SRN Hospital : ह्दय रोग और गैस्ट्रोलॉजी विभाग में नहीं है आग से निपटने के इंतजाम
स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) में फायर फाइटिंग सिस्टम लगाने के लिए मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (एमएलएन) और यूपीसीडा के बीच हुआ मनमाना करार परेशानी का कारण बन गया है।
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स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) में फायर फाइटिंग सिस्टम लगाने के लिए मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (एमएलएन) और यूपीसीडा के बीच हुआ मनमाना करार परेशानी का कारण बन गया है। ऐसे में अभी भी अस्पताल के ह्दय रोग और गैस्ट्रोलॉजी विभाग में हाइड्रेंट सिस्टम नहीं लग सका है।
ह्दय रोग और गैस्ट्रोलॉजी विभाग में हर समय 50 से अधिक मरीज व तीमारदार मौजूद रहते हैं। 2016 में यूपीसीडा ने एसआरएन अस्पताल कैंपस में करीब साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से फायर फाइटिंग सिस्टम लगाने का करार किया था। इस दौरान सिर्फ पुरानी बिल्डिंग व सर्जिकल इमरजेंसी की इमारत में फायर सिस्टम लगा।
इस दौरान ट्रॉमा, पीएमएसएसवाई, गैस्ट्रोलॉजी और ह्दय रोग विभाग में हाइड्रेट सिस्टम नहीं लगाया गया। वहीं, कॉलेज प्रशासन के जोर देने पर ट्रॉमा सेंटर और पीएमएसएसवाई बिल्डिंग में सिस्टम लगा दिया गया। मगर संस्थान ने इस बजट में गैस्ट्रोलॉजी और ह्दय रोग विभाग में हाइड्रेंट सिस्टम लगाने से मना कर दिया।
ऐसे में इन दोनों विभागों में फायर सेफ्टी के लिए सिलिंडर रखे गए हैं। इसके अलावा अस्पताल के किसी भी वार्ड में धुएं की सुगबुगाहट होते ही अपने आप पानी छोड़ने वाले स्प्रिंकलर नहीं लगाए गए हैं। वहीं, पानी स्टोर के लिए अंडर ग्राउंड वाटर टैंक भी नहीं हैं।
ट्रॉमा सेंटर और पीएमएसएसवाई बिल्डिंग को नहीं मिली एनओसी
अग्निशमन विभाग ने अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर और पीएमएसएसवाई बिल्डिंग को एनओसी देने से मना कर दिया। उन्होंने ट्रॉमा में निकासी द्वार को लेकर आपत्ति दर्ज कराई। इसके अलावा पीएमएसएसवाई बिल्डिंग में खिड़कियां बाहर की तरफ खुलने की वजह से एनओसी नहीं दी। इसकी वजह से अभी तक यहां के फायर सिस्टम अभी तक कॉलेज प्रशासन को हैंडओवर नहीं हुआ है।
अस्पताल के अग्निशमन उपकरण पूरी तरह से ठीक हैं। पुरानी बिल्डिंग की एनओसी मिल चुकी है। बाकी ट्रॉमा सेंटर और पीएमएसएसवाई बिल्डिंग की एनओसी के लिए जो दिक्कत है, उसे भी जल्द दूर कर लिया जाएगा। गैस्ट्रोलॉजी और ह्दय रोग विभाग में जल्द हाइड्रेंट सिस्टम लगाने की तैयारी है। - डॉ. वीके पांडेय, प्राचार्य, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज।