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UP : ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई टली, कोर्ट ने यह दिया हवाला

Mon, 13 Jul 2026 12:35 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 13 Jul 2026 12:35 PM IST
सार

High Court Allahabad : इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकल पीठ ने प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई छह हफ्ते के लिए टाल दी है। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने कहा कि लखनऊ की खंडपीठ के समक्ष समान मामले की सुनवाई चल रही है। ऐसी दशा में इस स्तर पर हाइकोर्ट की एकल पीठ में सुनवाई संभव नहीं है।

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Hearing on plea to appoint village heads as administrators adjourned; Court cites this reason.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकल पीठ ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के मामले की याचिका की सुनवाई को छह सप्ताह के लिए टाल दिया है। मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने कहा कि इस समान मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में दो जजों की पीठ कर रही है। ऐसी दशा में इस स्तर पर हाइकोर्ट की एकल पीठ में सुनवाई संभव नहीं है।

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बता दें कि पिछली सुनवाई पर न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने अरविंद राठौर की याचिका पर सुनवाई करते हुए 25 मई 2026 और 26 मई 2026 के उन सरकारी आदेशों को 'गैर-मौजूद' (असंवैधानिक) करार दिया, जिनसे चुनाव टाले गए थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये आदेश अधिनियम, 1947 की धारा 12 (3-ए) के तहत पारित किए गए थे, जिसे 'प्रमोद लाल पटेल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य' मामले में उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने पहले ही असंवैधानिक घोषित कर दिया था।
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न्यायालय ने जोर दिया था कि संविधान के अनुच्छेद 243 ई और 243 (के) के तहत पंचायतों का कार्यकाल पांच साल का निश्चित होता है और चुनाव समय पर होने चाहिए। राज्य सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट लंबित होने को देरी का कारण बताया, जिस पर कोर्ट ने हैरानी जताई कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद ओबीसी आयोग ने अब तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है। राज्य चुनाव आयोग ने बताया कि मतदाता सूची 10 जून 2026 को प्रकाशित हो चुकी है और वे चुनाव कराने के लिए तैयार हैं, लेकिन राज्य सरकार से आवश्यक लॉजिस्टिक्स न मिलने के कारण चुनाव में बाधा आ रही है।

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