Allahabad High Court : 12 साल बाद भी फ्लैट न मिलने पर हाईकोर्ट सख्त, दो माह में निर्णय का निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 साल बीत जाने के बाद भी फ्लैट का कब्जा न मिलने के मामले में संबंधित प्राधिकारी को दो माह के भीतर कब्जे से जुड़ी अर्जी पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 साल बीत जाने के बाद भी फ्लैट का कब्जा न मिलने के मामले में संबंधित प्राधिकारी को दो माह के भीतर कब्जे से जुड़ी अर्जी पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने दीपक कौशिक की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
मामला ग्रेटर नोएडा एनसीआर मोनार्क परियोजना के टॉवर-1 स्थित फ्लैट से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि 2014 में फ्लैट बुक करने के बाद से उन्होंने 30,55,253 रुपये जमा कर दिए, जो देय राशि का अधिकांश हिस्सा है, लेकिन अब तक उन्हें कब्जा नहीं मिला। इस संबंध में 13 जनवरी 2020 को प्राधिकरण ने फ्लैट का ऑक्यूपेंसी प्रमाणपत्र जारी कर भौतिक कब्जा देने का निर्देश दिया था। आठ फरवरी 2020 को प्रवर्तक को उक्त आदेश का पालन करने और स्पष्टीकरण देने को कहा गया, अन्यथा 55 लाख रुपये का दंड लगाने की चेतावनी दी गई।
प्राधिकरण ने आदेशों के पालन न होने पर चार अगस्त 2021 को जमा पूरी राशि ब्याज (एमसीएलआर+1 प्रतिशत प्रतिवर्ष) सहित लौटाने का निर्देश दिया। जिसके संबंध में सात दिसंबर 2021 को वसूली प्रमाणपत्र जारी हुआ। इसके बाद याचिकाकर्ता ने 2023 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिस पर आठ मई 2023 को कोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी को वसूली प्रमाणपत्र निष्पादित करने का निर्देश दिया थायाचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि परियोजना पूर्ण हो चुकी है, ऑक्यूपेंसी प्रमाणपत्र जारी हो चुका है और 40 से अधिक फ्लैटों का कब्जा दिया जा चुका है, लेकिन उन्हें अब तक कब्जा नहीं मिला।
कोर्ट ने कहा कि परियोजना के पुनर्जीवित होने और निर्माण पूर्ण होने की स्थिति में संबंधित प्राधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकते। कोर्ट ने संबंधित अधिकारी को अंतरिम परमादेश जारी करते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के कब्जे संबंधी आवेदन पर आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किए जाने की तिथि से दो माह के भीतर निर्णय लिया जाए। साथ ही मामले की अगली सुनवाई 12 मई 2026 को शीर्ष दस वादों में सूचीबद्ध की गई है।