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Ambedkar Nagar News: हत्या के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज
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अंबेडकरनगर। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट चिंता राम की अदालत ने हत्या के आरोपी अशोक चौबे की जमानत अर्जी अपराध की गंभीरता को देखते हुए खारिज कर दी। मामला जैतपुर थाने से जुड़ा है, जिसमें आरोपी पर हत्या और आर्म्स एक्ट की रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
अभियोजन के अनुसार, जैतपुर के चौबाना निवासी अविनाश उपाध्याय ने पुलिस को प्रार्थनापत्र देकर बताया था कि 26 जनवरी 2025 की शाम उनके चचेरे भाई काजू उपाध्याय उर्फ आदित्य उपाध्याय घर से खेत की ओर निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। अगले दिन उनका शव लैतपुर गांव में चाैबे मिश्र की बाग के पास खड़ंजे पर मिला था।
तहरीर में आरोप लगाया था कि घटना से पहले मृतक की अशोक चौबे के साथ शराब पीने को लेकर लड़ाई हुई थी। इस आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अदालत ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अवलोकन किया, जिसमें मृतक के शरीर पर आठ चोटें मिली थीं। चिकित्सक ने मृत्यु का कारण चोटों से हुआ रक्तस्राव और सदमा बताया। आरोपी की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त छुरी की बरामदगी भी दर्शाई गई है। विवेचना के बाद आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल हो चुका है।
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अदालत ने कहा कि मामला हत्या जैसे जघन्य अपराध से जुड़ा है और अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को जमानत पर रिहा किए जाने का पर्याप्त आधार नहीं है। इसके बाद प्रार्थनापत्र निरस्त कर दिया गया।
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अभियोजन के अनुसार, जैतपुर के चौबाना निवासी अविनाश उपाध्याय ने पुलिस को प्रार्थनापत्र देकर बताया था कि 26 जनवरी 2025 की शाम उनके चचेरे भाई काजू उपाध्याय उर्फ आदित्य उपाध्याय घर से खेत की ओर निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। अगले दिन उनका शव लैतपुर गांव में चाैबे मिश्र की बाग के पास खड़ंजे पर मिला था।
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तहरीर में आरोप लगाया था कि घटना से पहले मृतक की अशोक चौबे के साथ शराब पीने को लेकर लड़ाई हुई थी। इस आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अदालत ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अवलोकन किया, जिसमें मृतक के शरीर पर आठ चोटें मिली थीं। चिकित्सक ने मृत्यु का कारण चोटों से हुआ रक्तस्राव और सदमा बताया। आरोपी की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त छुरी की बरामदगी भी दर्शाई गई है। विवेचना के बाद आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल हो चुका है।
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अदालत ने कहा कि मामला हत्या जैसे जघन्य अपराध से जुड़ा है और अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को जमानत पर रिहा किए जाने का पर्याप्त आधार नहीं है। इसके बाद प्रार्थनापत्र निरस्त कर दिया गया।