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Aligarh News: घेवर की मिठास ने लांघीं सरहदें, विदेशों तक पहुंचेगा अलीगढ़ का स्वाद
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दुबे का पड़ाव स्थित मिठाई की दुकान में तैयार घेवर।
- फोटो : Samvad
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सावन की रस्मों और रक्षाबंधन की परंपरा से जुड़ी मौसमी मिठाई घेवर की मिठास अब विदेशों तक पहुंच रही है। अलीगढ़ में इस बार सावन में घेवर का कारोबार 25 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है।
शहर के प्रतिष्ठित मिठाई कारोबारियों के पास अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा और यूएई समेत कई देशों से ऑर्डर आ चुके हैं, जिन्हें तैयार करने का काम तेज हो गया है।
राजस्थान की पारंपरिक मिठाई घेवर अब उत्तर भारत के कई राज्यों में सावन और रक्षाबंधन की पहचान बन चुकी है। मैदा, घी और चीनी से तैयार होने वाली यह मिठाई विशेष रूप से बारिश के मौसम में बनाई जाती है।
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रक्षाबंधन पर बहनों द्वारा भाइयों को उपहार स्वरूप घेवर देने की परंपरा ने इसकी मांग को और बढ़ा दिया है। सावन शुरू होते ही शहर की बड़ी और छोटी मिठाई दुकानों पर घेवर की बिक्री शुरू हो गई है।
400 से अधिक दुकानों पर तैयार हो रहा घेवर
शहर में करीब दो दर्जन प्रतिष्ठित प्रतिष्ठानों सहित 400 से अधिक छोटी-बड़ी मिठाई दुकानों पर इन दिनों घेवर तैयार किया जा रहा है। कारोबारियों के मुताबिक इस एक महीने में कई क्विंटल घेवर का उत्पादन और बिक्री होगी। विदेश भेजने के लिए विशेष रूप से सूखा घेवर तैयार किया जा रहा है, जिसे वहां ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार चाशनी लगाकर इस्तेमाल करते हैं।
300 से 1400 रुपये किलो तक उपलब्ध
बाजार में घेवर की कीमत 300 रुपये से 1400 रुपये प्रति किलो तक है। दुकानों पर प्लेन, केसर, मावा, मलाई, पिस्ता, चॉकलेट, फीका, चाशनी, छोटा और पारंपरिक मुड्डा घेवर समेत करीब दस वैरायटी उपलब्ध हैं।
दूध-घी महंगा, फिर भी मांग बरकरार
मिठाई विक्रेता राजीव ख्यालीराम ने बताया कि इस वर्ष दूध और घी की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण घेवर की कीमतें भी बढ़ी हैं, लेकिन मांग पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ा है।
मिठाई कारोबारी शुभम गोयल के अनुसार घेवर की बिक्री ने रफ्तार पकड़ ली है। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी अलीगढ़ से विदेशों तक घेवर भेजने की तैयारियां चल रही हैं।
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शहर के प्रतिष्ठित मिठाई कारोबारियों के पास अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा और यूएई समेत कई देशों से ऑर्डर आ चुके हैं, जिन्हें तैयार करने का काम तेज हो गया है।
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राजस्थान की पारंपरिक मिठाई घेवर अब उत्तर भारत के कई राज्यों में सावन और रक्षाबंधन की पहचान बन चुकी है। मैदा, घी और चीनी से तैयार होने वाली यह मिठाई विशेष रूप से बारिश के मौसम में बनाई जाती है।
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रक्षाबंधन पर बहनों द्वारा भाइयों को उपहार स्वरूप घेवर देने की परंपरा ने इसकी मांग को और बढ़ा दिया है। सावन शुरू होते ही शहर की बड़ी और छोटी मिठाई दुकानों पर घेवर की बिक्री शुरू हो गई है।
400 से अधिक दुकानों पर तैयार हो रहा घेवर
शहर में करीब दो दर्जन प्रतिष्ठित प्रतिष्ठानों सहित 400 से अधिक छोटी-बड़ी मिठाई दुकानों पर इन दिनों घेवर तैयार किया जा रहा है। कारोबारियों के मुताबिक इस एक महीने में कई क्विंटल घेवर का उत्पादन और बिक्री होगी। विदेश भेजने के लिए विशेष रूप से सूखा घेवर तैयार किया जा रहा है, जिसे वहां ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार चाशनी लगाकर इस्तेमाल करते हैं।
300 से 1400 रुपये किलो तक उपलब्ध
बाजार में घेवर की कीमत 300 रुपये से 1400 रुपये प्रति किलो तक है। दुकानों पर प्लेन, केसर, मावा, मलाई, पिस्ता, चॉकलेट, फीका, चाशनी, छोटा और पारंपरिक मुड्डा घेवर समेत करीब दस वैरायटी उपलब्ध हैं।
दूध-घी महंगा, फिर भी मांग बरकरार
मिठाई विक्रेता राजीव ख्यालीराम ने बताया कि इस वर्ष दूध और घी की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण घेवर की कीमतें भी बढ़ी हैं, लेकिन मांग पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ा है।
मिठाई कारोबारी शुभम गोयल के अनुसार घेवर की बिक्री ने रफ्तार पकड़ ली है। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी अलीगढ़ से विदेशों तक घेवर भेजने की तैयारियां चल रही हैं।