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Prayagraj News: 20 साल पुराने गैर-इरादतन हत्या के मामले में आरोपी बरी
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जिला अदालत ने 20 साल पुराने गैर-इरादतन हत्या के मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। कहा कि जिस हमले को प्रत्यक्षदर्शी गवाह चाकू और सरिया से किया गया बता रहे थे, उसका समर्थन मेडिकल साक्ष्य नहीं करता। यह टिप्पणी अपर सत्र न्यायाधीश दिवाकर द्विवेदी की अदालत ने की।
मम्फोर्डगंज निवासी दिलीप केसरी के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। मामला 2006 का है। अभियोजन के अनुसार टेंट लगाने को लेकर विवाद के बाद रात में बच्चालाल यादव पर हमला किया गया था। गंभीर रूप से घायल होने पर उन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। पुलिस ने दिलीप के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या के तहत आरोपपत्र दाखिल किया था।
प्रत्यक्षदर्शी गवाहों ने दावा किया कि आरोपी ने चाकू और सरिया से वार किया था। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक ने कहा कि बच्चालाल के शरीर पर धारदार हथियार से कोई चोट नहीं मिली। डॉक्टर के अनुसार चोटें कुंद वस्तु या रगड़ से उत्पन्न हो सकती थीं और शरीर में कोई फ्रैक्चर भी नहीं था।
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अदालत ने कहा कि एफआईआर, गवाहों के बयान और चिकित्सीय रिपोर्ट के बीच कई विरोधाभास हैं। घटना का कोई स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी भी सामने नहीं आया।
मम्फोर्डगंज निवासी दिलीप केसरी के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। मामला 2006 का है। अभियोजन के अनुसार टेंट लगाने को लेकर विवाद के बाद रात में बच्चालाल यादव पर हमला किया गया था। गंभीर रूप से घायल होने पर उन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। पुलिस ने दिलीप के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या के तहत आरोपपत्र दाखिल किया था।
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प्रत्यक्षदर्शी गवाहों ने दावा किया कि आरोपी ने चाकू और सरिया से वार किया था। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक ने कहा कि बच्चालाल के शरीर पर धारदार हथियार से कोई चोट नहीं मिली। डॉक्टर के अनुसार चोटें कुंद वस्तु या रगड़ से उत्पन्न हो सकती थीं और शरीर में कोई फ्रैक्चर भी नहीं था।
अदालत ने कहा कि एफआईआर, गवाहों के बयान और चिकित्सीय रिपोर्ट के बीच कई विरोधाभास हैं। घटना का कोई स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी भी सामने नहीं आया।