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मेरा शहर-मेरी चिंता: बढ़ती आबादी, सिकुड़ती हरियाली, इसलिए फूल रही हैं अलीगढ़ की सांसें

Sun, 16 Aug 2026 05:06 PM IST
Chaman Kumar Sharma रिंकू शर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
रिंकू शर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Sun, 16 Aug 2026 05:06 PM IST
सार

सड़क चौड़ीकरण और अन्य विकास परियोजनाओं के लिए पिछले दो वर्षों में जिले में करीब छह हजार हरे पेड़ों की कटाई हुई है। इनके बदले पौधारोपण की योजनाएं बनाई गई हैं, लेकिन पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि वर्षों पुराने विकसित पेड़ों की भरपाई केवल पौधे लगाकर नहीं की जा सकती।

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pollution updates in aligarh
कासिमपुर पावर हाउस नर्सरी - फोटो : संवाद

विस्तार

अलीगढ़ लगातार फैल रहा है। नई कॉलोनियां बस रही हैं, सड़कें चौड़ी हो रही हैं और कंक्रीट का दायरा बढ़ता जा रहा है। लेकिन इसी विकास के साथ शहर की हरियाली सिकुड़ने की चिंता भी बढ़ रही है। विकास कार्यों के लिए हजारों पुराने पेड़ काटे जा चुके हैं, जबकि उनकी भरपाई के लिए हर साल बड़े पैमाने पर पौधारोपण के दावे किए जा रहे हैं। सवाल यह है कि क्या पौधे लगाने के आंकड़े वास्तव में शहर की घटती हरियाली की भरपाई कर पा रहे हैं?

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वन विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जिले का ग्रीन कवर अभी भी सीमित है। दूसरी ओर शहर की आबादी और निर्माण गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि शहरी विस्तार के साथ हरित क्षेत्र नहीं बढ़ा तो आने वाले वर्षों में वायु प्रदूषण, तापमान और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।

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शहर को हरा -भरा बनाने के लिए नए पार्क विकसित किए जा रहे हैं। पुराने पार्कों का सुंदरीकरण व कायाकल्प कराया जा रहा है। पाैधरोपण अभियान को गति देने के लिए रोपे गए पाैधों की देखरेख की जा रही है, ताकि वातावरण शुद्ध बन सके। - प्रेम प्रकाश मीणा, नगर आयुक्त

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जिले भर में पाैधरोपण अभियान के तहत विभिन्न विभागों के सहयोग से इस बार करीब 36 लाख पाैधे रोपे गए हैं। जिओ टैगिंग के साथ इनकी देखरेख रखी जाएगी। - शिवम कुमार, डीएफओ

137 पार्क, लेकिन क्या इतनी हरियाली पर्याप्त है?
नगर निगम के अनुसार शहर में 137 पार्क हैं। इनमें से 67 पार्कों के कायाकल्प का काम चल रहा है। पार्कों में पौधरोपण, घास, वॉकिंग ट्रैक, रोशनी और अन्य सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। तालानगरी में भी एक बड़े पार्क की योजना तैयार की गई है। हालांकि शहर के सभी हिस्सों में हरित क्षेत्र समान नहीं है। कई नई कॉलोनियों में पार्क विकसित हुए हैं, जबकि कई पुराने और घनी आबादी वाले इलाकों में लोगों को पर्याप्त खुले और हरे स्थान उपलब्ध नहीं हैं।

दो साल में छह हजार पेड़ कटे
सड़क चौड़ीकरण और अन्य विकास परियोजनाओं के लिए पिछले दो वर्षों में जिले में करीब छह हजार हरे पेड़ों की कटाई हुई है। इनके बदले पौधारोपण की योजनाएं बनाई गई हैं, लेकिन पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि वर्षों पुराने विकसित पेड़ों की भरपाई केवल पौधे लगाकर नहीं की जा सकती। पौधों का जीवित रहना और पेड़ बनने तक उनकी देखरेख भी उतनी ही जरूरी है।

20,500 पौधे लगाने का लक्ष्य, असली चुनौती उन्हें बचाने की
नगर निगम ने वर्ष 2026-27 में 20,500 पौधे लगाने की कार्ययोजना बनाई है। इसके तहत बरौला जाफराबाद में 7,325, शहर के 90 वार्डों में 3,600, पार्कों में 7,075 और डिवाइडरों पर 2,500 पौधे लगाए जाएंगे। जुलाई में एक दिन में 21 हजार पौधे लगाने का अभियान भी चलाया गया। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण का पैमाना केवल पौधारोपण नहीं, बल्कि पौधों का जीवित रहना और उनका पेड़ बनना है।

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