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माघ मेला :  शिविरों में पानी भरने से सैकड़ों कल्पवासी हुए विस्थापित

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 22 Jan 2022 11:27 PM IST
सार

त्रिवेणी मार्ग पर कटान का दायरा बढ़ने के साथ ही गंगा के जल प्रवाह की वजह से विस्थापित हो रही संस्थाओं की नए क्षेत्रों में शिफ्टिंग भी मेला प्रशासन के लिए सिरदर्द बनती जा रही है।

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Magh Mela: Hundreds of Kalpavasi displaced due to water filling in the camps
Prayagraj News : पानी भर जाने के कारण माघ मेले में शिविर उजड़ गए। - फोटो : प्रयागराज

गंगा का जलस्तर शनिवार को स्थिर हो गया, लेकिन कल्पवासियों की मुश्किलें और बढ़ गईं। पानी आगे न बढ़ने पाए, इसके लिए त्रिवेणी और काली मार्ग के कटान वाले दायरे पर अस्थाई तटबंध बना दिए गए, लेकिन हजारों कल्पवासियों, संतों को पानी बढ़ने की आशंका से जाग कर रात बितानी पड़ रही है। इस दिन तीन सौ से अधिक कल्पवासियों के भीगे तंबुओं और सामानों को दिन भर हटाया जाता रहा। कोरोना संक्रमण के बीच ठंड और असमय शिविरों में पानी आने से दर्जनों कल्पवासी मेला क्षेत्र छोड़ कर घर लौटने लगे हैं।




त्रिवेणी मार्ग पर कटान का दायरा बढ़ने के साथ ही गंगा के जल प्रवाह की वजह से विस्थापित हो रही संस्थाओं की नए क्षेत्रों में शिफ्टिंग भी मेला प्रशासन के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। नए क्षेत्रों में फिर से सड़क, बिजली, पेयजल और प्रसाधन की मूलभूत सुविधाओं को विकसित करने का काम बढ़ गया है। शनिवार को कटान से विस्थापित कल्पवासी और उनके परिजन कड़ाके की ठंड में पानी की वजह से सुरक्षित ठिकानों की तलाश में भटकते रहे।

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Prayagraj News : पानी भर जाने के कारण माघ मेले में शिविर उजड़ गए। - फोटो : प्रयागराज
काली और त्रिवेणी मार्ग के दर्जनों शिविर उजाड़े गए
देर शाम तक सेक्टर तीन और दो में काली और त्रिवेणी मार्ग के दोनों पटरियों पर बसे दर्जनों शिविरों को उजाड़ना पड़ा।  मौजूदा समय करीब 20 स्थानों पर कटान हो रही है और पंप लगाकर पानी निकाला जा रहा है। एक तरफ से मेला प्रशासन पानी निकलवा रहा है और दूसरी तरफ गंगा के जल प्रवाह में बढ़ोत्तरी की वजह से शिविर डूबते चले जा रहे हैं। वहीं नए क्षेत्रों में जिन शिविरों की शिफ्टिंग की जा रही है वहां मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है।


ऐसे में वहां बिजली, पानी, सड़क, गाटा मार्ग और शौचालय के इंतजाम करने के लिए अभी मशक्कत करनी पड़ रही है । शिविरों के उजड़ने और नए स्थानों पर पर्याप्त सुविधाएं न मिलने की वजह से सैकड़ों कल्पवासी माघ मेला क्षेत्र छोड़कर अपने घरों के लिए रवाना हो गए हैं। 
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Magh Mela: Hundreds of Kalpavasi displaced due to water filling in the camps
Prayagraj News : माघ मेला क्षेत्र में भरा पानी। - फोटो : प्रयागराज

करोड़ों रुपये खर्च, सैकड़ों श्रद्धालुओं को न टिन घेरा न टेंट

करोड़ों रुपये का बजट खर्च होने के बाद भी संगम की रेती पर आस्था का माघ मेला भगवान भरोसे है। सैकड़ों संस्थाओं को एक शिविरों में सुरक्षा बाड़ लगाने के लिए टिन घेरा और टेंट तक नहीं मिल सके हैं। शनिवार को मेला कार्यालय पर पचासों संस्थाओं के संचालकों की भीड़ सुविधा पर्ची के लिए अफसरों की बाट जोहती रही।

प्रभारी मेलाधिकारी के कक्ष पर तो ताला लगा ही था, अन्य अफसरों के भी कमरे बंद रहे। शाम करीब 4:40 बजे एक अफसर के आते ही भीड़ उनके पीछे दौड़ पड़ी, लेकिन हर किसी को नाउम्मीदी ही हाथ लगी। ऐसे में मेले के प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।


59 करोड़ रुपये के बजट वाले माघ मेले में इस बार भी कोरोना संक्रमण के खतरे की वजह से सैकड़ों संस्थाओं के शिविर नहीं लगे हैं। फिर भी अधिकारी बजट का रोना रो रहे हैं और सुविधाओं में भारी कटौती कर दी गई है। मेले में महीने भर दर्जन भर स्थानों पर अन्नक्षेत्र चलाकर आतिथ्य सत्कार से देश -दुनिया में भारतीय संस्कृति के गौरव का संदेश देने वाली नामी आध्यात्मिक संस्था ओम नम: शिवाय की सुविधाओं में भी कटौती कर दी गई है।

Magh Mela: Hundreds of Kalpavasi displaced due to water filling in the camps

सुविधाओं के नाम पर टिन तक नहीं मिला

ओम नम: शिवाय संस्था के संचालक प्रभुजी मेला प्रशासन के इस रवैये से आहत हैं। इसी तरह समूहों में बसने वाली आध्यात्मिक संस्था आचार्यबाड़ा की 20 से अधिक संस्थाओं को इस बार भी जमीन तो दी गई है, लेकिन सुविधा के नाम पर टिन घेरा तक नहीं दिया गया।


 

इन संस्थाओं के संचालक अपने खर्चे से मेले में सत्संग और ध्यान की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। माघ मेला कार्यालय का हफ्ते भर से चक्कर काट रहे श्रीगायत्री गौशाला संस्थान झुंझनू राजस्थान के संचालक योगी अनिल नाथ महाराज सुविधा मांगते थक चुके हैं।



उन्होंने बताया कि हर वर्ष उन्हें मेले गेट, टिनघेरा, छोलदारी यज्ञ मंडप, तख्त, शौचालय, दरी और कुर्सियां मिलती थीं, लेकिन इस बार अभी तक कुछ भी नहीं मिला है। जबकि सेक्टर पांच में अन्नपूर्णा मार्ग उत्तरी-पूर्वी पटरी के इस शिविर में भागवत कथा, यज्ञ, भंडारा के आयोजन प्रस्तावित हैं। लेकिन, सुविधाएं न मिलने से अभी तक टेंट नहीं लग सका है।

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Magh Mela: Hundreds of Kalpavasi displaced due to water filling in the camps

अफसरों के यहां चक्कर काट रहे संस्था के लोग

इसी तरह दिव्यांगों की सेवा के लिए सेक्टर पांच में ही हरिश्चंद्र मार्ग पर हृदय नारायण सेवा संस्थान को भी अभी तक सुविधाएं नहीं मिली हैं। इस संस्था के संचालक अंबुज पांडेय मेले में पिछले साल की सुविधा पर्ची और बिजली का बिल लिए अफसरों के आगे धक्के खाते फिर रहे हैं।  इतना ही नहीं मेला कार्यालय पर संतों, कल्पवासियों की पीड़ा सुनने के लिए अफसर तक नहीं मिल रहे हैं।

शनिवार की शाम तक मेला कार्यालय में लोगों को अफसरों का इंतजार था। यह तब है जब इस मेले की व्यवस्था के लिए प्रयागराज मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष/ मंडलायुक्त संजय गोयल, डीएम संजय खत्री के अलावा प्रभारी मेलाधिकारी के तौर पर पीडीए वीसी तैनात किए गए हैं। इसके अलावा कई पीसीएस अफसर भी तैनात हैं, फिर भी श्रद्धालुओं को भटकना पड़ रहा है।


सुविधाएं न मिलने की शिकायतों पर मैंने प्रभारी मेलाधिकारी को परीक्षण करने के लिए कहा है। संस्थाओं को अनुमन्य सुविधाएं हर हाल में दी जाएंगी। मेले में आने वाले संतों, श्रद्धालुओं की दिक्कतों का हल हाल में समाधान किया जाएगा। - संजय गोयल, अध्यक्ष- प्रयागराज मेला प्राधिकरण।

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