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Aligarh News: भीमनगर से बैरामगढ़ी तक कॉलोनियों से नदारद स्ट्रीट लाइटें
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
Updated Sat, 10 Jan 2026 02:04 AM IST
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सेंट्रल बैंक के पास स्कूल के मोड़ पर छाया अंधेरा। संवाद
- फोटो : samvad
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मोहल्ला भीमनगर से लेकर मोहल्ला सिद्ध और बैरामगढ़ी पटरी पर बनी नई कॉलोनियों तक पथ प्रकाश (स्ट्रीट लाइटें) नदारद हैं। इन काॅलोनियों की अधिकांश सड़कें और गलियां शाम होते ही घने अंधेरे से घिर रही हैं। कस्बे में अक्सर शाम के समय होने वाली मारपीट की घटनाओं से महिलाएं शाम होते ही बेटे-बेटियों के घरों से निकलने पर डरी रहती हैं।
इन कॉलोनियों के निवासियों का कहना है कि घर के बाहर बल्ब लगा रखे हैं ताकि दरवाजे और गली में कुछ उजाला रहे। अंधेरे में अपराधी किस्म के लोगों का डर बना रहता है। कस्बे के रास्तों और गलियों में मार्ग प्रकाश की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन नगर पंचायत इस पर ध्यान ही नहीं दे रहा है।
बगीची के सुनील शर्मा प्रधान वाली गली में भी अंधेरा रहता है। लगभग 100 मीटर दूर के खंभे पर जलते बल्ब महज लाइट होने का संकेत देते हैं। कस्बे में सेंट्रल बैंक से आगे दाऊदयाल जी स्कूल के मोड़ पर भी स्ट्रीट लाइट न होने से शाम के साथ रात भर घना अंधेरा रहता है।रामघाट रोड पर भी कई स्थानों पर बिजली खंभे न होने से अंधकार था।
नई बस्तियों में पथ प्रकाश व्यवस्था के लिए शासन को डीपीआर भेजी गई है, मंजूरी मिलते ही काम शुरू कराया जाएगा, बाकी कस्बे की जिन गलियों में लाइट खराब हो गई हैं, उन्हें बदलवाया जाएगा। प्रवीण कुमार, अधिशासी अधिकारी हरदुआगंज
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एक नजर में नगर पंचायत
आबादी : 13690 (2011 के आधार पर) अब लगभग 20000
मकान : 3213
वार्ड : 11
मोहल्ला : 11
स्ट्रीट लाइटें : 1100 करीब
जलकर : 60 हजार सालाना
गृहकर : 15 लाख सालाना
-कस्बे में बंदर काफी हैं, ऊपर से दिन ढलते ही अंधेरा हो जाता है। अंधेरे में बंदरों के हमले की आशंका और भी बढ़ जाती है। कस्बे के रास्तों पर लाइटें लगें। -भावना शर्मा, बगीची
-नगर पंचायत ने जलकर लेना शुरू कर दिया है, लेकिन गलियों में अंधेरा रहता है। इससे लोगों का रात में निकलने में डर लगता है। -राजपाल सिंह चौहान, नई बस्ती भीमनगर
-हमारी गली में शाम होते ही अंधेरा पसर जाता है। कई बार नगर पंचायत में यह समस्या बता चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। -महावीर सिंह जॉनी, मोहल्ला महाब्राह्मण
-हमारा घर मोहल्ला जहांगीराबाद की नई बस्ती में है। वहां केवल एक खंभे पर पर बल्ब लटका है, अन्य खंभों पर बल्ब भी नहीं है।- भारत सिंह, जहांगीराबाद नई बस्ती
-आए दिन बल्ब खराब हो जाते हैं, हालांकि सूचना पर तुरंत कर्मचारी आकर बल्ब बदल जाते हैं, लेकिन परेशानी तो होती ही है। गुणवत्तापूर्ण सामान मंगाना चाहिए। -अतर सिंह, भीमनगर
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इन कॉलोनियों के निवासियों का कहना है कि घर के बाहर बल्ब लगा रखे हैं ताकि दरवाजे और गली में कुछ उजाला रहे। अंधेरे में अपराधी किस्म के लोगों का डर बना रहता है। कस्बे के रास्तों और गलियों में मार्ग प्रकाश की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन नगर पंचायत इस पर ध्यान ही नहीं दे रहा है।
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बगीची के सुनील शर्मा प्रधान वाली गली में भी अंधेरा रहता है। लगभग 100 मीटर दूर के खंभे पर जलते बल्ब महज लाइट होने का संकेत देते हैं। कस्बे में सेंट्रल बैंक से आगे दाऊदयाल जी स्कूल के मोड़ पर भी स्ट्रीट लाइट न होने से शाम के साथ रात भर घना अंधेरा रहता है।रामघाट रोड पर भी कई स्थानों पर बिजली खंभे न होने से अंधकार था।
नई बस्तियों में पथ प्रकाश व्यवस्था के लिए शासन को डीपीआर भेजी गई है, मंजूरी मिलते ही काम शुरू कराया जाएगा, बाकी कस्बे की जिन गलियों में लाइट खराब हो गई हैं, उन्हें बदलवाया जाएगा। प्रवीण कुमार, अधिशासी अधिकारी हरदुआगंज
एक नजर में नगर पंचायत
आबादी : 13690 (2011 के आधार पर) अब लगभग 20000
मकान : 3213
वार्ड : 11
मोहल्ला : 11
स्ट्रीट लाइटें : 1100 करीब
जलकर : 60 हजार सालाना
गृहकर : 15 लाख सालाना
-कस्बे में बंदर काफी हैं, ऊपर से दिन ढलते ही अंधेरा हो जाता है। अंधेरे में बंदरों के हमले की आशंका और भी बढ़ जाती है। कस्बे के रास्तों पर लाइटें लगें। -भावना शर्मा, बगीची
-नगर पंचायत ने जलकर लेना शुरू कर दिया है, लेकिन गलियों में अंधेरा रहता है। इससे लोगों का रात में निकलने में डर लगता है। -राजपाल सिंह चौहान, नई बस्ती भीमनगर
-हमारी गली में शाम होते ही अंधेरा पसर जाता है। कई बार नगर पंचायत में यह समस्या बता चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। -महावीर सिंह जॉनी, मोहल्ला महाब्राह्मण
-हमारा घर मोहल्ला जहांगीराबाद की नई बस्ती में है। वहां केवल एक खंभे पर पर बल्ब लटका है, अन्य खंभों पर बल्ब भी नहीं है।- भारत सिंह, जहांगीराबाद नई बस्ती
-आए दिन बल्ब खराब हो जाते हैं, हालांकि सूचना पर तुरंत कर्मचारी आकर बल्ब बदल जाते हैं, लेकिन परेशानी तो होती ही है। गुणवत्तापूर्ण सामान मंगाना चाहिए। -अतर सिंह, भीमनगर