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AMU: एम्स की तर्ज पर जेएन मेडिकल काॅलेज में बढ़ेंगी सुविधाएं, ऑनलाइन बनेंगे पर्चे, एक जगह मिलेगी ब्लड रिपोर्ट
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Mon, 23 Feb 2026 05:23 PM IST
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सार
मेडिकल कॉलेज में अब ब्लड रिपोर्ट एक ही स्थान से उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। जल्द ही मरीजों के पर्चे ऑनलाइन बनाए जाएंगे, जिससे सुबह से लगने वाली लंबी कतारों पर रोक लगेगी और पंजीकरण प्रक्रिया तेज होगी।
जेएन मेडिकल कॉलेज अलीगढ़
- फोटो : संवाद
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विस्तार
एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज में अब मरीजों को एम्स (ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) की तर्ज पर स्वास्थ्य सुविधाएं देने की तैयारी शुरू हो गई है। ताकि इमरजेंसी और ओपीडी में मरीजों को सर्वोत्तम चिकित्सा मुहैया कराई जा सके। ऑनलाइन पर्चे भी बनेंगे, जिससे मरीजों को लंबी लाइनों और विभागों के चक्कर से राहत मिलेगी।
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मेडिकल कॉलेज परिसर में चिकित्सा सुविधा को बेहतर बनाने की कवायद शुरू हो गई है। इसकी शुरुआत सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक निर्माण के लिए 350 करोड़ रुपये की मंजूरी से हो चुकी है। ब्लॉक बनने से मरीजों को काफी सहूलियतें मिलेंगी। स्टाफ भी बढ़ने की उम्मीद है। जल्द ही मरीजों के पर्चे ऑनलाइन बनाए जाएंगे, जिससे सुबह से लगने वाली लंबी कतारों पर रोक लगेगी और पंजीकरण प्रक्रिया तेज होगी। ओपीडी में रोजाना करीब छह से सात हजार मरीज पर्चे बनवाते हैं। जेएन मेडिकल कॉलेज में अलीगढ़, कासगंज, एटा, बुलंदशहर, हाथरस, बदायूं, संभल, फिरोजाबाद सहित अन्य जिलों से मरीज आते हैं।
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एक ही काउंटर पर मिलेगी ब्लड जांच रिपोर्ट
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अंजुम परवजे बताते हैं कि मरीजों को बेहतर और सुगम स्वास्थ्य सेवाएं देने के उद्देश्य से मेडिकल कॉलेज में अब ब्लड रिपोर्ट एक ही स्थान से उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों और तीमारदारों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
जहां से स्ट्रेचर लेंगे, वहीं फिर लाना होगा
जेएन मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी से वार्ड में मरीज को शिफ्ट करने के बाद स्ट्रेचर इमरजेंसी में वापस पहुंचाने की जिम्मेदारी तीमारदार की होगी, ताकि इमरजेंसी में स्ट्रेचर की उपलब्धता बनी रहे और गंभीर मरीजों को तुरंत सुविधा मिल सके। पिछले दिनों अमर उजाला ने इमरजेंसी के बाहर स्ट्रेचर कमी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद कॉलेज प्रशासन सख्त हो गया। अब इमरजेंसी से मरीज को वार्ड तक ले जाने के बाद तीमारदार को फिर इमरजेंसी में स्ट्रेचर लाकर जमा करना होगा। इसके लिए एक जमानत राशि भी ली जा रही है। स्ट्रेचर जमा करने के बाद राशि वापस कर दी जाती है।
