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Amethi News: आषाढ़ गुप्त नवरात्र आज से, शक्ति पीठों में शुरू होगी साधना
Wed, 15 Jul 2026 12:44 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 15 Jul 2026 12:44 AM IST
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गुप्त नवरात्रि पर सजाया गया मुसाफिरखाना स्थित नवदेव दुर्गा मंदिर। -संवाद
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जगदीशपुर। आषाढ़ गुप्त नवरात्र बुधवार से शुरू होगी। उदयातिथि के अनुसार 15 से 23 जुलाई तक चलने वाले इस पर्व को लेकर प्रमुख शक्तिपीठों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। संग्रामपुर के कालिकन धाम, मुसाफिरखाना के हिंगलाज धाम, गौरीगंज के देवीपाटन धाम, सिंहपुर के अहोरवा भवानी मंदिर सहित अन्य देवी मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, जप और साधना होगी। श्रद्धालु शुभ मुहूर्त में घटस्थापना कर मां आदिशक्ति की आराधना का संकल्प लेंगे।
पंडित आशुतोष पांडेय ने बताया कि गुप्त नवरात्र का विशेष महत्व साधना, मंत्र जाप और आध्यात्मिक उपासना के कारण माना जाता है। इस दौरान 10 महाविद्याओं की आराधना का विधान है। श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें। चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर मिट्टी के पात्र में जौ बोएं और उसके ऊपर जल से भरा कलश स्थापित करें।
कलश पर मौली, आम के पत्ते और नारियल स्थापित कर अखंड दीप प्रज्ज्वलित करें। इसके बाद दुर्गा सप्तशती, देवी कवच और अर्गला स्तोत्र का पाठ करते हुए मां भगवती की आराधना करें। उन्होंने बताया कि नौ दिनों तक नियम, संयम और सात्विक जीवनचर्या के साथ पूजा करने से साधना सिद्ध होने की मान्यता है।
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नौ दिनों तक ऐसे होगी आराधना
प्रतिपदा : घटस्थापना, मां काली की पूजा
द्वितीया : मां तारा
तृतीया : मां त्रिपुरा सुंदरी
चतुर्थी : मां भुवनेश्वरी
पंचमी : मां छिन्नमस्ता
षष्ठी : मां त्रिपुरा भैरवी
सप्तमी : मां धूमावती
अष्टमी : मां बगलामुखी
नवमी : मां मातंगी एवं मां कमला
घटस्थापना का शुभ समय
प्रतिपदा तिथि : 14 जुलाई दोपहर 3:12 बजे से 15 जुलाई सुबह 11:50 बजे तक
घटस्थापना : सुबह 6:01 से 10:17 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 4:11 से 4:52 बजे तक विजय मुहूर्त : दोपहर 2:45 से 3:40 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त : शाम 7:20 से 7:40 बजे तक।
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पंडित आशुतोष पांडेय ने बताया कि गुप्त नवरात्र का विशेष महत्व साधना, मंत्र जाप और आध्यात्मिक उपासना के कारण माना जाता है। इस दौरान 10 महाविद्याओं की आराधना का विधान है। श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें। चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर मिट्टी के पात्र में जौ बोएं और उसके ऊपर जल से भरा कलश स्थापित करें।
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कलश पर मौली, आम के पत्ते और नारियल स्थापित कर अखंड दीप प्रज्ज्वलित करें। इसके बाद दुर्गा सप्तशती, देवी कवच और अर्गला स्तोत्र का पाठ करते हुए मां भगवती की आराधना करें। उन्होंने बताया कि नौ दिनों तक नियम, संयम और सात्विक जीवनचर्या के साथ पूजा करने से साधना सिद्ध होने की मान्यता है।
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नौ दिनों तक ऐसे होगी आराधना
प्रतिपदा : घटस्थापना, मां काली की पूजा
द्वितीया : मां तारा
तृतीया : मां त्रिपुरा सुंदरी
चतुर्थी : मां भुवनेश्वरी
पंचमी : मां छिन्नमस्ता
षष्ठी : मां त्रिपुरा भैरवी
सप्तमी : मां धूमावती
अष्टमी : मां बगलामुखी
नवमी : मां मातंगी एवं मां कमला
घटस्थापना का शुभ समय
प्रतिपदा तिथि : 14 जुलाई दोपहर 3:12 बजे से 15 जुलाई सुबह 11:50 बजे तक
घटस्थापना : सुबह 6:01 से 10:17 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 4:11 से 4:52 बजे तक विजय मुहूर्त : दोपहर 2:45 से 3:40 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त : शाम 7:20 से 7:40 बजे तक।