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Prayagraj : लोकसेवक के आदेश की अवज्ञा में जेल जाने वाले सेनानी सम्मान राशि के हकदार नहीं
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 14 May 2026 04:02 PM IST
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सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आपातकाल के दौरान आईपीसी की धारा 188 (लोक सेवक के आदेश की अवज्ञा) के तहत जेल जाने वाले लोग ''लोकतंत्र सेनानी'' की श्रेणी में नहीं आते हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आपातकाल के दौरान आईपीसी की धारा 188 (लोक सेवक के आदेश की अवज्ञा) के तहत जेल जाने वाले लोग ''लोकतंत्र सेनानी'' की श्रेणी में नहीं आते हैं। वह सम्मान राशि पाने के हकदार नहीं हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने पीलीभीत निवासी राखन लाल और सात अन्य की ओर से दायर याचिका पर दिया है।
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याचियों ने जिला मजिस्ट्रेट पीलीभीत के समक्ष आवेदन कर उन्हें लोकतंत्र सेनानी मानने और सम्मान राशि देने की मांग की। याचियों का दावा था कि वो आपातकाल के दौरान जेल गए थे। ऐसे में उन्हें लोकतंत्र सेनानी माना जाए। डीएम ने उनके आवेदन को खारिज कर दिया। कहा कि याचियों को आपातकाल के दौरान लोक सेवक के आदेश की अवज्ञा करने के आरोप में जेल भेजा गया था, न कि राजनीतिक आधार पर। इस फैसले को याचियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि उत्तर प्रदेश लोकतंत्र सेनानी सम्मान अधिनियम, 2016 की धारा 2(ए) के तहत लोकतंत्र सेनानी वही व्यक्ति माना जा सकता है जो उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी हो। साथ ही आपातकाल (25 जून 1975 से 21 मार्च 1977) के दौरान राजनीतिक आधार पर मीसा (मीसा) या डीआईआर के तहत जेल में निरुद्ध रहा हो। कोर्ट ने पाया कि याचियों को मीसा या डीआईआर के तहत गिरफ्तार नहीं किया गया था, बल्कि उन्हें धारा 188 के तहत जेल भेजा गया था। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।