Prayagraj News : शंकरगढ़ में तेजी से कैंसर फैलने का दावा, एक गांव में मिले 15 मरीज
Prayagraj News : जिले के पहाड़ी क्षेत्र शंकरगढ़ विकास खंड में कैंसर की बीमारी तेजी से फैलने की बात सामने आ रही है। एक गांव में पिछले दो-तीन वर्षों में 15 कैंसर रोगी चिह्नित किए गए हैं। इसमें से 13 की मौत हो चुकी है। इसके पीछे पेयजल में आवश्यक तत्वों की कमी की बात सामने आई है।
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विकास खंड शंकरगढ़ में कैंसर की बीमारी तेजी से फैलने की बात सामने आ रही है। एक गांव में पिछले दो-तीन वर्षों में 15 कैंसर रोगी चिह्नित किए गए हैं। इसमें से 13 की मौत हो चुकी है। जन सुनवाई के दौरान मामला सामने आने पर डीएम मनीष कुमार वर्मा ने भूजल की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
विकासखंड शंकरगढ़ की सीमाएं बुंदेलखंड के पाठा से लगती हैं। इस क्षेत्र के पेयजल में आवश्यक तत्वों की कमी बताई जाती है। शंकरगढ़ की ग्राम पंचायत पहाड़ी कला के निवासी एवं अधिवक्ता प्रवीण कुमार सिंह, पुष्पराज तिवारी, रामसजीवन सिंह व अन्य ग्रामीणों ने जन सुनवाई के दौरान डीएम से बताया कि गांव में बीते दो-तीन वर्षों में कैंसर के 15 मरीज चिह्नित हुए हैं जिनमें से 13 की मौत हो चुकी है।
जिनकी मौत हुई है, उनमें प्रवीण कुमार सिंह के चाचा भी शामिल हैं। यह तो मात्र एक गांव का उदाहरण है। ग्रामीणों का दावा है कि पहाड़ी कला के अगल-बगल में स्थित नौढि़या उपरहार, देउरी बेनी, सीध टिकट, जूही, सुरबल, जनवा, आम गोदर, छिपिया आदि गांवों में भी कैंसर के रोगी पाए गए हैं। इस मामले को डीएम ने गंभीरता से लेते हुए तीन सदस्यीय टीम गठित कर 15 दिनों में जांच रिपोर्ट तलब की है।
पानी में आर्सेनिक मिलने का दावा
ग्रामीणों ने अपने स्तर पर एक निजी प्रयोगशाला में पानी की जांच कराई थी। इस जांच में पानी में आर्सेनिक, सोडियम और पोटैशियम जैसे तत्व मिले। ग्रामीणों का कहना है कि आर्सेनिक से कैंसर की बीमारी होती है। शंकरगढ़ में सिलिका रेत की पहाड़ियां हैं। वहां इसका खनन भी होता है। ग्रामीणों को आशंका है कि हवा और भूजल के माध्यम से सिलिका तत्व मानव शरीर में प्रवेश कर रहा है। यह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को जन्म दे रहा है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को बताया कि पथरीली संरचना के कारण बरसात का जल पत्थर से क्रिया कर जहरीला हो जाता है।
जल निगम, भूगर्भ जल व प्रदूषण नियंत्रण को सौंपी जांच
जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने इस मामले में तीन विभागों को जांच सौंपी है। उन्होंने अधिशासी अभियंता जल निगम (ग्रामीण), हाइड्रोलॉजिस्ट भूगर्भ जल विभाग और क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रक अधिकारी को निर्देश दिए। इन अधिकारियों को पेयजल के नमूने लेकर उच्च स्तरीय प्रयोगशाला में परीक्षण कराना है। कमियों को दूर करने के लिए संयुक्त रूप से सघन जांच करनी होगी। उन्हें 15 दिनों में विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध करानी है।
सिलिका से होता है फेफड़े का कैंसर : डॉ. मानस दुबे
कमला नेहरू मेमोरियल अस्पताल में मेडिसिन ऑन्कोलॉजी डॉ. मानस दुबे बताते हैं कि आर्सेनिक से कैंसर का खतरा अधिक होता है। वहीं, हवा में मिले सिलिका के कण सांस के जरिये शरीर में जाने से फेफड़े का कैंसर होता है। अगर पानी के जरिये यह शरीर के अन्य अंगों तक पहुंचा तो लिवर व आंत का कैंसर भी हो सकता है।
पानी में आर्सेनिक, सिलिका की जांच पर होना चाहिए फोकस
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रयोगशाला में पानी की जांच के दौरान आर्सेनिक, सिलिका, सेलेनियम जैसे तत्वों पर विशेष फोकस होना चाहिए। खून, हवा, पानी, मिट्टी के नमूनों की जांच कर उनका तुलनात्मक अध्ययन किया जाना चाहिए। पेस्टीसाइड की जांच भी होनी चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि एक गांव में कैंसर के 15 मरीज मिलना गंभीर संकेत हैं।
शंकरगढ़ के ग्रामीणों ने प्रार्थना पत्र देकर बताया है कि कैंसर की बीमारी तेजी से बढ़ी है। ग्रामीणों के अनुसार पेयजल शुद्ध न होने के कारण यह समस्या है। इसी वजह से तीन विभागों को पेयजल की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। - मनीष कुमार वर्मा, जिलाधिकारी