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Gyanvapi Case: ज्ञानवापी मामले में बड़ा झटका, गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की याचिका खारिज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 08 Aug 2023 01:12 PM IST
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सार
Gyanvapi Mosque Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की याचिका खारिज कर दी गई है। याचिका में विवादित परिसर में मिले हिन्दू प्रतीक चिन्हों को संरक्षित रखने की मांग भी की गई थी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट और ज्ञानवापी
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
वाराणसी स्थित ज्ञानवापी परिसर में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग वाली जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट में यह याचिका राखी सिंह व अन्य की तरफ से दाखिल की गई थी। इस पर मुख्य न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सुनवाई की।
इस जनहित याचिका में मांग की गई थी कि श्रृंगार गौरी केस में जब तक वाराणसी जिला अदालत का फैसला नहीं आ जाता तब तक परिसर में गैर हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाए और ज्ञानवापी परिसर में मिले हिंदू प्रतीक चिन्हों को संरक्षित रखने का आदेश दिया जाए।
जनहित याचिका में कहा गया था कि वाराणसी में श्री आदि विश्वेश्वर मंदिर (वर्तमान ज्ञानवापी परिसर) के सदियों पुराने अवशेषों को बचाना है। दावा किया गया था कि विवादित स्थल (सेटलमेंट प्लॉट नंबर 9130 वार्ड और दशाश्वमेघ वाराणसी) पर एक भव्य मंदिर हुआ करता था, जहां भगवान शिव ने स्वयं ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी।
1669 में औरंगजेब ने नष्ट कराया था मंदिर
सन् 1669 में मुस्लिम शासक औरंगजेब ने इस मंदिर को नष्ट कर दिया था। कहा गया है कि उक्त मंदिर को नष्ट करने के बाद मुसलमानों ने अनधिकृत रूप से मंदिर परिसर में अतिक्रमण किया और एक संरचना बनाई जो कि कथित ज्ञानवापी मस्जिद है।
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इस जनहित याचिका में मांग की गई थी कि श्रृंगार गौरी केस में जब तक वाराणसी जिला अदालत का फैसला नहीं आ जाता तब तक परिसर में गैर हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाए और ज्ञानवापी परिसर में मिले हिंदू प्रतीक चिन्हों को संरक्षित रखने का आदेश दिया जाए।
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जनहित याचिका में कहा गया था कि वाराणसी में श्री आदि विश्वेश्वर मंदिर (वर्तमान ज्ञानवापी परिसर) के सदियों पुराने अवशेषों को बचाना है। दावा किया गया था कि विवादित स्थल (सेटलमेंट प्लॉट नंबर 9130 वार्ड और दशाश्वमेघ वाराणसी) पर एक भव्य मंदिर हुआ करता था, जहां भगवान शिव ने स्वयं ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी।
1669 में औरंगजेब ने नष्ट कराया था मंदिर
सन् 1669 में मुस्लिम शासक औरंगजेब ने इस मंदिर को नष्ट कर दिया था। कहा गया है कि उक्त मंदिर को नष्ट करने के बाद मुसलमानों ने अनधिकृत रूप से मंदिर परिसर में अतिक्रमण किया और एक संरचना बनाई जो कि कथित ज्ञानवापी मस्जिद है।