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Gyanvapi Case : मस्जिद में सिर्फ याची को नमाज पढ़ने की थी अनुमति, अन्य मुस्लिमों को नहीं

Tue, 17 May 2022 03:35 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 17 May 2022 03:35 AM IST
सार

इसके पहले सुनवाई शुरू होते हुए वाराणसी की जिला अदालत के आदेश पर ज्ञानवापी मस्जिद के हो रहे सर्वे और सर्वे को लेकर को हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों से स्थिति जाननी चाही। कोर्ट को बताया गया कि सर्वे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर मंगलवार को सुनवाई होगी।

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gyanvapi mosque dispute: Only the petitioner was allowed to offer Namaz in the mosque, not other Muslims
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ज्ञानवापी मस्जिद और विश्वेवश्वर नाथ मंदिर विवाद मामले में सोमवार को भी इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई जारी रही। करीब एक घंटे तक चली सुनवाई में केवल मंदिर पक्ष की ओर से तथ्य पेश किए गए। मंदिर पक्ष के अधिवक्ता का कहना था कि मस्जिद में सिर्फ याची को नमाज पढ़ने की अनुमति कोर्ट ने दी थी, अन्य मुसलमानों को नहीं। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 20 मई की तिथि निर्धारित की है। उस दिन याची पक्ष यानी अंजुमन इंतजामिया अपना पक्ष प्रस्तुत करेगी।

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इसके पहले सुनवाई शुरू होते हुए वाराणसी की जिला अदालत के आदेश पर ज्ञानवापी मस्जिद के हो रहे सर्वे और सर्वे को लेकर को हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों से स्थिति जाननी चाही। कोर्ट को बताया गया कि सर्वे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर मंगलवार को सुनवाई होगी। जबकि, निचली अदालत के आदेश पर सोमवार को भी सर्वे का काम हुआ। मंदिर पक्ष की ओर से अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी पेश हुए। उन्हाेंने बताया कि ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे में एक बड़ा शिवलिंग मिला है। निचली अदालत ने उस एरिया को सील करा दिया है। 

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काशी विश्वनाथ - फोटो : अमर उजाला

समयाभाव के चलते वक्फ बोर्ड के अधिवक्त नहीं रख सके पक्ष
अधिवक्ता ने तर्क दिया कि  सन 1936 में दीन मोहम्मद, मोहम्मद हुसैन व मोहम्मद जकारिया ने बनारस की अधीनस्थ अदालत में वाद दायर किया था। इसमें मौजा शहर खास, परगना देहात अमानत, बनारस गाटा संख्या 9130,  एक बीघा नौ बिस्वा छह धूर, चबूतरा, पेड़, पक्का कुआं आदि को वक्फ संपत्ति घोषित करने और अलविदा नमाज पढ़ने अनुमति देने का अनुरोध किया गया था। अधिवक्ता के मुताबिक कोर्ट ने दावा साबित नहीं कर पाने के कारण यह वाद खारिज कर दिया था।

इसके खिलाफ हाईकोर्ट में प्रथम अपील दायर हुई। उसमें केवल याची को नमाज पढ़ने की राहत मिली थी, जिसका फायदा दूसरा कोई नहीं उठा सकता। वह आदेश सामान्य मुसलमानों के लिए नहीं है। इसलिए वक्फ संपत्ति हिंदुओं के विरुद्ध नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा कि याची पक्ष सुप्रीम कोर्ट के जिन पांच जजों की पीठ के फैसले पर भरोसा कर रहा है, जबकि राम जन्म भूमि वाले मामले में सात जजों की पीठ का फैसला ज्यादा महत्वपूर्ण है। ज्ञानवापी मस्जिद विवाद में वह अधिक प्रभावी है। 

मंदिर पक्ष की ओर से तर्क दिए जाने के बाद मामले में वक्फ बोर्ड की ओर से भी पेश हुए अधिवक्ता एसएएफ नकवी ने अपना पक्ष रखना चाहा, लेकिन समय की कमी को देखते हुए कोर्ट ने उनकी बहस को नहीं सुना और 20 मई की तिथि तय कर दी। कोर्ट ने कहा कि  मामले में आगे की सुनवाई पर वक्फ बोर्ड के पक्ष को पहले सुना जाएगा। इसके बाद मंदिर पक्ष की बाकी बहस को पूरा सुना जाएगा। 

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