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Janganana 2026: सिविल इंजीनियर की भूमिका में दिखेंगे प्रगणक, लेंगे घर की ईंट-सीमेंट और छत के मैटेरियल का हिसाब
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Thu, 02 Apr 2026 03:39 PM IST
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सार
इस बार जनगणना में पूछा जाएगा कि घर का फर्श बनाने में किस मैटेरियल का इस्तेमाल हुआ है। दीवारों की चिनाई सीमेंट से की गई है या चूने से और घर की छत पक्की है या लकड़ी की। यदि छत पक्की है, तो उसमें कैसी सामग्री इस्तेमाल हुई है।
ईंट-सीमेंट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जनगणना-2026 की प्रक्रिया अब अपने तकनीकी और विस्तृत चरण में प्रवेश कर रही है। इस बार जनगणना के दौरान प्रगणक केवल व्यक्तियों की संख्या ही नहीं गिनेंगे, बल्कि एक सिविल इंजीनियर की भूमिका में भी नजर आएंगे। 1 अप्रैल से प्रगणकों का प्रशिक्षण शुरू हो गया है, जिसमें उन्हें आवासों की संरचनात्मक बारीकियों को दर्ज करने के गुर सिखाए जा रहे हैं।
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इस बार की जनगणना में मकानों के निर्माण की गुणवत्ता और उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री का डेटा विस्तार से जुटाया जाएगा। जब प्रगणक घर-घर पहुंचेंगे, तो वे यह दर्ज करेंगे कि घर का फर्श बनाने में किस मैटेरियल का इस्तेमाल हुआ है। दीवारों की चिनाई सीमेंट से की गई है या चूने से और घर की छत पक्की है या लकड़ी की। यदि छत पक्की है, तो उसमें इस्तेमाल की गई सामग्री का विवरण भी डिजिटल एप में भरा जाएगा।
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प्रशिक्षण के साथ ही प्रशासन ने अन्य विभागों से मौजूदा आवासों की सूची भी तलब कर ली है। उत्तर प्रदेश के लिए जनगणना का कार्यक्रम तय कर दिया गया है। स्व-गणना के लिए 7 मई से 21 मई 2026 तक नागरिक स्वयं पोर्टल पर जाकर अपना विवरण भर सकेंगे। इसके बाद फील्ड वर्क (घर-घर गणना) का कार्य 22 मई से 20 जून 2026 तक होगा। इसमें प्रगणक मैदान में उतरेंगे और हर घर की भौतिक जांच कर डेटा संकलित करेंगे।
डिजिटल जनगणना के जरिए सरकार का उद्देश्य न केवल जनसंख्या, बल्कि देश के आवासीय ढांचे और नागरिकों के जीवन स्तर का एक सटीक डेटाबेस तैयार करना है। प्रगणकों को तकनीकी रूप से दक्ष किया जा रहा है। - प्रमोद कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व, जिला जनगणना अधिकारी