Raid: अल दुआ मीट फैक्टरी पर जीएसटी का छापा, छह प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई, 200 करोड़ की कर चोरी की आशंका
जांच में गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। फैक्ट्री द्वारा बेचे गए माल के अनुपात में बिक्री बहुत कम दिखाई गई थी। इसके अलावा गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम (आईटीसी) करने के मामले पकड़े गए हैं।
विस्तार
अलीगढ़ की सबसे बड़ी मीट फैक्टरी अल दुआ फूड प्रोसेसिंग पर राज्य वस्तु एवं सेवा कर विभाग (जीएसटी) की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) ने बड़ी कार्रवाई की है। हाजी जहीर के स्वामित्व वाली इस यूनिट सहित कुल 6 प्रतिष्ठानों पर छापा मारा गया, जिसमें 200 करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी की आशंका जताई जा रही है। जांच के दौरान गंभीर विसंगतियां पाए जाने पर फैक्टरी प्रबंधन ने 1.15 करोड़ रुपये की धनराशि तत्काल जमा कराई है।
लखनऊ मुख्यालय से प्राप्त डेटा विश्लेषण और इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर 8 जनवरी दोपहर 1 बजे टीम ने मथुरा बाईपास स्थित अमरपुर कोंडला और मेहरावाल स्थित यूनिटों पर एक साथ धावा बोला। जांच में गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। फैक्टरी द्वारा बेचे गए माल के अनुपात में बिक्री बहुत कम दिखाई गई थी। इसके अलावा गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम (आईटीसी) करने के मामले पकड़े गए हैं। टीम ने एक ऐसे गोदाम का पता लगाया है जिसका रिकॉर्ड में जिक्र नहीं था। माल की कीमतें कम प्रदर्शित कर कर योग्य माल को छिपाया गया था।
30 अधिकारियों की टीम और भारी पुलिस बल
अपर आयुक्त (ग्रेड-1) अलीगढ़ जोन के निर्देश पर संयुक्त आयुक्त एसआईबी की निगरानी में यह अभियान चलाया गया। उपायुक्त एसआईबी के नेतृत्व में 30 से अधिक अधिकारियों की टीम ने भारी पुलिस बल के साथ 6 ठिकानों पर सर्च और सीजर की कार्यवाही की। टीम ने मौके से भारी मात्रा में दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड (हार्ड डिस्क, कंप्यूटर डेटा) अपने कब्जे में लिया है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक डाटा विश्लेषण में पाई गई कमियों के आधार पर यह इंटेलिजेंस-बेस्ड कार्यवाही की गई है। अभी रिकॉर्ड का विश्लेषण किया जा रहा है।
फर्म स्वामी को सुनवाई का अवसर देने के बाद ही कर अपवंचन का अंतिम निर्धारण किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक कार्यवाही के दौरान व्यापारी और फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा जांच में सहयोग किया गया। अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए दस्तावेजों का मिलान स्टॉक और बैंक ट्रांजैक्शन से किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद कर चोरी का यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। एक ही परिसर में संचालित तीन अलग-अलग प्रतिष्ठानों के जरिए टैक्स बचाने के खेल का भी पर्दाफाश हुआ है।
निर्यात पर जीएसटी शून्य इसके बाद भी अरबों की टैक्स चोरी
पाठकों के लिए तकनीकी सवाल हो सकता है कि चूंकि मीट निर्यात पर जीएसटी की दर शून्य होती है, तो फिर कोई कंपनी 200 करोड़ की कर चोरी कैसे कर सकती है। इसके पीछे मुख्य रूप से आईटीसी का खेल और घरेलू बिक्री को छिपाना है। निर्यातकों को यह सुविधा मिलती है कि उन्होंने कच्चा माल, मशीनरी या सेवाएं खरीदते समय जो जीएसटी चुकाया है, उसका वे सरकार से रिफंड ले सकते हैं।
कंपनियां फर्जी फर्मों से फर्जी बिल बनवा लेती हैं कि उन्होंने करोड़ों का सामान खरीदा है, जबकि वास्तव में कोई खरीदारी नहीं हुई होती। इसके अलावा मीट फैक्ट्रियां केवल निर्यात नहीं करतीं, उनके कई सह-उत्पाद (बाइ प्रोडक्ट) जैसे चर्बी, खाल , हड्डियां और कुछ किस्म का मीट घरेलू बाजार में भी बिकता है। इस माल को कैश में बेच दिया जाता है और उसे रिकॉर्ड में नहीं दिखाया जाता। इस बिक्री पर जीएसटी लगता है, इसलिए इसे छिपाकर सीधे टैक्स की चोरी की जाती है।