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Amethi News: अंडरपास में भरा पानी, आवागमन बाधित
Fri, 31 Jul 2026 12:46 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Fri, 31 Jul 2026 12:46 AM IST
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. बहादुरपुर-गंगाराम संपर्क मार्ग पर रेलवे के नवनिर्मित अंडरपास में भरा पानी। संवाद
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जायस। बहादुरपुर-गंगाराम संपर्क मार्ग पर रेलवे का नवनिर्मित अंडरपास पहली ही बारिश में ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होने से हल्की बारिश में भी अंडरपास में पानी भर जाता है। इससे राहगीरों और वाहन चालकों का आवागमन बाधित हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी जलनिकासी की व्यवस्था नहीं की गई, जिससे हर बारिश में यही समस्या सामने आ जाती है।
अंडरपास में जलभराव होने से खरौली, बघेल, मवई आलमपुर, बेहटा, भुलामऊ सहित 18 से अधिक गांवों के करीब 10 हजार लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। स्कूली बच्चों, मरीजों, किसानों और नौकरीपेशा लोगों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। कई बार पानी इतना भर जाता है कि दोपहिया और चार पहिया वाहन गुजर नहीं पाते और लोगों को लौटना पड़ता है।
संतराम व कपिल के अनुसार पहले बहादुरपुर से गंगाराम मार्ग होते हुए तीन किलोमीटर की दूरी तय कर जायस पहुंच जाते थे, लेकिन अंडरपास में जलभराव होने पर उन्हें जायस कस्बे से होकर करीब सात किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। इससे समय के साथ ईंधन का खर्च भी बढ़ जाता है। किसानों को कृषि कार्य और उपज की ढुलाई में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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रामसुमिरन और कल्पनाथ का कहना है कि अंडरपास निचले स्तर पर बनाया गया है, लेकिन वर्षा जल की निकासी के लिए न तो नाला बनाया गया और न ही पानी निकालने की कोई स्थायी व्यवस्था की गई। लोगों ने प्रशासन और रेलवे से अंडरपास में जलनिकासी की प्रभावी व्यवस्था कराने की मांग की है, ताकि बारिश के दौरान आवागमन सुचारु रह सके।
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अंडरपास में जलभराव होने से खरौली, बघेल, मवई आलमपुर, बेहटा, भुलामऊ सहित 18 से अधिक गांवों के करीब 10 हजार लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। स्कूली बच्चों, मरीजों, किसानों और नौकरीपेशा लोगों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। कई बार पानी इतना भर जाता है कि दोपहिया और चार पहिया वाहन गुजर नहीं पाते और लोगों को लौटना पड़ता है।
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संतराम व कपिल के अनुसार पहले बहादुरपुर से गंगाराम मार्ग होते हुए तीन किलोमीटर की दूरी तय कर जायस पहुंच जाते थे, लेकिन अंडरपास में जलभराव होने पर उन्हें जायस कस्बे से होकर करीब सात किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। इससे समय के साथ ईंधन का खर्च भी बढ़ जाता है। किसानों को कृषि कार्य और उपज की ढुलाई में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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रामसुमिरन और कल्पनाथ का कहना है कि अंडरपास निचले स्तर पर बनाया गया है, लेकिन वर्षा जल की निकासी के लिए न तो नाला बनाया गया और न ही पानी निकालने की कोई स्थायी व्यवस्था की गई। लोगों ने प्रशासन और रेलवे से अंडरपास में जलनिकासी की प्रभावी व्यवस्था कराने की मांग की है, ताकि बारिश के दौरान आवागमन सुचारु रह सके।