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Ambedkar Nagar News: गांवों की चौखट तक पहुंचा सरयू का पानी

Sat, 08 Aug 2026 10:39 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 08 Aug 2026 10:39 PM IST
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The water of Saryu has reached the village thresholds
टांडा क्षेत्र में उल्टहवा माझा के बाहर गांव तक पहुंचा पानी। संवाद
राजेसुल्तानपुर/विद्युतनगर। पहाड़ों पर बारिश और बैराजों से पानी छोड़े जाने से सरयू नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। शनिवार को 11 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे नदी का जलस्तर 84.79 मीटर से बढ़कर 84.90 मीटर पहुंच गया है। नदी अब खतरे के निशान से महज 66 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। आलापुर व टांडा तहसील क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने के साथ ही गांवों की चौखट तक पानी पहुंचने लगा है। साथ ही खेतों में पानी भरने का सिलसिला शुरू हो गया है। इससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ती जा रही है।
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आलापुर तहसील क्षेत्र में सरयू नदी का पानी अब आराजी देवारा के बंधे के किनारे तक पहुंच गया है। करिया लोनिया का पूरा गांव के आसपास पानी पहुंचने से ग्रामीण चिंतित हैं। निचले हिस्से में पानी भरने से करीब 10 से 12 बीघा धान की फसल जलमग्न हो गई है। खेतों में खड़ी फसल के पानी में डूबने से किसानों को नुकसान की चिंता सताने लगी है। किसान राम आसरे, धर्मेंद्र, राम सिधारे और सतीराम ने बताया कि सरयू का पानी अगर इसी तरह बढ़ता रहा तो आराजी देवारा के साथ मांझा कम्हरिया के करीब एक दर्जन मजरे चारों तरफ से पानी से घिर सकते हैं।
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उधर, मांझा क्षेत्र में सरयू के बढ़ते दबाव के बीच कटान का खतरा भी बना हुआ है। कुछ स्थानों पर कटान अभी थम नहीं रही है। टांडा तहसील क्षेत्र के उल्टहवा माझा, माझा कला, माझा चिंतौरा, केवटला, नदी नसरुल्लापुर, अवसानपुर, नैपुरा, सलोनाघाट, ढेलमऊ, फूलपुर और डुहिया समेत कई गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। बाढ़ का पानी नालों से होकर पगडंडियों और खेताें तक तेजी से पहुंच गया है। राहत की बात यह है कि अभी तक पानी गांव के अंदर नहीं पहुंचा है। प्रधान शिवप्रसाद ने बताया कि ग्रामीणों को बाढ़ की स्थिति में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जागरूक किया गया है। कोई आपात स्थिति बनने पर तत्काल प्रशासन को सूचना दी जाएगी।
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गांवों का संपर्क हो सकता है प्रभावित

ग्रामीणों के मुताबिक बाढ़ के दिनों में सबसे अधिक परेशानी गांव से बाहर निकलने और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में होती है। कई रास्ते पानी में डूब जाने से ग्रामीणों का मुख्य मार्गों से संपर्क प्रभावित हो जाता है। इसके अलावा पशुपालकों के सामने पशुओं के लिए हरे चारे का संकट खड़ा हो जाता है। ग्रामीणों को डर है कि यदि नदी का पानी और बढ़ा तो निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है।


गांवों में नाव तैयार, प्रशासन की निगरानी बढ़ी
सरयू के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन भी सतर्क हो गया है। एसडीएम धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि नदी का जलस्तर बढ़ा जरूर है, लेकिन अभी खतरे के निशान से नीचे है। मांझा कम्हरिया और आराजी देवारा में आधा दर्जन नावें लगाई गई हैं और नाविकों को भी सतर्क कर दिया गया है। जरूरत पड़ने पर इन नावों का इस्तेमाल ग्रामीणों के आवागमन के लिए किया जाएगा। वहीं, एसडीएम टांडा संजीव सिंह ने भी लगातार निगरानी रखने की बात कही।
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