High Court : छात्रा को जबरन बुर्का पहनाने की आरोपी मुस्लिम छात्रा को नहीं मिली राहत, याचिका खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुरादाबाद जिले में एक छात्रा को जबरन बुर्का पहनाने और उसे इस्लाम धर्म अपनाने के लिए दबाव डालने के मामले में आरोपी मुस्लिम छात्रा को राहत देने से इन्कार कर दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुरादाबाद जिले में एक छात्रा को जबरन बुर्का पहनाने और उसे इस्लाम धर्म अपनाने के लिए दबाव डालने के मामले में आरोपी मुस्लिम छात्रा को राहत देने से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम जैसे महत्वपूर्ण कानूनों के उद्देश्य को शुरुआती चरण में हस्तक्षेप करके विफल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने प्राथमिकी को रद्द करने की मांग में दायर याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया यह मामला गहन जांच के योग्य है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने दिया है।
मुरादाबाद के बिलारी थाना क्षेत्र में मुस्लिम छात्रा के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज है। पीड़िता के भाई ने प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि उसकी बहन जो कक्षा 12 की छात्रा है, उसे उसकी मुस्लिम सहेलियों की ओर से ट्यूशन क्लास के दौरान प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जा रहा था। पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए अपने बयानों में खुलासा किया कि आरोपियों ने उसे जबरन बुर्का पहनाया और उसे मांसाहारी भोजन करने के लिए उकसाया। आरोपी मुस्लिम छात्राओं ने दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
याची अधिवक्ता ने दलील दी कि यह प्राथमिकी पूरी तरह से प्रतिशोध की भावना से दर्ज कराई गई है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है। हालांकि, अदालत ने केस डायरी में मौजूद साक्ष्यों, विशेष रूप से सीसीटीवी फुटेज का संज्ञान लिया, जिसमें पीड़िता को जबरन बुर्का पहनाए जाने के दृश्य दर्ज थे। न्यायालय ने टिप्पणी की कि वर्तमान समय में समाज में ऐसी प्रवृत्तियां चिंताजनक हैं जहां धर्म को दूसरों पर थोपने का प्रयास किया जाता है।
पीठ ने कहा कि युवाओं को इस उम्र में अपनी शिक्षा और राष्ट्र सेवा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि ऐसी गतिविधियों में संलिप्त होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अधिनियम के तहत ''प्रलोभन'' और ''अनुचित प्रभाव'' की परिभाषा अत्यंत व्यापक है और यह जांच का विषय है कि क्या याचिकाकर्ताओं के कृत्य इन श्रेणियों में आते हैं। जांच के बीच में हस्तक्षेप करने से इन्कार करते हुए हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक के अंतरिम आदेश को वापस ले लिया है।

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