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Ambedkar Nagar News: बेवाना में बनेगा ट्रॉमा सेंटर,बजट में मिली सौगात
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Thu, 12 Feb 2026 12:32 AM IST
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेवाना का भवन।
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अंबेडकरनगर। बजट में घोषणा के साथ ही अकबरपुर के बेवाना में ट्रॉमा सेंटर बनने की उम्मीद तेज हो गई है। स्वास्थ्य विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। इसके बनने से जिले के लोगों को इलाज के लिए लखनऊ रेफर होने की मजबूरी से राहत मिलेगी।
फिलहाल जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में गंभीर मरीजों के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं, जिसके कारण उन्हें अक्सर लखनऊ भेजा जाता है। जिला अस्पताल में रोजाना हादसे या मारपीट के दस से बारह गंभीर मरीज आते हैं, जिन्हें केवल प्राथमिक उपचार ही मिल पाता है। अस्पताल में पहले बनी कंप्रहेंसिव यूनिट भी स्टाफ और संसाधनों के अभाव में धूल फांक रही है।
जिला अस्पताल में जगह की कमी है, जबकि बेवाना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पास पर्याप्त भूमि उपलब्ध है। यह स्थान पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के बिल्कुल पास है, जिससे हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं के पीड़ितों को तुरंत इलाज मिल सकेगा। शासन की मंजूरी से पहले ही यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती शुरू कर दी गई है। सीएमओ डॉ. संजय कुमार शैवाल ने बताया कि बेवाना में ट्रॉमा सेंटर के लिए जमीन चिह्नित कर ली गई है। मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू होगा, जिससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ हाईवे से गुजरने वाले यात्रियों को भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।
बॉक्स
जिला अस्पताल में आईसीयू है लेकिन पूरा इलाज नहीं
वर्तमान में जिला अस्पताल की क्षमता 200 बेड की है, जहां आईसीयू और पीआईसीयू जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। इसके बावजूद, इमरजेंसी में आने वाले गंभीर मरीजों का यहां पूरी तरह इलाज नहीं हो पाता, जिस कारण उन्हें अक्सर मेडिकल कॉलेज या लखनऊ रेफर करना पड़ता है। हालांकि, राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर में क्रिटिकल केयर यूनिट का काम चल रहा है, लेकिन फिलहाल वहां भी ट्रॉमा के मामलों से निपटने के स्थायी इंतजाम नहीं हैं। प्रशासन का कहना है कि वर्तमान सीमित संसाधनों के जरिए ही मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने की कोशिश की जा रही है।
लोगों की राय
हादसों में गंभीर रूप से घायल लोगों को समय पर सही इलाज नहीं मिल पाता, जिससे उन्हें रेफर करना पड़ता है। ऐसे में जिले के लिए ट्रॉमा सेंटर बहुत ही उपयोगी साबित होगा। इसकी स्थापना से स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार होगा।
- आलोक सिंह, अध्यक्ष ट्रांसपोर्ट यूनियन
बजट में स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दी गई है। वर्तमान में जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में मरीजों का भारी दबाव रहता है। ट्रॉमा सेंटर बनने से इस भीड़ में कमी आएगी और जिलेवासियों को बड़ी राहत मिलेगी।
- प्रवीण गुप्ता, यूथ आइकॉन
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फिलहाल जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में गंभीर मरीजों के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं, जिसके कारण उन्हें अक्सर लखनऊ भेजा जाता है। जिला अस्पताल में रोजाना हादसे या मारपीट के दस से बारह गंभीर मरीज आते हैं, जिन्हें केवल प्राथमिक उपचार ही मिल पाता है। अस्पताल में पहले बनी कंप्रहेंसिव यूनिट भी स्टाफ और संसाधनों के अभाव में धूल फांक रही है।
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जिला अस्पताल में जगह की कमी है, जबकि बेवाना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पास पर्याप्त भूमि उपलब्ध है। यह स्थान पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के बिल्कुल पास है, जिससे हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं के पीड़ितों को तुरंत इलाज मिल सकेगा। शासन की मंजूरी से पहले ही यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती शुरू कर दी गई है। सीएमओ डॉ. संजय कुमार शैवाल ने बताया कि बेवाना में ट्रॉमा सेंटर के लिए जमीन चिह्नित कर ली गई है। मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू होगा, जिससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ हाईवे से गुजरने वाले यात्रियों को भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।
बॉक्स
जिला अस्पताल में आईसीयू है लेकिन पूरा इलाज नहीं
वर्तमान में जिला अस्पताल की क्षमता 200 बेड की है, जहां आईसीयू और पीआईसीयू जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। इसके बावजूद, इमरजेंसी में आने वाले गंभीर मरीजों का यहां पूरी तरह इलाज नहीं हो पाता, जिस कारण उन्हें अक्सर मेडिकल कॉलेज या लखनऊ रेफर करना पड़ता है। हालांकि, राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर में क्रिटिकल केयर यूनिट का काम चल रहा है, लेकिन फिलहाल वहां भी ट्रॉमा के मामलों से निपटने के स्थायी इंतजाम नहीं हैं। प्रशासन का कहना है कि वर्तमान सीमित संसाधनों के जरिए ही मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने की कोशिश की जा रही है।
लोगों की राय
हादसों में गंभीर रूप से घायल लोगों को समय पर सही इलाज नहीं मिल पाता, जिससे उन्हें रेफर करना पड़ता है। ऐसे में जिले के लिए ट्रॉमा सेंटर बहुत ही उपयोगी साबित होगा। इसकी स्थापना से स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार होगा।
- आलोक सिंह, अध्यक्ष ट्रांसपोर्ट यूनियन
बजट में स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दी गई है। वर्तमान में जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में मरीजों का भारी दबाव रहता है। ट्रॉमा सेंटर बनने से इस भीड़ में कमी आएगी और जिलेवासियों को बड़ी राहत मिलेगी।
- प्रवीण गुप्ता, यूथ आइकॉन
