डूबीं उम्मीदें: दो हफ्ते में पांचवीं मार, कटाई से पहले ही खेत और मंडी तक तबाही, कटी व खड़ी फसल बर्बाद
20 मार्च से 5 अप्रैल के बीच किसानों ने पांच बार मौसम की मार झेली है। चार और पांच अप्रैल को अलग अलग तहसीलों में ओलावृष्टि ने फसल को पूरी तरह चौपट कर दिया। पांच में से तीन दिन की बारिश का नुकसान पर प्रशासन ने रिपोर्ट तैयार की है जिसके मुताबिक नौ हजार किसान परिवारों को दो करोड़ रुपये से अधिक मुआवजा मिलेगा।
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दो हफ्तों में चौथी बार बदले मौसम ने किसानों की उम्मीदों को झकझोर दिया है। जिस वक्त गेहूं की फसल कटाई के मुहाने पर थी, उसी समय आई ओलावृष्टि और तेज बारिश ने खेत से लेकर मंडी तक हर स्तर पर नुकसान कर दिया। 5 अप्रैल को दूसरे दिन भी जिलेभर में तेज हवाओं के साथ बारिश और ओले गिरे। खैर, गभाना, विजयगढ़ और अतरौली में इसका सबसे ज्यादा नुकसान हुआ जबकि शनिवार को गोंडा और इगलास में खेत बर्बाद हुए। खेतों में खड़ी गेहूं की फसल हवा के साथ जमीन पर बिछ गई, जबकि कटाई के बाद खेतों में पड़ा अनाज भी पानी में भीग गया।
उधर, असर मंडियों में भी साफ दिखा। धनीपुर और खैर मंडी में खुले में रखा गेहूं बारिश में भीग गया। खैर मंडी में जहां कुछ दिन पहले तक रोज करीब 30 हजार बोरी गेहूं आ रहा था, वह घटकर 5 से 6 हजार बोरी रह गया। कम आमद के चलते भाव में करीब 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी जरूर हुई, लेकिन इससे किसानों को राहत नहीं मिल पा रही। मंडी कमेटी के पूर्व अध्यक्ष संजय शर्मा का कहना है कि असमय बारिश से किसानों के साथ-साथ व्यापारियों को भी नुकसान हो रहा है। मंडी में लेबर पिछले दो दिन से खाली बैठी है।
दरअसल 20 मार्च से 5 अप्रैल के बीच किसानों ने पांच बार मौसम की मार झेली है। चार और पांच अप्रैल को अलग अलग तहसीलों में ओलावृष्टि ने फसल को पूरी तरह चौपट कर दिया। पांच में से तीन दिन की बारिश का नुकसान पर प्रशासन ने रिपोर्ट तैयार की है जिसके मुताबिक नौ हजार किसान परिवारों को दो करोड़ रुपये से अधिक मुआवजा मिलेगा।
खड़ी ही नहीं, कटी फसल भी बर्बाद
किसानों का कहना है कि इस बार नुकसान सिर्फ खड़ी फसल तक सीमित नहीं रहा। जो गेहूं कटकर तैयार था, वह भी खराब हो गया। खेतों में पानी भरने से दाने काले पड़ने और सड़ने का खतरा बढ़ गया है। मक्का, मूंग, मटर, टमाटर, पालक और धनिया जैसी फसलें भी इस मार से नहीं बच सकीं। आम के बागों में भी ओलों और बारिश से नुकसान हुआ है। गांव बेरा जरारा के किसान थान सिंह बताते हैं कि मंडी ले जाते वक्त ही बारिश आ गई। ढंकने के बाद भी गेहूं भीग गया, अब दाम भी कम मिलेंगे।
राजस्व टीमें कर रहीं नुकसान का सर्वे
एडीएम वित्त एवं राजस्व प्रमोद कुमार के अनुसार, बारिश और ओलावृष्टि से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए सोमवार से जिले की सभी तहसीलों में राजस्व टीमों को लगाया है। लेखपाल और कानूनगो स्तर की टीमें गांव-गांव जाकर खेतों का निरीक्षण करेंगी और रिपोर्ट तैयार करेंगी। इसके आधार पर प्रभावित किसानों को शासन की ओर से राहत दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। उन्होंने बताया कि सर्वे कार्य को तेजी से पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसानों को समय पर मदद मिल सके।