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LDB: अलीगढ़ में निर्विरोध निर्वाचन तय, जवां में तीन प्रस्तावकों के अपहरण का शोर, शाखा में धक्का-मुक्की

अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Thu, 22 Jan 2026 11:55 AM IST
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सार

अलीगढ़ जिले में एलडीबी के सात चेयरमैन पद हैं, जिन पर पहले से सत्ताधारी भाजपा काबिज है। इस बार भी भाजपा ने सातों पदों पर अपने प्रत्याशी घोषित किए थे। मगर भाजपा की गुटबाजी के बीच दो दिन बाद जवां पर प्रत्याशी बदला गया था, उसी दिन से जवां पर रस्साकशी बनी हुई थी।

Unopposed election for Land Development Bank Chairman in Aligarh
जवां भूमि विका बैंक चेयरमैन के लिए नामांकन करतीं राधा शर्मा - फोटो : संवाद
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश भूमि विकास बैंक लि. के शाखा चेयरमैन के सातों पदों पर भाजपा समर्थित प्रत्याशियों का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है। अलीगढ़ के जवां में भाजपा की गुटबाजी उभरकर सामने आई है। शाम होते होते वहां भी निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया। इस तरह इन सातों की औपचारिक घोषणा नामांकन वापसी की तय समय सीमा के बाद आज होगी।

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अलीगढ़ जिले में एलडीबी के सात चेयरमैन पद हैं, जिन पर पहले से सत्ताधारी भाजपा काबिज है। इस बार भी भाजपा ने सातों पदों पर अपने प्रत्याशी घोषित किए थे। मगर भाजपा की गुटबाजी के बीच दो दिन बाद जवां पर प्रत्याशी बदला गया था, उसी दिन से जवां पर रस्साकशी बनी हुई थी। मंगलवार को नामांकन प्रक्रिया के दिन जवां पर चार नामांकन आए। बाकी पर एक एक नामांकन ही आए थे। बुधवार को नामांकन पत्रों की जांच के बाद जवां पर तीन नामांकन खारिज कर दिए गए। इस तरह सभी सातों पदों पर निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है। अब बृहस्पतिवार को नाम वापसी की प्रक्रिया के बाद निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा होगी। सहायक निबंधक सहकारिता नागेंद्र पाल सिंह के अनुसार एलडीबी की जिले में सात शाखाएं हैं। सातों के चेयरमैन पदों पर एक एक नामांकन रहने के चलते निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है।
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शाखा का नाम प्रत्याशी निर्वाचन तय
अलीगढ़ जयपाल सिंह
जवां राधा शर्मा
इगलास प्रभात कुमार
खैर सत्या सिंह
चंडौस ह्रदेश चौहान
अतरौली कैलाश बहादुर
अकराबाद सतीश कुमार

जवां में तीन प्रस्तावकों के अपहरण का शोर, शाखा में धक्का-मुक्की, छीना शपथपत्र

जवां एलडीबी चेयरमैन पद के लिए जिले के दो सियासी दिग्गजों की प्रतिष्ठा ऐसी दाव पर लगी कि पूरे जिले की नजर गढ़ गई। सुबह प्रस्तावकों के अपहरण के आरोप उछलने के बाद पुलिस हरकत में आ गई। गुटबाजी की खबरें लखनऊ तक पहुंच गईं। हालांकि प्रस्तावक खुद वापस आ गए। उन्होंने नामांकन पर अपने फर्जी हस्ताक्षर का शपथ पत्र दे दिया। इसके बाद शाम को निर्वाचन टीम से एक प्रस्तावक का शपथ पत्र छीनकर धक्का-मुक्की तक कर दी गई। इस मामले में थाने में तहरीर दी गई है। वहीं तीन नामांकन निरस्त किए गए हैं।

जवां पर पहले भाजपा संगठन ने सुरेश शर्मा का नाम घोषित किया था। उसी दिन से जिले के दो सियासी दिग्गजों की प्रतिष्ठा दाव पर लग गई। अगले दिन सुरेश के स्थान पर यहां राधा शर्मा का नाम तय कर दिया गया। मंगलवार को नामांकन में राधा के सामने तीन अन्य नामांकन आ गए। जिनमें एक विनय शर्मा, दूसरा सुरेश शर्मा व तीसरा उनके बेटे ओमप्रकाश का था। सभी ने दो-दो प्रस्तावकों के नाम हस्ताक्षर सहित लिखे। बुधवार को नामांकन पत्रों की जांच होनी थी। उससे पहले सुरेश व ओमप्रकाश के चार में से तीन प्रस्तावक भरत सिंह, फकीर चंद्र व महेंद्र गायब हो गए।

पुलिस को उनके अपहरण की खबर दे दी गई। इस खबर पर हरकत में आई पुलिस ने तलाश शुरू की। मगर दोपहर में तीनों प्रस्ताव ब्लाक मुख्यालय पहुंच गए। उन्होंने खुद अपनी मर्जी से कहीं जाने व सुरेश-ओमप्रकाश के नामांकन पर अपने फर्जी हस्ताक्षर होने का बयान और शपथ पत्र दे दिए। इस पर इनका खेमा बिफर गया। शोर ज्यादा मचा।

इसी बीच ओमप्रकाश के खिलाफ शपथ पत्र देने वाले उनके प्रस्तावक का शपथ पत्र छीन लिया गया। वहां यह कहते हुए धक्कामुक्की निर्वाचन टीम से की गई कि ओमप्रकाश का नामांकन सही है। उसके दोनों प्रस्तावकों के हस्ताक्षर है। उसके खिलाफ किसी का शपथ पत्र नहीं है। सुरेश का नामांकन आप खारिज कर सकते हैं। ओमप्रकाश का नहीं।

आरोप यहां तक है कि इसके बाद कमरे से बाहर महेंद्र संग यह दबाव बनाने के लिए मारपीट तक की गई दबाव बनाया कि वह इस बात का विरोध नहीं करेगा और न ही शोर मचाएगा। तब पुलिस ने हस्तक्षेप कर मामला शांत किया। नामांकन टीम ने भी सिर्फ एक सुरेश का नामांकन पत्र खारिज होने की सूचना बनाकर नोटिस बोर्ड पर चस्पा कर दी।

बात यही नहीं थमी, दोनों खेमों के दिग्गजों के स्तर से लखनऊ तक बात पहुंचाई गई। लखनऊ से फोन घनघनाए तो जिले पर अधिकारी हरकत में आए। जवां के निर्वाचन अधिकारी डीपीओ अजीत सिंह व सहायक निर्वाचन अधिकारी लवकेश को जिला मुख्यालय बुलाया गया। यहां उन्होंने तस्वीर साफ की। इसके बाद सुरेश के अलावा महेंद्र के वीडियो बयान व शपथ पत्र के आधार पर ओमप्रकाश का व नामांकन पत्र में कमियों के आधार पर विनय का नामांकन खारिज किया गया। सिर्फ राधा का नामांकन सही होने की सूचना जारी की गई।

इसके बाद निर्वाचन टीम ने अपने मोबाइल बंद कर लिए। इस संबंध में जवां शाखा के प्रबंधक आनंद राम की ओर से शपथ पत्र छीनने व धक्कामुक्की अभद्रता करने, सही तरीके से नामांकन पत्रों की जांच न करने देने, सरकारी कार्य में बाधा करने के संबंध में अज्ञात के खिलाफ तहरीर दी है। सीओ तृतीय सर्वम सिंह ने बताया कि अपहरण का आरोप झूठा था। वे खुद मर्जी से गए थे। वहीं शाखा प्रबंधक की तहरीर पर कार्रवाई की जा रही है। मामले में तथ्यों व साक्ष्यों के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।

एक ही परिवार से हैं दोनों पक्षों के दावेदार
इस सीट पर लंबे अरसे से ऋषि शर्मा गुट का कब्जा रहा है। जहरीली शराब प्रकरण में ऋषि शर्मा का नाम आने व उनकी पत्नी रेनू शर्मा के निधन के बाद से यह सीट खाली चल रही थी। भाजपा ने शराब प्रकरण में ऋषि शर्मा की छवि खराब होने पर पार्टी ने उनके गुट से दूरी बना ली। इसी क्रम में ऋषि के चचेरे भाई पूर्व मंडल अध्यक्ष ओमप्रकाश शर्मा लालू के पिता सुरेश चंद्र शर्मा को टिकट दिया था। मगर ऋषि ने उनके स्थान पर अपने दूसरे चचेरे भाई ललित की पत्नी राधा शर्मा को पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी घोषित करा दिया। इसमें ऋषि शर्मा खेमे को क्षेत्रीय विधायक और ओमप्रकाश खेमे को सांसद का समर्थन होने की बात सामने आ रही है।

यह पूरा प्रकरण नजर में है। मामले में तथ्यों व साक्ष्यों के आधार कार्रवाई की जाएगी। निर्वाचन टीम अपना काम कर रही है।-संजीव रंजन, डीएम

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