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High Court : कोई किसी विशिष्ट जाति का जांच अधिकारी नियुक्त करने की मांग नहीं कर सकता
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 17 Apr 2026 05:26 PM IST
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सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कोई भी व्यक्ति यह मांग नहीं कर सकता कि उसके मामले की जांच किसी विशिष्ट जाति या उसकी पसंद के अधिकारी से कराई जाए।
कोर्ट का आदेश।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कोई भी व्यक्ति यह मांग नहीं कर सकता कि उसके मामले की जांच किसी विशिष्ट जाति या उसकी पसंद के अधिकारी से कराई जाए। शिकायतकर्ता ने विरोध याचिका दायर कर अनुसूचित जाति समुदाय का पुलिस अधिकारी नियुक्त करने की मांग की, यह प्रथम दृष्टया कानून के विपरीत और प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
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यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद की एकल पीठ ने जालौन की गायत्री और तीन अन्य की याचिका पर की। मामला 2013 के एक विवाद से जुड़ा है, जिसमें पुलिस ने जांच के बाद अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। इसके बावजूद विपक्षी नरेश कुमार ने विरोध याचिका दायर की, जिसमें न केवल जांच अधिकारियों पर पक्षपात के आरोप लगाए गए, बल्कि एक विशिष्ट समुदाय के अधिकारी से नए सिरे से जांच कराने की भी प्रार्थना की।
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ट्रायल कोर्ट ने इस विरोध याचिका को शिकायत के रूप में दर्ज कर अपीलकर्ताओं को समन जारी कर दिया था। गायत्री और तीन अन्य ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता ने अनुचित तरीके से विरोध याचिका दायर की। वह अपनी पसंद के अधिकारियों से जांच कराने की मांग कर रहा था, यह अस्वीकार्य है। अदालत ने यह भी गौर किया कि इस मामले में आईपीसी की धारा 452 और एससी/एसटी एक्ट की की धारा एक साथ लागू होती प्रतीत नहीं हो रही हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट, जालौन के समक्ष लंबित वाद की पूरी कार्यवाही पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 30 अप्रैल 2026 की तिथि निर्धारित की है।
