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High Court : हत्या में उम्रकैद की सजा पांच साल के कारावास में बदली, 72 वर्षीय आरोपी ने दायर की थी अपील
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 23 Mar 2026 12:47 PM IST
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सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1984 में बांदा में हुई दोहरी हत्या में आरोपी कल्लू सिंह की उम्रकैद की सजा पांच साल में बदल दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1984 में बांदा में हुई दोहरी हत्या में आरोपी कल्लू सिंह की उम्रकैद की सजा पांच साल में बदल दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने दिया है। यह मामला अप्रैल 1984 की मध्यरात्रि का है। बांदा के पैलानी थाना क्षेत्र में ग्राम लसरा में भगत सिंह के घर में आरोपी घुस गए थे। भगत सिंह की बेटी रेखा और पत्नी चंदा देवी छत पर सो रही थीं। आहट होने पर रेखा ने शोर मचाया तो बगल के घर से उनके चाचा कृष्णलाल टॉर्च लेकर पहुंचे।
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हमलावरों ने गोलीबारी कर दी, जिससे 12 वर्षीय रेखा की मौके पर ही मौत हो गई। कृष्णलाल गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इलाज के दौरान अस्पताल में उन्होंने भी दम तोड़ दिया। ट्रायल कोर्ट ने 19 अक्तूबर 1985 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ कल्लू ने हाईकोर्ट में अपील दायर की।
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मुकदमे के दौरान कृष्णलाल का मृत्युपूर्व बयान इस केस में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हुआ। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मजिस्ट्रेट के सामने बयान में उन्होंने कल्लू सिंह को मुख्य हमलावर के रूप में पहचाना था। हालांकि, बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि गर्दन पर गंभीर चोट से कृष्णलाल बोलने की स्थिति में नहीं थे। इस पर कोर्ट ने डॉक्टर की गवाही और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर इस बयान को विश्वसनीय माना।
हाईकोर्ट ने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष ने कल्लू सिंह के खिलाफ दोष साबित कर दिया है, लेकिन घटना की परिस्थितियों और समय के लंबे अंतराल को देखते हुए सजा में नरमी बरती जानी चाहिए। घटना के समय आरोपी की उम्र 30 वर्ष थी। वर्तमान में वह 72 वर्ष का है। कोर्ट ने सजा कम कर उसे तत्काल आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है।