{"_id":"69bd8534843b9aa2cb01221e","slug":"inner-faith-is-more-important-than-outer-appearance-ambedkar-nagar-news-c-91-1-abn1014-152731-2026-03-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambedkar Nagar News: बाहरी दिखावे से अधिक आंतरिक श्रद्धा महत्वपूर्ण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambedkar Nagar News: बाहरी दिखावे से अधिक आंतरिक श्रद्धा महत्वपूर्ण
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Fri, 20 Mar 2026 11:04 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
आलापुर। क्षेत्र के भगवानपुर मंझरिया में श्रीराम कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को देवी सती से मां पार्वती तक की पौराणिक यात्रा का वर्णन किया गया। प्रवाचक रघुवीरदास ने कहा कि देवी सती ने पति भगवान शिव के अपमान को सहन न करते हुए अपने प्राण त्याग दिए। इसके बाद सती ने भगवान विष्णु से यह वरदान लिया कि अगले जन्म में उन्हें शिव ही पति रूप में प्राप्त हों।
कालांतर में वे पर्वतराज हिमालय के घर गौरी के रूप में जन्मीं, जिन्हें मां पार्वती के नाम से जाना जाता है। देवर्षि नारद के मार्गदर्शन में पार्वती ने कम आयु में ही कठोर तपस्या शुरू की। उनकी भक्ति और संकल्प की परीक्षा लेने के लिए सप्तऋषि पहुंचे, लेकिन पार्वती अपने उद्देश्य से विचलित नहीं हुईं। लंबी तपस्या के बाद शिव प्रसन्न हुए और पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार किया। इसके साथ ही उनका विवाह संपन्न हुआ। शिव के तेज से भगवान कार्तिकेय का जन्म हुआ। आगे चलकर कार्तिकेय ने अत्याचारी तारकासुर का वध किया और देवताओं को भयमुक्त किया। बाहरी दिखावे से अधिक आंतरिक श्रद्धा महत्वपूर्ण है। इस दौरान डॉ. जामवंत प्रजापति, पंडित ज्ञानधर द्विवेदी, डॉ.राजेश पांडेय, विनोद, सुखसागर उपाध्याय, संजय सिंह, ठाकुर प्रसाद पांडेय, राम विजय शर्मा, शैलेश प्रजापति व अन्य उपस्थित रहे।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
जीवन में दिशा पाने के लिए आत्ममंथन आवश्यक
आलापुर। क्षेत्र के आमा दरवेशपुर में श्रीमद्भागवत कथा का बृहस्पतिवार को समापन हुआ। प्रवाचक पंडित राकेश तिवारी ने कहा कि भागवत कथा मनुष्य के जीवन को शुद्ध और अनुशासित बनाने का प्रभावी माध्यम है। जब व्यक्ति ईश्वर की शरण ग्रहण करता है, तो उसके जीवन में व्याप्त मानसिक अशांति और दुख कम होते हैं। जीवन में दिशा पाने के लिए समय-समय पर आत्ममंथन आवश्यक है। सच्चे संतुलन और शांति के लिए अहंकार छोड़ना जरूरी है। निस्वार्थ भाव से किया गया कार्य स्थायी संतोष देता है। भौतिक जीवन के साथ आध्यात्मिक संतुलन बनाए रखना जरूरी है। इस दौरान डॉ. बृजेश यादव, करुणा यादव, मुकेश व अन्य उपस्थित रहे।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
ज्ञान को प्राप्त करने के लिए आस्था आवश्यक
जमुनीपुर। क्षेत्र के बिहलोलपुर में श्रीराम कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को राम कथा की महत्ता और आध्यात्मिक प्रभाव का वर्णन किया गया। प्रवाचक जगजीवनानंद ने बताया कि किसी भी ज्ञान को प्राप्त करने के लिए आस्था आवश्यक है। अच्छे विचारों और संगति से जीवन की दिशा बदलती है। राम का जीवन कर्तव्य निभाने की प्रेरणा देता है। कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और साहस जरूरी है। जीवन में संस्कार और अनुशासन का आधार है। पिंटू उपाध्याय, अखिलेश सिंह, रत्नेश सिंह, विपिन द्विवेदी व अन्य उपस्थित रहे।
Trending Videos
कालांतर में वे पर्वतराज हिमालय के घर गौरी के रूप में जन्मीं, जिन्हें मां पार्वती के नाम से जाना जाता है। देवर्षि नारद के मार्गदर्शन में पार्वती ने कम आयु में ही कठोर तपस्या शुरू की। उनकी भक्ति और संकल्प की परीक्षा लेने के लिए सप्तऋषि पहुंचे, लेकिन पार्वती अपने उद्देश्य से विचलित नहीं हुईं। लंबी तपस्या के बाद शिव प्रसन्न हुए और पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार किया। इसके साथ ही उनका विवाह संपन्न हुआ। शिव के तेज से भगवान कार्तिकेय का जन्म हुआ। आगे चलकर कार्तिकेय ने अत्याचारी तारकासुर का वध किया और देवताओं को भयमुक्त किया। बाहरी दिखावे से अधिक आंतरिक श्रद्धा महत्वपूर्ण है। इस दौरान डॉ. जामवंत प्रजापति, पंडित ज्ञानधर द्विवेदी, डॉ.राजेश पांडेय, विनोद, सुखसागर उपाध्याय, संजय सिंह, ठाकुर प्रसाद पांडेय, राम विजय शर्मा, शैलेश प्रजापति व अन्य उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
जीवन में दिशा पाने के लिए आत्ममंथन आवश्यक
आलापुर। क्षेत्र के आमा दरवेशपुर में श्रीमद्भागवत कथा का बृहस्पतिवार को समापन हुआ। प्रवाचक पंडित राकेश तिवारी ने कहा कि भागवत कथा मनुष्य के जीवन को शुद्ध और अनुशासित बनाने का प्रभावी माध्यम है। जब व्यक्ति ईश्वर की शरण ग्रहण करता है, तो उसके जीवन में व्याप्त मानसिक अशांति और दुख कम होते हैं। जीवन में दिशा पाने के लिए समय-समय पर आत्ममंथन आवश्यक है। सच्चे संतुलन और शांति के लिए अहंकार छोड़ना जरूरी है। निस्वार्थ भाव से किया गया कार्य स्थायी संतोष देता है। भौतिक जीवन के साथ आध्यात्मिक संतुलन बनाए रखना जरूरी है। इस दौरान डॉ. बृजेश यादव, करुणा यादव, मुकेश व अन्य उपस्थित रहे।
ज्ञान को प्राप्त करने के लिए आस्था आवश्यक
जमुनीपुर। क्षेत्र के बिहलोलपुर में श्रीराम कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को राम कथा की महत्ता और आध्यात्मिक प्रभाव का वर्णन किया गया। प्रवाचक जगजीवनानंद ने बताया कि किसी भी ज्ञान को प्राप्त करने के लिए आस्था आवश्यक है। अच्छे विचारों और संगति से जीवन की दिशा बदलती है। राम का जीवन कर्तव्य निभाने की प्रेरणा देता है। कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और साहस जरूरी है। जीवन में संस्कार और अनुशासन का आधार है। पिंटू उपाध्याय, अखिलेश सिंह, रत्नेश सिंह, विपिन द्विवेदी व अन्य उपस्थित रहे।