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Prayagraj News: 11 घंटे सर्जरी... 70 फीसदी कैंसरग्रस्त जबड़े को दिया नया जीवन
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स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) में सिद्धार्थनगर निवासी गंगाराम (55) के कैंसरग्रस्त जबड़े को 11 घंटे चली सर्जरी के बाद नया जीवन दिया गया। सर्जरी के बाद मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है।
गंगाराम के निचले जबड़े में पिछले छह माह से कैंसर था। इन्होंने गोरखपुर और वाराणसी के कई अस्पतालों में परामर्श लिया पर उन्हें संतोषजनक समाधान नहीं मिला। बाद में वह स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय पहुंचे। यहां कैंसर सर्जरी विभाग के डॉ. राजुल अभिषेक से परामर्श लिया।
डॉक्टर ने जांच में पाया कि कैंसरग्रस्त जबड़े को निकालकर उसका पुनर्निर्माण करना होगा। यह कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण था। इसके लिए डॉ. राजुल ने प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. मोहित जैन से संपर्क किया। दोनों ने संयुक्त रूप से उपचार की विस्तृत योजना तैयार की। 15 दिन पहले गंगाराम का ऑपरेशन किया गया। इस दौरान कैंसर से प्रभावित जबड़े के हिस्से को पूरी तरह निकाल दिया गया।
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इसके बाद मरीज के पैर की छोटी हड्डी (फिबुला) निकाली गई। इसे माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी की सहायता से जबड़े के स्थान पर प्रत्यारोपित किया गया। यह सर्जरी अत्यंत जटिल थी। ऑपरेशन के बाद मरीज को पांच दिन तक आईसीयू में रखा गया। उपचार के बाद गंगाराम पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर जा चुके हैं।
इस जटिल सर्जरी में प्लास्टिक सर्जन डॉ. यशार्थ शर्मा, एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. शिवेंदु ओझा का विशेष योगदान रहा। चिकित्सकों ने बताया कि भविष्य में पुनर्निर्मित जबड़े में डेंटल इम्प्लांट भी लगाए जाएंगे। इससे मरीज सामान्य जीवन व्यतीत कर सकेगा।
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यह सर्जरी केवल कैंसरग्रस्त जबड़े को निकालने तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीज को उसके चेहरे की संरचना, बोलने, खाने और उनमें आत्मविश्वास लौटाने का प्रयास है। माइक्रोवैस्कुलर तकनीक में शरीर के एक हिस्से की हड्डी और रक्तवाहिनियों को सूक्ष्म स्तर पर जोड़ा जाता है। इस तरह की जटिल सर्जरी कर मेडिकल कॉलेज ने भविष्य में और बड़े ऑपरेशन का रास्ता खोला है। - डॉ. मोहित जैन, विभागाध्यक्ष, प्लास्टिक सर्जरी विभाग, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज
गंगाराम के निचले जबड़े में पिछले छह माह से कैंसर था। इन्होंने गोरखपुर और वाराणसी के कई अस्पतालों में परामर्श लिया पर उन्हें संतोषजनक समाधान नहीं मिला। बाद में वह स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय पहुंचे। यहां कैंसर सर्जरी विभाग के डॉ. राजुल अभिषेक से परामर्श लिया।
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डॉक्टर ने जांच में पाया कि कैंसरग्रस्त जबड़े को निकालकर उसका पुनर्निर्माण करना होगा। यह कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण था। इसके लिए डॉ. राजुल ने प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. मोहित जैन से संपर्क किया। दोनों ने संयुक्त रूप से उपचार की विस्तृत योजना तैयार की। 15 दिन पहले गंगाराम का ऑपरेशन किया गया। इस दौरान कैंसर से प्रभावित जबड़े के हिस्से को पूरी तरह निकाल दिया गया।
इसके बाद मरीज के पैर की छोटी हड्डी (फिबुला) निकाली गई। इसे माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी की सहायता से जबड़े के स्थान पर प्रत्यारोपित किया गया। यह सर्जरी अत्यंत जटिल थी। ऑपरेशन के बाद मरीज को पांच दिन तक आईसीयू में रखा गया। उपचार के बाद गंगाराम पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर जा चुके हैं।
इस जटिल सर्जरी में प्लास्टिक सर्जन डॉ. यशार्थ शर्मा, एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. शिवेंदु ओझा का विशेष योगदान रहा। चिकित्सकों ने बताया कि भविष्य में पुनर्निर्मित जबड़े में डेंटल इम्प्लांट भी लगाए जाएंगे। इससे मरीज सामान्य जीवन व्यतीत कर सकेगा।
यह सर्जरी केवल कैंसरग्रस्त जबड़े को निकालने तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीज को उसके चेहरे की संरचना, बोलने, खाने और उनमें आत्मविश्वास लौटाने का प्रयास है। माइक्रोवैस्कुलर तकनीक में शरीर के एक हिस्से की हड्डी और रक्तवाहिनियों को सूक्ष्म स्तर पर जोड़ा जाता है। इस तरह की जटिल सर्जरी कर मेडिकल कॉलेज ने भविष्य में और बड़े ऑपरेशन का रास्ता खोला है। - डॉ. मोहित जैन, विभागाध्यक्ष, प्लास्टिक सर्जरी विभाग, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज