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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court Order refusing to register a case against Allahabad University Professor Rakesh Singh set aside.

High Court : इलाहाबाद विवि के प्रोफेसर राकेश सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने से इन्कार वाला आदेश रद्द

Fri, 31 Jul 2026 04:56 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 31 Jul 2026 04:56 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इविवि के प्रोफेसर राकेश सिंह के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने से इन्कार करने वाले विशेष न्यायाधीश के फैसले को रद्द कर दिया है। साथ ही मामले को दोबारा सुन कर नया आदेश पारित करने का आदेश दिया है।

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High Court Order refusing to register a case against Allahabad University Professor Rakesh Singh set aside.
अदालत का आदेश - फोटो : istock

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इविवि के प्रोफेसर राकेश सिंह के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने से इन्कार करने वाले विशेष न्यायाधीश के फैसले को रद्द कर दिया है। साथ ही मामले को दोबारा सुन कर नया आदेश पारित करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति जय प्रकाश तिवारी की एकल पीठ ने आइसा के पूर्व अध्यक्ष विवेक कुमार की अपील स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज करना पुलिस का कर्तव्य है और इस स्तर पर आरोपों की सत्यता की जांच नहीं की जा सकती।

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घटना 17 अक्टूबर 2023 की है। याची विवेक कुमार का आरोप है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान तत्कालीन चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर राकेश सिंह ने उनको जातिसूचक गालियां दीं साथ ही लाठी से मारपीट भी की। शिकायत के बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की, जिसके बाद उन्होंने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत जिला न्यायालय में विशेष अदालत का दरवाजा खटखटाया। विशेष अदालत ने 18 फरवरी 2024 को मामला संदिग्ध बताते हुए अर्जी खारिज कर दी थी। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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हाईकोर्ट ने कहा कि विशेष अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार किए बिना आदेश पारित किया, जो न्यायिक विवेक के अभाव को दर्शाता है। अदालत ने आदेश रद्द कर मामला नए सिरे से सुनवाई के लिए विशेष अदालत को भेज दिया और तीन माह में तर्कसंगत आदेश पारित करने का निर्देश दिया। साथ ही एससी/एसटी एक्ट की धारा चार के तहत लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई पर भी विचार करने को कहा है।

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