तीन तलाक: बानो के ‘हक’ के सहारे पर्दे पर आई अलीगढ़ की कहानी, शाजिया के सुप्रीम कोर्ट तक के संघर्ष को दिखाया
तीन संतानों के बाद बिना सहमति अब्बास के दूसरे निकाह से खफा शाजिया को अचानक से तीन तलाक दे दिया जाता है। साथ में मासिक खर्चा बंद कर दिया जाता है। इसी मासिक खर्च के लिए शाजिया पहले अलीगढ़ जिला एवं सत्र न्यायालय पर दस्तक देती है।
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इन दिनों सुर्खियां बटोर रही यामी गौतम-इमरान हाशमी अभिनीत फिल्म हक बेशक एक चर्चित किताब बानो भारत की बेटी पुस्तक से प्रेरित है, लेकिन फिल्मकार ने इसे अलीगढ़ की शाजिया से जोड़कर अलीगढ़ की ‘बानो’ के ‘हक’ की आवाज को बुलंद करने का प्रयास किया है। इसमें अलीगढ़ जिला न्यायालय से लेकर हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचकर शाजिया ने कानून के सहारे पति से अपना हक लिया है।
तीन तलाक व महिला को मासिक खर्च के मुद्दे पर बनी इस फिल्म की कहानी अलीगढ़ जिले के गांव सांखनी के हाफिज की बेटी शाजिया और अधिवक्ता अब्बास खान से शुरू होती है। तीन संतानों के बाद बिना सहमति अब्बास के दूसरे निकाह से खफा शाजिया को अचानक से तीन तलाक दे दिया जाता है। साथ में मासिक खर्चा बंद कर दिया जाता है। इसी मासिक खर्च के लिए शाजिया पहले अलीगढ़ जिला एवं सत्र न्यायालय पर दस्तक देती है। वहां से जीतने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट व फिर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ते हुए जीतती है।
अलीगढ़ से जोड़ने का क्या मकसद
प्रमुख शिक्षाविद् व एएमयू से सेवानिवृत्त डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि फिल्मकार इसे किसी काल्पनिक शहर से भी दर्शा सकते थे, लेकिन चूंकि अलीगढ़ से जुड़ा संदेश पूरी दुनिया में जाता है। विषय कुछ भी हो, मगर अलीगढ़ का नाम आते ही लोग उससे जुड़ते हैं। यह शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक व सामाजिक प्रासंगिकता का केंद्र है। राहत अबरार का मानना है कि शायद इसीलिए भी फिल्मकार ने इस फिल्म को अलीगढ़ से जोड़ा है। प्रख्यात कानूनविद् पूर्व डीजीसी एएमयू में कार्यरत डॉ. अबसार किदवई भी यही राय व्यक्त करते हैं।
अलीगढ़ के थानों में दर्ज तीन तलाक रिपोर्ट
- 43 रिपोर्ट 2025 में दर्ज
- 59 रिपोर्ट 2024 में दर्ज
- 140 रिपोर्ट 2023 में दर्ज
- 578 कुल रिपोर्ट 2019 में कानून बनने के बाद से 2015 तक दर्ज