UP : भरण-पोषण मामले में आदेशों का कितना पालन किया गया, हाईकोर्ट ने एक माह के भीतर मांगी रिपोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूछा कि भरण-पोषण मामलों में आदेशों का कितना पालन किया गया है। कोर्ट ने इसकी एक माह के भीतर प्रदेश के सभी परिवार न्यायालयों से रिपोर्ट मांगी है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की एकल पीठ ने आजमगढ़ निवासी महिला की याचिका पर दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूछा कि भरण-पोषण मामलों में आदेशों का कितना पालन किया गया है। कोर्ट ने इसकी एक माह के भीतर प्रदेश के सभी परिवार न्यायालयों से रिपोर्ट मांगी है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की एकल पीठ ने आजमगढ़ निवासी महिला की याचिका पर दिया है।
याचिका में आरोप है कि आजमगढ़ के परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश ने 11 जुलाई 2025 को पति को सीआरपीसी की धारा-125 (अब बीएनएसएस की धारा 144) के तहत 4000 रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। पति ने अब तक केवल 5000 रुपये ही जमा किए, जबकि बकाया राशि एक लाख रुपये से अधिक हो गई है।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि प्रधान न्यायाधीश ने आवेदन की तिथि से भुगतान करने का आदेश दिया था पर पति ने अब तक केवल पांच हजार रुपये दिए हैं। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि पति बकाया राशि का 50 प्रतिशत जमा करने के लिए तैयार है। साथ ही नियमित भरण-पोषण की राशि का भुगतान करेगा।
कोर्ट ने पति को एक माह में 50 प्रतिशत बकाया जमा करने का आदेश दिया। साथ ही शेष राशि अगले एक माह में जमा करने का आदेश दिया। चेतावनी भी दी है कि आदेश का पालन न करने पर पति को सिविल जेल जाना पड़ सकता है। संपत्ति कुर्क कर नीलामी की जाएगी। साथ ही बकाया राशि छह प्रतिशत ब्याज के साथ वसूल होगी। कोर्ट ने आदेशों को लेकर आजमगढ़ के परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के साथ ही प्रदेश के सभी परिवार न्यायालयों के न्यायाधीशों से विवरण एक माह में मांगा है। 27 अप्रैल को मामले की सुनवाई होगी।