{"_id":"69a4a421a3653779880eb3a4","slug":"for-four-generations-a-muslim-family-has-been-sharing-the-harvest-of-harmony-on-holi-aligarh-news-c-114-1-sali1013-102940-2026-03-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Aligarh News: चार पीढ़ियों से होली पर सौहार्द की फसल बांट रहा मुस्लिम परिवार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Aligarh News: चार पीढ़ियों से होली पर सौहार्द की फसल बांट रहा मुस्लिम परिवार
विज्ञापन
जलाली में खेत ने खड़ी जौ की फसल दिखाते गुड्डू नंबरदार।संवाद
- फोटो : samvad
विज्ञापन
सांप्रदायिक दृष्टि से संवेदनशील कस्बा जलाली में एक मुस्लिम परिवार ऐसा भी है जो चार पीढ़ियों से सौहार्द की फसल बांट रहा है। होली पर गेहूं और जौं की फसल भी तैयार होने लगती है और किसान अपनी फसल की बालियां होलिका में अग्निदेव को समर्पित करते हैं। जिन हिंदू परिवार के पास खेत नहीं है, उन्हें समस्या आती हैं, ऐसे एक मुस्लिम परिवार सौ से अधिक हिंदू परिवारों के यहां जौं की बालियां भिजवाता आ रहा है।
मोहल्ला गढ़ी निवासी गुड्डू नंबरदार बताते हैं कि उनके पिता जमालुद्दीन नंबरदार की जलाली में ननिहाल थी, उनके नाना मरहूम हबीब उल्लाह व अता उल्लाह रबी की फसल के साथ कुछ हिस्से में (लगभग तीन बीघा) जौ बोते थे, जिन्हें पूजन वाली होली के दिन काटकर हिंदुओं के घरों में भिजवाते थे। नाना के इंतकाल के बाद ये बीड़ा उनके मामा मौलाना अब्दुल हनीफ ने उठाया, उसके बाद पिता जमालुद्दीन नंबरदार ने भी ननिहाल की परंपरा को आगे बढ़ाया। उसके बाद उनके पुत्र नईमुद्दीन नम्बरदार ने इसे निभाया और 2003 में उनके इंतकाल के बाद से गुड्डू नंबरदार इस परंपरा का निर्वाहन कर रहे हैं।
कस्बे के गोकुल चंद गोस्वामी, मानिक चंद्र शर्मा, सुभाष चंद्र वर्मा, राजेंद्र वर्मा, अनिल वार्ष्णेय आदि का कहना है कि होलिका दहन के बाद घर घर जाकर जौ बांटने की परंपरा है जिसके लिए होली पूजन के दिन गुड्डू नंबरदार के घर से जौ भेजे जाते हैं।
शास्त्रों में जौ को माना गया है पवित्र
मान्यता के अनुसार शास्त्रों और हवन की परंपरा में जौं का बड़ महत्व है। इसकी यज्ञ में भी आहुति दी जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि भूनकर इसकी फलियां खाने से बीमारियां और कष्ट दूर होते हैं।
Trending Videos
मोहल्ला गढ़ी निवासी गुड्डू नंबरदार बताते हैं कि उनके पिता जमालुद्दीन नंबरदार की जलाली में ननिहाल थी, उनके नाना मरहूम हबीब उल्लाह व अता उल्लाह रबी की फसल के साथ कुछ हिस्से में (लगभग तीन बीघा) जौ बोते थे, जिन्हें पूजन वाली होली के दिन काटकर हिंदुओं के घरों में भिजवाते थे। नाना के इंतकाल के बाद ये बीड़ा उनके मामा मौलाना अब्दुल हनीफ ने उठाया, उसके बाद पिता जमालुद्दीन नंबरदार ने भी ननिहाल की परंपरा को आगे बढ़ाया। उसके बाद उनके पुत्र नईमुद्दीन नम्बरदार ने इसे निभाया और 2003 में उनके इंतकाल के बाद से गुड्डू नंबरदार इस परंपरा का निर्वाहन कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
कस्बे के गोकुल चंद गोस्वामी, मानिक चंद्र शर्मा, सुभाष चंद्र वर्मा, राजेंद्र वर्मा, अनिल वार्ष्णेय आदि का कहना है कि होलिका दहन के बाद घर घर जाकर जौ बांटने की परंपरा है जिसके लिए होली पूजन के दिन गुड्डू नंबरदार के घर से जौ भेजे जाते हैं।
शास्त्रों में जौ को माना गया है पवित्र
मान्यता के अनुसार शास्त्रों और हवन की परंपरा में जौं का बड़ महत्व है। इसकी यज्ञ में भी आहुति दी जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि भूनकर इसकी फलियां खाने से बीमारियां और कष्ट दूर होते हैं।
