AMU: स्केटिंग रिंक पर खिलाड़ियों का हंगामा, फेक गेम कहकर अपमान करने, लाइट बंद करने और कोच न होने का आरोप
एएमयू के स्केटिंग रिंक पर बाहरी लोगों (आउटसाइडर्स) की मौजूदगी को लेकर विवाद गहरा गया है। खिलाड़ियों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
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एएमयू के स्केटिंग रिंक पर फेक गेम (अनधिकृत खेल) और अपमानित करने को लेकर खिलाड़ियों ने खूब हंगामा काटा। महिला खिलाड़ियों ने अभ्यास के दौरान उनकी वीडियोग्राफी होने को लेकर आपत्ति जताई है।
खिलाड़ियों का आरोप है कि स्केटिंग खेल और उससे जुड़े खिलाड़ियों का लगातार अपमान किया जा रहा है। प्रशिक्षण से जुड़े लोगों द्वारा सार्वजनिक रूप से स्केटिंग को फेक गेम और खिलाड़ियों के प्रमाणपत्रों को फेक बताया जाता है, जिससे उनका मनोबल टूटता है। खिलाड़ियों ने यह भी आरोप लगाया कि स्केटिंग रिंक की लाइटें शाम 7:30 बजे के बाद बंद कर दी जाती हैं, जबकि अन्य खेलों के मैदानों में देर रात तक अभ्यास की सुविधा मिलती है।
खिलाड़ियों ने स्केटिंग रिंक के रखरखाव, योग्य कोच की नियुक्ति, महिला खिलाड़ियों के लिए बेहतर प्रतिनिधित्व और सुरक्षित माहौल की मांग भी उठाई। उन्होंने एक अधिकारी पर अभद्र भाषा के प्रयोग और महिला खिलाड़ियों के प्रति अनुचित टिप्पणी करने के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। एएमयू स्केटिंग क्लब ने विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और इंटर यूनिवर्सिटी स्तर पर अनेक पदक दिलाए हैं, लेकिन इसके बावजूद खिलाड़ियों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। खिलाड़ियों ने कुलपति को ज्ञापन सौंपा है।
खिलाड़ियों ने जो आरोप लगाए हैं, उनकी जांच की जा रही है। जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। बाहरी लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगेगा। अभ्यास करते खिलाड़ियों की बिना अनुमति के वीडियोग्राफी करता कोई मिला, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।-प्रो. मोहम्मद नवेद खान, प्रॉक्टर, एएमयू
स्केटिंग रिंक पर बाहरी लोगों के आने पर उठे सवाल
एएमयू के स्केटिंग रिंक पर बाहरी लोगों (आउटसाइडर्स) की मौजूदगी को लेकर विवाद गहरा गया है। खिलाड़ियों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। खिलाड़ियाें ने कहा कि यूनिवर्सिटी में बाहरी लोगों का प्रवेश प्रतिबंध है, तो कैसे रिंक के पास आ जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों पर सख्ती दिखाई जाती है, जबकि अन्य को छूट दी जाती है, जिससे खिलाड़ियों में असंतोष बढ़ रहा है।