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हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी : राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी भी नहीं झकझोर सकी समाज को
Wed, 22 Jul 2026 04:46 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 22 Jul 2026 04:46 PM IST
सार
हमीरपुर मामले की सुनवाई के दौरान ही न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने भ्रष्टाचार पर तल्ख टिप्पणी की। कहा कि भारत ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की 2025 की रिपोर्ट में 182 देशों के बीच 91वें स्थान पर है, लेकिन यह स्थिति देश को शर्मिंदा नहीं कर पा रही है।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
हमीरपुर मामले की सुनवाई के दौरान ही न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने भ्रष्टाचार पर तल्ख टिप्पणी की। कहा कि भारत ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की 2025 की रिपोर्ट में 182 देशों के बीच 91वें स्थान पर है, लेकिन यह स्थिति देश को शर्मिंदा नहीं कर पा रही है। दशकों से आम भारतीय ने भ्रष्टाचार को सामान्य मान लिया है। अब इसे तब तक गलत नहीं मान रहे, जब तक व्यक्ति पकड़ा न जाए।
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न्यायमूर्ति ने कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी से जुड़ा हालिया विवाद भी समाज को नहीं झकझोर सका। यदि राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र पर चढ़ावे की चोरी भी लोगों में शर्म या आत्ममंथन पैदा नहीं करती तो यह भारतीय समाज की ईमानदारी के सबसे निचले स्तर को दर्शाता है। नगर प्राधिकरणों और अधिकारियों की बेईमानी के कारण नियमों के विरुद्ध मकान बन जाते हैं
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न्यायमूर्ति श्रीधरन ने कहा कि सामूहिक ईमानदारी के अभाव का प्रभाव नगर निकायों समेत सभी संस्थाओं पर दिखाई देता है। नगर प्राधिकरणों और अन्य अधिकारियों की बेईमानी के कारण ऐसे मकान बन जाते हैं, जो नगर निगम के नियमों के अनुरूप नहीं होते। अदालत ने कहा कि बिल्डरों से रिश्वत लेकर अवैध निर्माणों और नियमों के उल्लंघन पर आंखें मूंद ली जाती हैं। बाद में ऐसे मकान खरीदने वाले लोगों को वर्षों बाद कानून लागू होने पर बेदखली और मकान ढहाए जाने की कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।
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