Holi 2026: रंगभरनी एकादशी महोत्सव कल, 20 हजार से ज्यादा लोग खेलेंगे होली
अगर आपको रंग व गुलाल से होली खेलने से परहेज है तो शहर के इन प्रमुख बाजारों व मंदिरों को जाने वाले रास्तों का प्रयोग न करें, बल्कि वैकल्पिक रास्तों का प्रयोग करें।
विस्तार
अलीगढ़ शहर के 100 साल पुराने रंगभरनी एकादशी महोत्सव में 20 हजार लोग सड़कों पर होली खेलते नजर आएगें। इसके चलते शुक्रवार को सासनी गेट से लेकर मदार गेट तक का इलाका प्रभावित रहेगा। 10 प्रमुख बाजार, 25 मोहल्ले और आठ चौराहों से शहर के छह प्रमुख मंदिरों की शोभायात्रा निकलेगी। इसके चलते अस्थायी रूट डायवर्जन भी रहेगा। इस महोत्सव में घातक रंगों से नहीं बल्कि गुलाल और फूलों के साथ होली खेली जाएगी।
वहीं शहर के दो प्राचीन मंदिरों में लट्ठमार होली का नजारा भी देखने को मिलेगा। हुड़दंगियों से निपटने के लिए पुलिस ने अतिरिक्त फोर्स तैनात करने का फैसला लिया है। एक कंपनी सहित करीब 300 पुलिसकर्मी सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन के जरिये निगरानी रखेंगे। इस दिन जुमे का दिन होने पर पुलिस भी सतर्क रहेगी और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। अगर आपको रंग व गुलाल से होली खेलने से परहेज है तो शहर के इन प्रमुख बाजारों व मंदिरों को जाने वाले रास्तों का प्रयोग न करें, बल्कि वैकल्पिक रास्तों का प्रयोग करें। एसपी ट्रैफिक प्रवीन कुमार के अनुसार, यातायात पुलिस ने इन मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती करने के साथ ही वाहनों की रोकथाम की व्यवस्था की है।
इन मार्गों पर नहीं चलेंगे वाहन
- सासनीगेट से जयगंज बाजार, आगरा रोड मदारगेट से बड़ा बाजार, सर्राफा, फूल चाैक, महावीरगंज, बारहद्वारी से आने वाले वाहन।
- छिपैटी बाजार, कनवरीगंज, सब्जी मंडी, अब्दुल करीम चाैराहा, ऊपरकोट की ओर आने वाले सभी प्रकार के वाहन।
- अचलेश्वर महादेव मंदिर से मदारगेट, जीटी रोड की ओर आने वाले वाहनों पर रोक रहेगी।
यहां बरसता है बरसाने का रंग, झूम उठता है हर मन
बृज क्षेत्र रंग से सराबोर हो चुका है। अबीर, गुलाल से पूरी फिजा रंग उठी है। बृज की देहरी अलीगढ़ भी परंपराओं के रंग से रंगा हुआ है। यहां की जयगंज की कुंज गलियों को तो मिनी वृंदावन ही कहा जाता है। प्राचीन मंदिर बृज के मंदिरों की छटा बिखेरते हैं। वृंदावन की तरह ही द्वारिकाधीश महाराज, श्री लक्ष्मी नारायण, मुरली मनोहर महाराज, रंग रंगेश्वर मंदिर हैं। इसलिए रंगभरनी एकादशी की परंपरा की जड़ें बहुत गहरी हैं, जो आज भी रंगों की तरह गाढ़ी होती जा रहीं है। इस बार रंग भरनी एकादशी का उत्सव 27 फरवरी को पूरे धार्मिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा।
अबीर गुलाल से डूब जाता है जयगंज
मिनी वृंदावन के नाम से प्रसिद्ध जयगंज अबीर गुलाल से डूब जाता है। यहां की कुंज गलियों में मंदिरों की एक बड़ी शृंखला है। रंगभरनी एकादशी पर द्वारिकाधीश मंदिर, श्री लक्ष्मी मंदिर, रंगेश्वर मंदिरों से भव्य डोला निकलता है। इन मंदिरों में उत्सव की परंपरा 100 वर्ष से भी अधिक पुरानी है। आजादी से पहले इन मंदिरों में डोले निकाले जाने की परंपरा है। मंगलेश्वर महादेव मंदिर तो करीब 700 वर्ष पुराना है। जहां महाशिवरात्रि से ही होली प्रारंभ हो जाती है।
गोपिकाएं बरसाती हैं यहां लठ्ठ
शहर के जीटी रोड स्थित प्रसिद्ध श्री वार्ष्णेय मंदिर वृंदावन की तर्ज पर ही बनाया गया है। मंदिर में राधा कृष्ण विराजमान हैं। मंदिर के व्यवस्थापक राधेश्याम गुप्ता स्क्रैप का कहना है कि 25 वर्ष से अधिक समय से यहां रंग भरनी एकादशी का उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। इसी दिन यहां लठामार होली होती है, जिसमें बरसाना की तरह गोपिकाएं हाथों में लठ लिए होती हैं वहीं नंदगांव की तरह कन्हैया के साथ उनके सखा भी होते हैं। रंगों की बौछार के बीच लठामार होली का उत्सव देखते ही बनता है।
यहां बसता है बरसाना
श्री अचलेश्वर धाम मंदिर में भी विगत कई वर्षों से लठामार होली का आयोजन किया जा रहा है। रंगभरनी एकादशी पर यहां का रंग एकदम बरसाना की तरह नजर आता है। कार्यक्रम संयोजिका पूर्व मेयर शकुंतला भारती ने बताया कि रंगभरनी एकादशी पर लठामार की परंपरा हमें बरसाने का दर्शन कराती है। इसलिए यहां की वेशभूषा, कलाकारों की प्रस्तुति सब बरसाने की तरह ही होती है। अचलेश्वर मंदिर पर बरसाने की होली का आनंद रंग एकादशी पर लेते हैं। इस परंपरा से नई पीढ़ी को भी जोड़ने का प्रयास किया जाता है, जिससे उत्सव की खुशबू दूर तक जाए।
यहां भी उड़ेगा रंग, गुलाल
रंगभरनी एकादशी पर शहर के टीकाराम मंदिर में होली खास होती है। सीता -रामजी मंदिर से बाहर निकलकर भक्तों से होली खेलने आते हैं। श्री गिलहराज जी मंदिर, खैर रोड स्थित खेरेश्वर धाम, विश्वामित्रपुरी, बेसवां के धरणीधर सरोवर पर लठामार होली आयोजित होगी। श्री राधा मोहन मंदिर मामू भांजा, हरदुआगंज में स्थित इस्कान गीता ज्ञान मंदिर, श्री अखिलेश्वर महादेव मंदिर रघुवीरपुरी में रंगभरनी एकादशी पर भव्य आयोजन होंगे। श्रद्धालु राधारानी और भगवान श्री कृष्ण के स्वरूपों के साथ अबीर गुलाल व प्राकृतिक रंगों से जमकर होली खेलेंगे। शहर के ही पक्की सराय स्थित बिहारीजी मंदिर में होली के अगले दिन शोभायात्रा धूमधाम से निकाली जाएगी।
4 मार्च को खेली जाएगी रंगों की होली
ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा के अनुसार, होली के दिन पूर्ण चंद्र ग्रहण पर इस बार दुर्लभ संयोग बनेगा। ऐसा संयोग करीब 100 साल पहले 08 मार्च 1926 को बना था। उन्होंने बताया कि 03 मार्च को प्रातः 6:20 से ग्रहण काल के सूतक प्रारंभ हो जाएंगे। ग्रहण की समाप्ति और शुद्धिकरण के बाद 04 मार्च को रंगों का त्योहार मनाया जाएगा। सूतक काल और ग्रहण के दौरान उत्सव मनाना और रंगों से खेलना वर्जित है। यह समय साधना और ईश्वर भक्ति का होता है कि यही कारण है कि 03 मार्च को पूरा देश सूतक में रहेगा और रंग नहीं खेले जाएंगे।
होलिका दहन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त
- 3 मार्च को प्रदोष काल शाम 06:46 से रात्रि 08:49 तक ( सूतक और ग्रहण काल ) रहेगा। भद्रा का साया होने की वजह से रात 12:50 से 02:02 के मध्य होलिका दहन होगा।
- 4 मार्च को रंगों की होली ( धुलेडी)
