे वह पहले कभी न कभी मिल चुका था। वह सभी पीड़ितों की वित्तीय और सामाजिक स्थिति से भली-भांति वाकिफ था। हसमत ने अपनी इस साजिश के लिए बाकायदा एक टारगेट लिस्ट तैयार की थी, जिसमें शहर के नामचीन और रईस लोग शामिल थे।
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एएमयू के क्लर्क हसमत द्वारा खुद को कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई बताकर रंगदारी मांगने के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आरोपी ने पीड़ितों को जो धमकी भरा पत्र भेजा था, उसका मजमून किसी बॉलीवुड क्राइम थ्रिलर फिल्म की स्क्रिप्ट जैसा है। रकम भेजने के बाद उसने घर के बाहर सफेद कपड़ा टांग देने की हिदायत भी दी।
आरोपी क्लर्क हसमत ने दहशत फैलाने के लिए खत में लिखा-मेरे आदमी राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब आदि अन्य राज्यों में खास काम पर हैं। लड़कों के लिए खर्च की जरूरत है। मैं चाहता तो और भी ज्यादा रकम मांग सकता था। जो रुपये मांगे हैं, वह बहुत कम हैं। मैं सच में लॉरेंस हूं या नहीं, यह तुमको पैसा ट्रांसफर करने के बाद पता चल जाएगा। इसके बाद मैं तुमको खुद ही साबरमती जेल बुलाऊंगा।
उसने पीड़ितों को पुलिस के पास न जाने की सख्त हिदायत देते हुए आगे लिखा, मेरे लड़के तुम पर और तुम्हारे परिवार पर 24 घंटे नजर रखे हुए हैं। पुलिस और नेतागीरी में पड़ने की गलती मत करना, नहीं तो मारे जाओगे। अंजाम के लिए तुम खुद ही जिम्मेदार होगे। इस रंगदारी की सबसे खास बात यह थी कि आरोपी ने काम पूरा होने की पुष्टि के लिए एक अजीबोगरीब सिग्नल तय किया था। खत में साफ लिखा था कि जैसे ही पैसा ट्रांसफर हो जाए, तो घर के आगे सफेद कपड़ा टांग देना। मेरे लड़के समझ जाएंगे कि काम हो गया है। यानी सफेद कपड़ा टंगते ही पीड़ितों पर से खतरा टल जाता।
हसतम एएमयू के तिब्बिया कॉलेज में एलडीसी के पद पर काम करता है। इसलिए उसने मुझे और एएमयू के ही अन्य लोगों को टारगेट किया।- प्रो. मुजीबउल्लाह जुबेरी, कंट्रोलर, एएमयू
कुछ एएमयू के डॉक्टर्स और प्रोफेसर ऐसे थे कि उनके ऑफिस के पते पर धमकी भरा खत आया था। हम लोगों ने ऑफिस में जाकर चेक किया तो पता चला कि खत आए थे। पुलिस की मौजूदगी में जांच की गई। अलग-अलग लोगों से अमेरिकन डॉलर की शक्ल में रकम की मांग की गई है। अब आरोपी क्लर्क के संबंध में विश्वविद्यालय के उच्च अधिकारी फैसला लेंगे।- प्रो. मोहम्मद नवेद, प्रॉक्टर, एएमयू
हाईटेक वसूली : बैंक अकाउंट नहीं, दिया ब्लॉकचेन क्यूआर कोड
पुलिस और कानून की नजरों से बचने के लिए क्लर्क ने तकनीक का सहारा लिया था। उसने रकम मंगाने के लिए किसी बैंक खाते का नंबर नहीं दिया, बल्कि धमकी भरे खत पर ही एक ब्लॉकचेन क्यूआर कोड प्रिंट करके भेजा था। वह चाहता था कि पैसा सीधे क्रिप्टो या डिजिटल ब्लॉकचेन नेटवर्क के जरिये आए, ताकि उसे ट्रैक करना नामुमकिन हो जाए। खत में न सिर्फ साबरमती जेल का जिक्र किया, बल्कि वसूली के लिए बकायदा ब्लॉकचेन क्यूआर कोड और कोड वर्ड का भी इस्तेमाल किया।
डिजिटल लेजर या बहीखाता है ब्लॉकचेन
ब्लॉकचेन एक आधुनिक और बेहद सुरक्षित डिजिटल तकनीक है, जिसे एक डिजिटल लेजर या बहीखाता माना जा सकता है। इसमें डाटा या जानकारियों को छोटे-छोटे ब्लॉक्स में रिकॉर्ड किया जाता है। जब एक ब्लॉक डेटा से भर जाता है, तो वह एक चेन की तरह पिछले ब्लॉक से जुड़ जाता है।
इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह डिसेंट्रलाइज्ड होती है, यानी इस पर किसी एक व्यक्ति, बैंक या सरकार का नियंत्रण नहीं होता। ब्लॉकचेन में दर्ज की गई जानकारी को न तो बदला जा सकता है और न ही डिलीट किया जा सकता है, जिससे धोखाधड़ी नामुमकिन हो जाती है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से क्रिप्टोकरेंसी (जैसे बिटकॉइन) के लेन-देन और डेटा को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है।
एएमयू कंट्रोलर से डॉक्टर तक लिस्ट में
हसमत ने सोच-समझकर इंसाइडर थ्योरी के तहत उन लोगों को निशाना बनाया, जिनसे वह पहले कभी न कभी मिल चुका था। वह सभी पीड़ितों की वित्तीय और सामाजिक स्थिति से भली-भांति वाकिफ था। हसमत ने अपनी इस साजिश के लिए बाकायदा एक टारगेट लिस्ट तैयार की थी, जिसमें शहर के नामचीन और रईस लोग शामिल थे।
तीन जून को नई दिल्ली के जीपीओ कनाॅट प्लेस से एएमयू कंट्रोलर मुजीब उल्लाह जुबेरी, यूनिवर्सिटी के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर आमिर बिन साबिर, हृदय रोग विभाग के चेयरमैन प्रो. मलिक मोहम्मद अजहरुद्दीन, पूर्व चेयरमैन प्रो. एमयू रब्बानी, सर्जरी विभाग के डॉक्टर वसीफ मोहम्मद अली और न्यूरो सर्जरी विभाग के चेयरमैन प्रो. रमन मोहन शर्मा को भी इसी प्रकार के धमकी भरे पत्र भेजे गए थे।
जांच के मुताबिक, हसमत जिन लोगों को धमकी भरे पत्र भेज रहा था, उनके साथ उसका पुराना कनेक्शन निकला। आरोपी हसमत ने साल 2021 में दिनेश ज्वेलर्स से कुछ सोने-चांदी की खरीदारी की थी। इस दौरान उसने दुकान के मालिक की हैसियत का अंदाजा लगा लिया था। दिनेश ज्वेलर्स के प्रियांक खुद एएमयू के छात्र रह चुके हैं और ओल्ड बॉयज एसोसिएशन से जुड़े हैं। इसके अलावा हसमत अपनी बीमारी या किसी जरूरत के सिलसिले में रोडियोलॉजिस्ट डॉ. आमिर के पास मेडिकल रोड स्थित उनके सेंटर पर गया था। इस बहाने उसने डॉक्टर के रसूख और सामाजिक स्थिति को करीब से भांप लिया था।
इस पूरी साजिश का केंद्र एएमयू ही था। हसमत की लिस्ट में जिन आठ लोगों के नाम थे, वे सभी किसी न किसी तरह एएमयू से जुड़े हैं। चूंकि हसमत खुद यूनिवर्सिटी में क्लर्क था, इसलिए उसे अच्छी तरह पता था कि कैंपस में किस प्रोफेसर और डॉक्टर का कितना रसूख है और किसके पास कितना बैंक बैलेंस है। इसी जान-पहचान और जानकारी का फायदा उठाकर उसने इन सभी संभ्रांत लोगों को साबरमती जेल के नाम पर डराना शुरू कर दिया था। फिलहाल पुलिस आरोपी के इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है।