UP: अलीगढ़ में आईपीएल सट्टेबाजी का भंडाफोड़, पुलिस के हत्थे चढ़ा बड़ा बुकी, ऐसे लगता था सट्टे वाला दाव
बुकी मोबाइल ऐप्स के जरिए हाईटेक तरीके से सट्टा खिला रहा था। पुलिस ने उसके डिजिटल फुटप्रिंट्स और मोबाइल डेटा को कब्जे में ले लिया है, जिसमें कई बड़े लेन-देन के खुलासे हुए हैं।
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अलीगढ़ के थाना देहली गेट पुलिस ने आईपीएल सीजन के दौरान सट्टेबाजी के काले कारोबार पर सर्जिकल स्ट्राइक की है। पुलिस ने 1 अप्रैल की रात एक बड़ी कार्रवाई करते हुए शहर के एक कुख्यात बुकी को गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से भारी मात्रा में नकदी और सट्टेबाजी के पुख्ता सबूत बरामद हुए हैं।
जांच में सामने आया है कि बुकी मोबाइल ऐप्स के जरिए हाईटेक तरीके से सट्टा खिला रहा था। पुलिस ने उसके डिजिटल फुटप्रिंट्स और मोबाइल डेटा को कब्जे में ले लिया है, जिसमें कई बड़े लेन-देन के खुलासे हुए हैं। पुलिस ने बताया कि आरोपी को आज जेल भेजा जा रहा है और इस गिरोह के अन्य नेटवर्क की तलाश जारी है।
आईपीएल में सट्टे को लेकर हमारी टीमें निगरानी में लगी हैं। किसी भी स्तर पर अवैध धंधा अगर कहीं हो रहा है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।-नीरज जादौन, एसएसपी
आईपीएल..नहीं सज रहा है डब्बे वाला अड्डा, अब आईडी से लग रहा सट्टा
आईपीएल-2026 सीजन शुरू हो गया है। इसके साथ ही क्रिकेट के सटोरियों का सीजन चल पड़ा है। मगर सबसे खास बात है कि सटोरिये भी हाईटेक हो चले हैं। यही वजह है कि अबकी बार डिब्बे व मोबाइल कॉल के सहारे सट्टा लगना बंद हो गया है। अब आईडी से ऑनलाइन हार-जीत का दाव लग रहा है। अभी सीजन की शुरुआत है। बावजूद इसके अब तक हर दिन दो से तीन करोड़ के दाव लगने का अनुमान अपने शहर में लगाया जा रहा है। जैसे-जैसे सीजन आगे बढ़ेगा। दाव पर लगने वाली रकम बढ़ेगी।
जब से आईपीएल सीजन शुरू हुआ है। तब से सट्टा बहुत जोर-शोर से लगने लगा है। हालांकि उससे पहले भी क्रिकेट में सट्टा चलन में था। मगर इसके बाद इस कारोबार ने ज्यादा जोर पकड़ा है। पिछले वर्ष तक बुकी डब्बे वाला सट्टा लगवाया करते थे। जिसमें पकड़े जाने का झंझट ज्यादा रहता था और पकड़े गए तो मौके पर साक्ष्य भी मिलते थे। इसी से बचने के लिए सट्टा जगत में बड़ा बदलाव करते हुए अब ऑनलाइन सट्टा लगवाना शुरू किया है। जिसमें कोई भी सट्टा लगाने वाला देश स्तर पर चलने वाली ऑनलाइन एप में जाकर भी खेल सकता है। स्थानीय स्तर पर भी बुकी सक्रिय हैं, जिन्होंने सीधे दुबई या मुंबई से लाइन लेकर अपने लिए अलग से एप बनवा रखी हैं, जिसमें वे ग्राहकों का रजिस्ट्रेशन एडवांस में रकम लेकर करते हैं। उनके मोबाइल में एप डाउनलोड कराकर आईडी बनवा देते हैं। फिर ग्राहक द्वारा ऑनलाइन हार-जीत के सीधे दाव लगाए जाते हैं। आप कितनी रकम हारे व जीते ये सब ऑनलाइन दिखता रहता है। जब आप अपना हिसाब करना चाहें, उस दिन हिसाब कर सकते हैं। आपकी एडवांस में जमा रकम से ज्यादा के आप दाव नहीं लगा सकते।
शहर में दो दर्जन से ज्यादा बुकी सक्रिय
इस विषय में अब तक जो सामने आया है, शहर में करीब दो दर्जन से अधिक बुकी सक्रिय हैं। जिनके द्वारा ऑनलाइन सट्टा खिलवाया जा रहा है। इसमें शहर के कुछ चुंनिंदा इलाकों में लोग सक्रिय हैं। हर दिन दो से तीन करोड़ के दाव लगने की बात सामने आ रही है। इसमें सबसे हैरान करने वाली बात है कि हमारे शहर में इसमें युवा पीढ़ी ज्यादा लिप्त है। जल्दी रकम कमाने की होड़ में ये सब किया जा रहा है।
ऐसे लगता था सट्टे वाला दाव
इसके लिए बुकी अपने ऊपर वाले बुकी से लाइन (कमीशन पर सट्टा लगवाने व हार-जीत के दाव की जानकारी का विशेष अनुबंध) लेते थे। फिर शहर में अपने फंटर (ग्राहकों) को अपने नंबर बांटते थे। किसी एक ठिकाने पर चार-पांच लोग बैठकर कीपेड मोबाइल जिनमें रिकार्डिंग जरूरी है, उन पर उनके फंटर फोन करके दाव लगाते थे। जिसमें मैच के टॉस, ओवर-अंडर में रन या विकेट, एक-एक विकेट के अंतर, छह ओवर के शेषन में होने वाले घटनाक्रमों के साथ-साथ पूरे मैच की हार-जीत पर दाव लगाते थे। जिसमें सिर्फ कॉल करते समय बुकी या उनका स्टाफ फंटर को शर्त बताता था कि आप किस पर दाव लगाना चाहते हैं और उस दाव का वर्तमान रेट यस व नो में क्या चल रहा है। फंटर यस या नो पर अपनी दाव की रकम बताता। जिसे एक रजिस्टर में भी दर्ज किया जाता और मोबाइल में आवाज रिकार्ड भी सबूत होता था। मगर अब सब बदल गया है।
ये खास तथ्य जानें
- किसी भी ग्राहक को एडवांस रकम जमा कर खुलवानी होती है आईडी
- आईडी खुलने पर ही वह एप के जरिये हार-जीत के दाव लगा सकता
- इसके लिए बुकी को भी किसी एक जगह बैठने की जरूरत नहीं होती
- बुकी को दुबई से लेकर मुंबई सहित अन्य ठिकानों से मिलता अपडेट
- डब्बे वाले गैम में रजिस्टर में व मोबाइल में करनी होती थी रिकार्डिंग
- इसमें दाव लगने और हार जीत पर ही ऑनलाइन रहता है पूरा हिसाब