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Research: कूड़े में नहीं फिकेंगे मटर के छिलके, बनेंगे बिस्किट, मीट पेटीज-पैक्ड फूड में होगा इस्तेमाल

अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Mon, 09 Feb 2026 10:17 AM IST
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सार

हरी मटर के छिलके को बिस्किट में इस्तेमाल किया गया है। इस छिलके को मीट पेटीज, पैक्ड फूड सहित अन्य खाद्य पदार्थ में इस्तेमाल कर सकते हैं।

Pea shell biscuits
छिलके से बिस्किट बनाने वाली मशीन, मटर के छिलके से बना बिस्किट - फोटो : संवाद
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विस्तार

पशु चारे या बेकार समझे जाने वाले हरी मटर के छिलके में रेशा तो है ही साथ ही इसमें प्रोटीन, खनिज तत्व भी है। शर्करा और पॉलीफेनॉल्स भी कम मात्रा में हैं। इसका खुलासा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के कृषि विज्ञान संकाय के पोस्ट हार्वेस्ट इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी विभाग के अध्ययन में हुआ है। इससे उच्च फाइबर, कम कैलोरी और पोषण से भरपूर बिस्किट और अन्य खाद्य पदार्थ तैयार किए जा सकते हैं।

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विभाग के प्रो. सदफ जैदी के मार्गदर्शन में हुआ यह शोध चार अंतरराष्ट्रीय जर्नल में भी छप चुका है।पांच साल तक चले शोध में शोधार्थी गाजिया नासिर ने पाया कि मटर के कुल वजन का लगभग 35-40 फीसदी हिस्सा उसका बाहरी छिलका होता है, जिसे अमूमन बेकार समझ कर फेंक दिया जाता है, जबकि इसके छिलके में मौजूद तत्व मधुमेह रोधी, यकृत और गुर्दा सुरक्षा, जीवाणुरोधी गुण रखते हैं, जो जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से लड़ने में सहायक हो सकते हैं। मीट पेटीज, पैक्ड फूड बनाने भी यह इस्तेमाल हो सकता है।
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हरी मटर के छिलके को बिस्किट में इस्तेमाल किया गया है, जिसके नतीजे सुखद रहे। इस छिलके को मीट पेटीज, पैक्ड फूड सहित अन्य खाद्य पदार्थ में इस्तेमाल कर सकते हैं। इस नवाचार का पेटेंट कराने की तैयारी कर रहे हैं। इसके बाद इसे आम लोगों तक पहुंचाने के लिए बाजार में लाया जाएगा।-प्रो. सदफ जैदी, पोस्ट हार्वेस्ट इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी विभाग एएमयू

शोध की खास बात

  • मटर के छिलकों से पी पॉड पाउडर तैयार किया गया,उसके पोषणात्मक, भौतिक और कार्य करने के गुणों का विश्लेषण किया गया। शोध में पाया गया कि इस पाउडर में लगभग 35 फीसदी आहार रेशा, पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन और सूक्ष्म पोषक तत्व मौजूद हैं।
  • इस पाउडर का उपयोग करके फाइबर-युक्त, कम कैलोरी वाले बिस्किट बनाए गए। सेहत को नुकसान न हो, इसके लिए चीनी की जगह स्टीविया, मक्खन की जगह इनुलिन और बर्नयार्ड मिलेट (सांवा) का इस्तेमाल किया गया।
  • रेबाउडियाना नामक पौधे की पत्तियों से प्राप्त स्टीविया चीनी की तुलना में 150-300 गुना अधिक मीठा होता है, लेकिन इसमें कैलोरी व कार्बोहाइड्रेट शून्य है। इनुलिन एक प्रकार का प्रीबायोटिक है। यह आंत में रहता है और कुछ लाभकारी बैक्टीरिया को बढ़ने में मदद करता है।
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