चहचहाता अलीगढ़: गौरैया-बुलबुल से चितकबरा उल्लू तक मौजूद, तीन ठिकानों पर 90 से ज्यादा प्रजातियों की हुई पहचान
दुनिया के 90 देशों में पक्षियों की 158 नई प्रजातियां सामने हैं जिसमें उत्तर प्रदेश प्रदेश सहित भारत के 12 राज्य भी शामिल हैं। इस गणना के मुताबिक, साल 2024 में दुनियाभर में पक्षियों की आठ हजार प्रजातियों की गणना हुई जो 2025 में बढ़कर 8,158 तक पहुंची।
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तेजी से फैलते कंक्रीट और घटते हरित क्षेत्र के बीच अलीगढ़ शहर से राहत भरी तस्वीर सामने आई है। शहर के तीन प्रमुख स्थल अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू), डीएस कॉलेज परिसर और जवाहर पार्क में पक्षियों की 90 से अधिक प्रजातियों की पहचान हुई है। यह जानकारी वैश्विक नागरिक विज्ञान अभियान ग्रेट बैकयार्ड बर्ड काउंट (जीबीबीसी) की रिपोर्ट में सामने आई है।
इस विश्वव्यापी गणना के दौरान दुनिया के 90 देशों में पक्षियों की 158 नई प्रजातियां सामने हैं जिसमें उत्तर प्रदेश प्रदेश सहित भारत के 12 राज्य भी शामिल हैं। इस गणना के मुताबिक, साल 2024 में दुनियाभर में पक्षियों की आठ हजार प्रजातियों की गणना हुई जो 2025 में बढ़कर 8,158 तक पहुंची। इसमें अलीगढ़ की भूमिका इसलिए भी अहम है क्योंकि गणना के दौरान शहर में शिकारी, कीटभक्षी और बीजभक्षी सभी प्रकार के पक्षियों की मौजूदगी पाई गई जो किसी भी शहर की एक स्वस्थ जैव विविधता के लिए जरूरी है।
डीएस कॉलेज : यहां एक दिन में दिखीं 29 प्रजातियां
बीते 16 फरवरी को डीएस कॉलेज परिसर में एक ही दिन में 29 प्रजातियों के 79 पक्षी मिले। इनमें कबूतर, फाख्ता, बुलबुल, मैना, तोता, गौरैया और सात भाई जैसे सामान्य पक्षियों के साथ शिकरा, चील और चितकबरा उल्लू जैसे शिकारी पक्षी भी शामिल हैं। जंतु विज्ञान विभाग की डॉ. पूजा कुमारी का कहना है कि अब पक्षी भीड़भाड़ वाले सेंटर प्वाइंट या रेलवे रोड के बजाय शांत परिसरों को चुन रहे हैं।
एएमयू बना ‘हॉटस्पॉट’
एएमयू में अब तक 98 से अधिक प्रजातियां दर्ज हुई हैं। यहां घने पेड़, पुराने वृक्ष और खुले मैदान प्रवासी और स्थानीय दोनों प्रकार के पक्षियों को अनुकूल वातावरण दे रहे हैं। पक्षियों की संख्या का सटीक आंकलन और जनता में पक्षियों के साथ सह-अस्तित्व की भावना एवं जागरूकता के लिए यह रिपोर्ट बहुत मायने रखती है। इससे हमें यह समझने में मदद मिलती है कि कौन सी प्रजाति हमारे शहर के किस क्षेत्र में फल-फूल रही है।
जवाहर पार्क: शहर का हरित फेफड़ा
शहर के मध्य स्थित जवाहर पार्क भी पक्षियों का सुरक्षित आश्रय बनकर उभरा है। सुबह के समय यहां जल स्रोतों और घने वृक्षों के आसपास विभिन्न प्रजातियां देखी जाती हैं। आंकड़े बताते हैं कि शहरी दबाव के बावजूद ग्रीन पॉकेट्स यानी हरित जेबें अभी भी जीवंत हैं। हालांकि पेड़ों की कटाई, कंक्रीटीकरण और जल स्रोतों का क्षरण लगातार बढ़ता गया तो यह संतुलन प्रभावित हो सकता है।
कौन-कौन सी प्रजातियां प्रमुख देखीं गई
गणना में कबूतर की संख्या सबसे अधिक रही। इनके अलावा, सफेद-आंख चिड़िया, चट्टानी सुर्ख चिड़िया, छोटी फाख्ता, ह्यूम की पत्तीचुंगी और हरी पत्तीचुंगी जैसी प्रजातियां दर्ज की गईं। सामान्य के अलावा यहां खाद्य श्रृंखला के ऊपरी स्तर के पक्षी भी दिखे। शिकरा और चितकबरा उल्लू की मौजूदगी बताती है कि परिसर में संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र सक्रिय है। वहीं चील, तोता, मैना, गौरैया, सात भाई और बुलबुल जैसी प्रजातियां भी दर्ज की गईं।