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अमर उजाला संवाद: खुलकर बोले शिक्षक, गैर शैक्षणिक कार्यों में ड्यूटी लगाने से पढ़ाई हो रही प्रभावित

अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Mon, 06 Apr 2026 03:25 PM IST
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सार

बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों ने 5 अप्रैल को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद में अपने विचार व्यक्त किए। शिक्षकों ने गैर-शैक्षणिक कार्यों को पढ़ाई में बाधकर बताया। 

Teachers spoke openly in Amar Ujala Samwad
ताला नगरी अमर उजाला कार्यालय में संवाद कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षक - फोटो : संवाद
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विस्तार

शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और विद्यालयों में बेहतर माहौल बनाने की बहस के बीच शिक्षकों ने एक सुर में गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगातार लगाई जा रही ड्यूटी पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे न केवल पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि विद्यार्थियों का शैक्षणिक विकास भी बाधित हो रहा है। उन्होंने कहा कि बुनियादी शिक्षा व्यवस्था तभी मजबूत होगी, जब केवल पढ़ाने की जिम्मेदारी हो।

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ये बातें बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों ने 5 अप्रैल को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद में कहीं। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक संघ के जिलाध्यक्ष मुकेश कुमार सिंह ने पाठ्यक्रम को सरल और सीमित करने की वकालत करते हुए कहा कि प्राथमिक स्तर पर हिंदी और गणित पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। बच्चों का विद्यालयों में ठहराव बढ़ेगा, तभी शिक्षा का स्तर सुधरेगा।
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राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला मंत्री सुशील शर्मा ने अभिभावक-शिक्षक संवाद को मजबूत करने की जरूरत बताई, ताकि बच्चों की पढ़ाई पर बेहतर ध्यान दिया जा सके। शिक्षक विपुल राजौरा ने कहा कि विकसित भारत 2047 का सपना तभी साकार होगा, जब शिक्षकों को सम्मान मिलेगा और उन्हें गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखा जाएगा।

जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिला कोषाध्यक्ष विश्वनाथ ने एसआईआर जैसी ड्यूटी में शिक्षकों की तैनाती पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे पढ़ाई पर सीधा असर पड़ा है। शिक्षक मनोज वार्ष्णेय ने स्पष्ट कहा कि शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने से शिक्षण कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। शिक्षक प्रदीप सिंह ने कहा कि बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित होने पर ही शिक्षण कार्य प्रभावी हो सकेगा, इसके लिए अभिभावकों को जागरूक करना जरूरी है। शिक्षक नवीन कुमार और उमेश चंद वर्मा ने भी गैर-शैक्षणिक कार्यों को शिक्षण व्यवस्था के लिए घातक बताया। 

पीएमश्री विद्यालय एलमपुर के प्रधानाचार्य वीरेंद्र सिंह ने बच्चों के अनुपात में शिक्षकों की तैनाती की आवश्यकता पर जोर दिया। उप्र उर्दू टीचर्स एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष गुलजार अहमद ने कहा कि शिक्षकों को उनके कर्तव्यों की याद दिलाई जाती है, लेकिन उनके अधिकारों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। शिक्षक बिल्लू चौहान ने भी इसी मुद्दे को उठाते हुए कहा कि शिक्षकों को उनके अधिकार नहीं मिल रहे। शिक्षक सुमित सिंह ने बदलते मौसम के अनुसार विद्यालयों के समय में संशोधन न होने पर सवाल उठाते हुए कहा कि मार्च में स्कूल का समय सुबह 8 बजे से दोपहर एक बजे तक होना चाहिए।

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