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AMU: लुप्त होती जड़ी-बूटी विकसित करने की तकनीक खोजी, अब मैदानी इलाकों में पैदा होगी हिमालय की देसी दर्द निवारक

अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Sun, 14 Jun 2026 04:10 PM IST
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सार

विकसित किए गए सभी पौधों में जड़ों का सफल निर्माण हुआ और ग्रीनहाउस में प्रत्यारोपित करने के बाद हर पौधा जीवित रहा। दुर्लभ औषधीय वनस्पति फ्लोमिस ब्रैक्टियोसा को लेकर प्रो. अनवर शहजाद के निर्देशन में आशिक यूसुफ भट ने शोध किया है।

Research at AMU on indigenous pain reliever from the Himalayas
एएमयू - फोटो : संवाद
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विस्तार

अब मैदानी इलाकों में भी देसी दर्द निवारक जड़ी-बूटी पैदा हो सकेगी। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के वैज्ञानिकों ने हिमालय की लुप्त होती जड़ी-बूटी फ्लोमिस ब्रैक्टियोसा को लैब में विकसित करने की तकनीक खोज ली है। इन पौधों के जीवित रहने की दर 100 प्रतिशत रही है।



विलुप्ति के खतरे का सामना कर रही दुर्लभ औषधीय जड़ी-बूटी फ्लोमिस ब्रैक्टियोसा को बचाने के लिए वैज्ञानिकों ने ऐसी उन्नत टिश्यू कल्चर तकनीक विकसित की है, जिससे लैब में तैयार किए गए पौधों की जीवित रहने की दर 100 प्रतिशत दर्ज की गई है। हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाने वाली यह जड़ी-बूटी लंबे समय से आयुर्वेदिक और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में उपयोग की जाती रही है, लेकिन बढ़ते व्यावसायिक दोहन, प्राकृतिक आवासों के विनाश और अनियंत्रित संग्रहण के कारण इसकी जंगली आबादी तेजी से घट रही है। यह चेतावनी भी दी गई है कि अगर समय रहते संरक्षण के प्रभावी उपाय नहीं किए गए, तो यह बहुमूल्य वनस्पति आने वाले वर्षों में गंभीर संकट का सामना कर सकती है।
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इसी चुनौती को देखते हुए वैज्ञानिकों ने बीज अंकुरण से लेकर पूर्ण विकसित पौधे तैयार करने तक की पूरी प्रक्रिया को लैब में सफलतापूर्वक विकसित किया। अध्ययन में पाया गया कि बीजों के कठोर बाहरी आवरण को हटाकर विशेष पोषक माध्यम में उगाने पर 100 प्रतिशत अंकुरण प्राप्त किया जा सकता है। इसके बाद पौधे की पत्तियों और नोडल भागों से नई शाखाएं और भ्रूण विकसित कर कम समय में बड़ी संख्या में पौध तैयार किए गए।

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उल्लेखनीय उपलब्धि यह रही कि विकसित किए गए सभी पौधों में जड़ों का सफल निर्माण हुआ और ग्रीनहाउस में प्रत्यारोपित करने के बाद हर पौधा जीवित रहा। दुर्लभ औषधीय वनस्पति फ्लोमिस ब्रैक्टियोसा को लेकर प्रो. अनवर शहजाद के निर्देशन में आशिक यूसुफ भट ने शोध किया है। शोध रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय जर्नल स्प्रिंग नेचर में भी छपी है।

फ्लोमिस ब्रैक्टियोसा में औषधीय संभावनाएं मौजूद हैं। ऐसे में लैब आधारित बड़े पैमाने पर संवर्धन से न केवल प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम होगा, बल्कि दवा उद्योग को भी गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री उपलब्ध कराई जा सकेगी। इस तकनीक को व्यावसायिक स्तर पर अपनाया जाता है तो स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।-प्रो. अनवर शहजाद, वनस्पति विज्ञान विभाग, एएमयू


दांत और खांसी-जुकाम में भी राहत
फ्लोमिस ब्रैक्टियोसा, जिसे कभी-कभी बैंगनी जेरूसलम ऋषि भी कहा जाता है, मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों और अफगानिस्तान में पाए जाने वाले पुदीना परिवार का एक औषधीय और बारहमासी पौधा है। इस पारंपरिक औषधीय पौधे से दांत के दर्द में राहत मिलती है। इसकी पत्तियों के चूरन का उपयोग चाय के साथ मिलाकर खांसी और जुकाम के इलाज के लिए किया जाता है। इसके फूलों को पीसकर दांत दर्द से राहत पाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

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