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High Court : बैंक ऋण चुकाने के बाद हाईकोर्ट ने रद्द की 22 साल पुरानी आपराधिक कार्यवाही
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 23 Jan 2026 04:35 PM IST
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सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद कोतवाली पुलिस थाने में दर्ज 22 साल पुराने मामले की आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। कहा कि आवेदकों ने पूरा बकाया ऋण चुका दिया है।
अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद कोतवाली पुलिस थाने में दर्ज 22 साल पुराने मामले की आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। कहा कि आवेदकों ने पूरा बकाया ऋण चुका दिया है। इसलिए आगे की आपराधिक कार्यवाही से कोई लाभकारी उद्देश्य पूरा नहीं होगा। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव भारती की एकल पीठ ने दिया है।
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मामला 2004 का है, जब बैंक ने सोमदत्त शर्मा व अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न आरोपों में एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप था कि आरोपियों ने बैंक अधिकारियों से मिलीभगत कर जाली दस्तावेज के आधार पर खाते खोले और धोखाधड़ी से ऋण दिलवाए, जिससे बैंक को भारी आर्थिक क्षति हुई। आरोपियों ने मुकदमे की कार्यवाही रद्द करने की मांग में अर्जी दायर की।
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याची अधिवक्ता अपूर्व हजेला ने दलील दी कि बैंक ने स्वयं 2010 में एक जांच समिति गठित की थी, जिसने मामले के समझौते का प्रस्ताव रखा। बैंक ने 2011 में अदालत में भी समझौते का आवेदन दिया था। आवेदकों ने 11 अप्रैल 2012 तक फर्म का पूरा बकाया चुका दिया, जिसे बैंक ने भी स्वीकार किया। बैंक के वकील ने भी इस तथ्य को स्वीकार किया कि पूरा ऋण वसूल हो चुका है। इस पर कोर्ट ने गाजियाबाद के सिविल जज (सीनियर डिविजन) तृतीय में लंबित मुकदमे की समूची कार्यवाही रद्द कर दी है।
