High Court : 43 साल पुराने डकैती मामले में जीवित बचे तीन अरोपी दोषमुक्त, 1983 में सुनाई गई थी सात साल की सजा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 43 साल पुराने डकैती के मामले में जीवित बचे तीन आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकलपीठ ने अली हसन और अन्य की अपील पर दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 43 साल पुराने डकैती के मामले में जीवित बचे तीन आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकलपीठ ने अली हसन और अन्य की अपील पर दिया है। बदायूं के थाना उझानी में 1982 में धनपाल के घर में डकैती की वारदात हुई। उन्होंने गांव के सात लोगों के खिलाफ तहरीर दी। आरोप लगाया कि डकैती में तीन हजार रुपये नगद सहित सोने-चांदी के जेवर लूट ले गए।
ट्रायल कोर्ट ने 1983 में सभी सात आरोपियों को दोषी ठहराते हुए पांच से सात साल की सजा सुनाई। इसके खिलाफ सभी ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी। अपील लंबित रहने के दौरान चार अपीलकर्ताओं (नारायण, नन्हे, ओंकार व मेहंदी) की मौत हो गई। इसके चलते उनकी अपील को 2019 में समाप्त कर दी गई। शेष बचे अली हसन, हरपाल व लतूरी की अपील पर सुनवाई हुई।
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि गवाहों के बयानों में हथियारों और घटनाक्रम को लेकर विसंगतियां हैं। एक गवाह ने चाकू से चोट लगने की बात कही है। जबकि मेडिकल रिपोर्ट में चोट किसी कठोर और कुंद वस्तू से लगने की पुष्टि हुई है। यह भी अविश्वसनीय है कि गांव के रहने वाले लोग बिना चेहरा ढके पड़ोसियों के घर डकैती डालने जाएंगे। विवेचना अधिकारी ने न गोली के खोखे बरामद किए और न ही लूटे गए माल की ही बरामदगी की। अन्य कई टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने अपील को स्वीकार करते हुए अली हसन, हरपाल व लतूरी को बरी कर दिया।