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राजनाथ सिंह बोले : डिफेंस की तरह नॉलेज कॉरिडोर करें तैयार, नई टेक्नालॉजी से सैन्य क्षेत्र में सशक्त बनेगा भारत

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 04 May 2026 04:16 PM IST
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सार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सैन्य क्षेत्र में भारत को सशक्त बनाने के लिए डिफेंस कॉरिडोर की तरह नॉलेज कॉरिडोर तैयार करें।  ताकि उससे सीखकर हम आगे बढ़ सकें और देश और सैन्य क्षेत्र और में सशक्त कर सकें।

Rajnath Singh said: Develop knowledge corridors like defense, new technology will strengthen India
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सम्मानित करते चीफ डिफेंस स्टाफ। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सैन्य क्षेत्र में भारत को सशक्त बनाने के लिए डिफेंस कॉरिडोर की तरह नॉलेज कॉरिडोर तैयार करें।  ताकि उससे सीखकर हम आगे बढ़ सकें और देश और सैन्य क्षेत्र और में सशक्त कर सकें। भारत की सैना हर मुश्किल का सामना करना में पूरी तरह से सक्षम है इसमें कोई संदेह नहीं है। उसका उदाहरण देश ने ऑपरेशन सिंदूर में देखा। न्यू कैंट में आयोजित रक्षा त्रिवेणी संगम सिम्पोजियम 2026 के उद्घाटन के मौके पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। 

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रक्षाा मंत्री ने कहा कि हमे ऐक्टिव नहीं प्रो एक्टिव रहने की जरूरत है। डिफेंस के क्षेत्र में चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। दुश्मन हम पर हावी न हो सके इसलिए हम प्रो ऐक्टिव रहने की जरूरत है। हमें अपनी क्षमता विकसित करनी चाहिए। बदलती परिस्थितियों के लिहाज से हमें समय के साथ बदलने की जरूरत है और नई और अत्याधुनिक तकनीकि के माद्यम से आगे बढ़ने की जरूरत है। यह सिद्धांत बिल्कुल सत्य है कि जो समय के साथ चलेगा वही आगे रहेगाा। नई तकनीकी को आत्मसात करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सिस्टम को मजबूत करने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जा रहा है। प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर को भी आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। रक्षा क्षेत्र में कई नए प्रोजेक्ट तैयार किए गए हैं। 

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रक्षा त्रिवेणी संगम सिम्पोजियम में मौजूद सैन्य अधिकारी व अन्य। - फोटो : अमर उजाला।

राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारी इंडस्ट्री की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। यह सुनकर प्रसन्नता होती है। लोग हमारे साथ कार्य करने के इच्छुक है। यह कोई मामूली बात नहीं है। कहा कि रिसर्च का कोई विकल्प नहीं है। आने वाला समय रिसर्च और लैब का होगा। युद्ध कैसे लड़ा जाएगा और जीता जाएगा यह लैब तय करेगा। हमें पाने के लिए पूरा आसमान है। भारत रक्षा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। बदलती दुनिया के साथ हमे भी बदलने और नई चीजों को सीखने और आत्मसात करने की जरूरत है। डीआरडीओ के माध्यम से रिसर्च को आगे ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। कहा कि सरकार आपके साथ पूरी ताकत से खड़ी है। 

भविष्य के युद्धों के लिए लैब में तैयार हो रही जीत की रणनीति : राजनाथ

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को संगम नगरी प्रयागराज में आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप और भारत की भविष्य की तैयारियों का शंखनाद किया। नॉर्थ टेक सिंपोजियम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि आज के दौर में युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि प्रयोगशालाओं में लड़े और जीते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा अनुसंधान अब सरकार की प्राथमिकताओं के शीर्ष पर है और जो देश तकनीकी क्रांति को सबसे तेज गति से अपनाएगा, उसे ही भविष्य के युद्धों में निर्णायक बढ़त हासिल होगी।

राजनाथ सिंह ने अप्रत्याशित घटक यानी सरप्राइज एलिमेंट पर जोर देते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि जीत हमेशा उसी की होती है जो दुश्मन पर अचानक और अचूक वार करने की क्षमता रखता है। उन्होंने रक्षा क्षेत्र के दिग्गजों, स्टार्टअप्स और वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे निर्देशित ऊर्जा हथियारों, हाइपरसोनिक सिस्टम, स्पेस अवेयरनेस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते क्षेत्रों में महारत हासिल करें। रक्षा मंत्री ने भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर की सराहना करते हुए इसे आधुनिक तकनीकी युद्ध का उत्कृष्ट उदाहरण बताया, जिसमें स्वदेशी आकाश और ब्रह्मोस जैसी प्रणालियों ने देश के अटूट आत्मविश्वास और युद्ध की बदलती प्रकृति की समझ को दुनिया के सामने पेश किया है।

भारतीय सेना के उत्तरी एवं मध्य कमान तथा भारतीय रक्षा निर्माता सोसायटी की ओर से न्यू कैंट स्थित कोबरा ऑडिटोरियम में आयोजित तीन दिवसीय नॉर्थ टेक सिंपोजियम के उद्घाटन सत्र में रक्षा कर्मियों, उद्योगपतियों, नवप्रवर्तकों, स्टार्टअप्स और शिक्षा जगत के प्रतिनिधियों को संबोधित करते राजनाथ सिंह ने लेबनान और सीरिया के पेजर हमलों का उदाहरण देते हुए आगाह किया कि अब दैनिक जीवन की सामान्य वस्तुएं भी घातक हथियार बन सकती हैं, ऐसे में भारत को अप्रत्याशित चुनौतियों के लिए हर पल तैयार रहना होगा।

रक्षा मंत्री ने स्वदेशी क्षमताओं पर जोर देते हुए बताया कि भारत अब रक्षा अनुसंधान में उद्योगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा है। राजनाथ सिंह ने वैज्ञानिकों और उद्योगपतियों का आह्वान किया कि वे निर्देशित ऊर्जा हथियार, हाइपरसोनिक सिस्टम, क्वांटम तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल करें ताकि भारत आने वाले समय में दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति बनकर उभरे।

इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इस अवसर पर थल सेना अध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, मध्य कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, उत्तरी कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा, मध्य वायु कमान के एयर मार्शल बालकृष्णन मणिकांतन, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा के महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन, एसआईडीएम के अध्यक्ष अरुण टी रामचंदानी, आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर रामकृष्णन एस आदि मौजूद रहे।

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