Aligarh News: शहर की पॉश कॉलोनियों में तीन लाख घर खाली, नहीं बिक रहे, जाने क्या है इसकी बड़ी वजह
अलीगढ़ में अधिकांश रियल एस्टेट कारोबारी चार हेक्टेयर से कम भूमि पर कॉलोनी बनाते हैं। इतने कम क्षेत्रफल में ईडब्ल्यूएस और एलआईजी बनाने की शर्त लागू नहीं होती है, इसलिए सस्ते मकानों का निर्माण नहीं हो पा रहा है। रि
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अलीगढ़ शहर में हर वर्ष 50,254 लोग बढ़ रहे हैं, इनके परिवारों की संख्या 12,000 तक आंकी गई है। हर साल इनके लिए लगभग 37 हजार नए घरों की जरूरत है, लेकिन अच्छे और सस्ते घर ढूंढे नहीं मिल रहे। विकसित कॉलोनियों के महंगे मकान लोगों के बजट से बाहर हैं।
तेजी से बढ़ रहे शहर में आवास और कॉमर्शियल भवनों की कितनी मांग हो रही है। इसकी सही जानकारी करने के लिए एडीए ने हाल ही में कुशमेन एंड वेकफील्ड कंपनी से एक सर्वे कराया, जिसमें 8,258 परिवारों से निजी घर लेने के बारे में बातचीत की गई। इस सर्वे के अनुसार शहर की आबादी में हर वर्ष 50,254 लोग बढ़ रहे हैं। इनके परिवारों की संख्या 12 हजार से अधिक है, जिनको सस्ते आवास और फ्लैट चाहिए।
यह मध्य वर्ग ईडब्ल्यूएस और एलआईजी श्रेणी को ज्यादा पसंद कर रहा है, जो 25 से 30 लाख रुपये के सामान्य बजट में मिल जाते हैं, लेकिन ऐसे आवास ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। एडीए और आवास विकास जैसी सरकारी संस्थाओं द्वारा बनवाए गए 37 हजार नए सस्ते घरों की मांग हर साल हो रही है, जिसमें ईडब्ल्यूएस और एलआईजी श्रेणी के आवास और फ्लैट शामिल हैं। इसी मांग को पूरा करने के लिए एडीए शहर में 10 योजनाओं पर काम कर रहा है। इधर, निजी स्तर पर रियल एस्टेट में तीन लाख से अधिक घर मौजूद, लेकिन महंगे होने के कारण लोगों का रुझान इनकी ओर कम है।
दो बेडरुम वाले 25 से 30 लाख रुपये के फ्लैट की मांग सबसे अधिक है, जिसका कॉरपेट एरिया 900 वर्गफीट तक होता है लेकिन शहर में ऐसे आवासों की बहुत कमी है। ज्यादातर फ्लैट 35 से 50 लाख और 55 से 75 लाख रुपये की रेंज में बन रहे हैं जिससे आम लोगों को सस्ते आवास नहीं मिल पा रहे हैं।- इंजीनियर सैयद वसीम अहमद, रियल एस्टेट विशेषज्ञ
शहर के लोगों को उनके पैतृक घरों के आसपास सस्ते मकान और फ्लैट की जरूरत है। महंगे मकान और फ्लैट की मांग कम है। इसी मांग को पूरा करने के लिए अलग-अलग इलाकों में छोटी-छोटी आवासीय योजनाएं तैयार हो रही हैं। ईडब्ल्यूएस और एलआईजी श्रेणी के मकान बहुत कम है।-देवराज सिंह, एडीए बोर्ड सदस्य, पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा।
हर साल 24 हजार का मेंटेनेंस भी बड़ी समस्या
महंगी कॉलोनियों में घर या फ्लैट नहीं लेने की एक बड़ी वजह हर महीने वसूला जाने वाला मेंटेनेंस शुल्क है। जो इस वक्त लगभग 1500 से 2500 रुपये महीने तक पहुंच गया है। घर लेने वाला परिवार चाहता है कि वह इससे मुक्त रहे। सरकारी स्तर की योजनाओं में यह शुल्क देय नहीं होता है, इसलिए भी उन भवनों की मांग अधिक है।
ईडब्ल्यूएस के झंझट से बचने के लिए बनाते हैं छोटी कॉलोनी
अलीगढ़ में अधिकांश रियल एस्टेट कारोबारी चार हेक्टेयर से कम भूमि पर कॉलोनी बनाते हैं। इतने कम क्षेत्रफल में ईडब्ल्यूएस और एलआईजी बनाने की शर्त लागू नहीं होती है, इसलिए सस्ते मकानों का निर्माण नहीं हो पा रहा है। रियल एस्टेट कारोबारी ईडब्ल्यूएस और एलआईजी के झंझट में पड़ना ही नहीं चाहता, क्योंकि इसके आवंटन में भी कई सरकारी शर्तें लागू होती हैं और सिफारिशें लगती हैं।
समाधान : दस योजनाओं पर काम जारी
अलीगढ़। एडीए बोर्ड की बैठक में वीसी कुलदीप मीणा ने बताया कि इन्हीं सस्ते घरों की मांग को पूरा करने के लिए शहर में खाली पड़ी सरकारी जमीन पर छोटी-छोटी आवासीय योजनाओं को विकसित किया जा रहा है ताकि इस मांग को पूरा किया जाए। जितना संभव होगा उतने सस्ते आवास बनाए जाएंगे। नगर निगम और जिला प्रशासन के सहयोग से खाली पड़ी सरकारी जमीन पर ऐसे ही योजनाएं लाई जाएंगी।
1-ग्रेटर अलीगढ़ योजना में 890 भूखंड बनेंगे। 19,640 वर्गमीटर में ईडब्ल्यूएस और एलआईजी आवास बनेंगे। लेआउट मंजूर, काम आगे बढ़ रहा।
2-स्वर्णजंयती नगर विस्तार योजना में 450 नए फ्लैट बनेंगे। 250 फ्लैट आम लोगों के लिए, 200 पुराने आवंटियों के लिए रखे जाएंगे।
3-किशनपुर में छह हेक्टेयर में आवासीय योजना विकसित की जाएगी। इसमें कुछ दुकानें और कॉमर्शियल स्थान भी होगा।
4-बरौला जाफराबाद पर 90 करोड़ की लागत से सूत मिल हाईट्स प्रोजेक्ट का लेआउट जल्द मंजूर होगा। घरों की संख्या अभी तय नहीं है।
5-जमालपुर परियोजना को 25 करोड़ रुपये से विकसित किया जाएगा। ई-टेंडर जारी कर कार्यदेश जारी कर दिए गए हैं।
6-छेरत सुढियाल में आश्रय एकीकृत किफायती आवास टाउनशिप को लगभग आठ हेक्टेयर में विकसित किया जा रहा है।
7-नवीन स्थल चक मंजूरगढ़ी, महरावल और लेखराजपुर गांव की 10 हेक्टेयर भूमि पर सस्ते आवास बनाए जाएंगे।
8-बरौला जाफराबाद की ईडब्ल्यूएस कॉलोनी का पुनर्विकास होगा। 46 लाभार्थी परिवारों को नए घर दिए जाएंगे।
9-गभाना हाईवे के निकट गाटा संख्या 16,17, 22, 23, 29, 30, 31, 32, 52, 53 और 57 में होटल, शॉपिंग माल, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और एडीए का जोनल कार्यालय बनेगा।
10-गुरसिकरनपुर के गाटा संख्या 703 पर लगभग एक हेक्टेयर में कैटल कॉलोनी विकसित की जाएगी।
भवनों की श्रेणी
- ईडब्ल्यूएस : लगभग 30 वर्गमीटर तक।
- एलआईजी : लगभग 30 से 45 वर्ग मीटर।
- एमआईजी : 90 वर्गमीटर या इससे अधिक।
- एचआईजी : 100 वर्गमीटर से बड़े भूखंड।